#GodMorningThursday
नर से फिर पशुवा कीजै,गधा,बैल बनाई। छप्पन भोग कहाँ मन बौरे, कहीं कुरडी चरने जाई ।।
भावार्थ: -मनुष्य जीवन में हम कितने अच्छे अर्थात 56 प्रकार के भोजन खाते हैं।भक्ति न करने से या शास्त्र विरुद्ध साधना करने से गधा बनेगा, फिर ये 56 प्रकार के भोजन कहां प्राप्त होंगे












