अधिक मास, अधिमास, मलमास, Adhikmas,कब व कैसे होता है? अधिक मास में क्या क...
अधिक मास, अधिमास, मलमास, Adhikmas, कब व कैसे होता है? अधिक मास में क्या करें By Pandit Pradeep Pandey 9871030464 #अधिकमास, #अधिमास, #मलमास, #Adhikmas #पंचांग की #गणनानुसार 1 मास अधिक होता है तब उसे '#अधिक #मास' कहा जाता है। #हिन्दू #शास्त्रों में '#अधिक मास' को बड़ा ही #पवित्र माना गया है, इसलिए '#अधिक मास' को '#पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है। '#पुरुषोत्तम मास' अर्थात् #भगवान #पुरुषोत्तम का मास। #शास्त्रों के अनुसार '#अधिकमास' में #व्रत #पारायण करना, #पवित्र नदियों में #स्नान करना एवं #तीर्थ स्थानों की यात्रा का बहुत #पुण्यप्रद होती है। #आइए #जानते हैं कि '#अधिक मास' #कब व #कैसे होता है? #पंचांग #गणना के अनुसार एक #सौर वर्ष में 365 दिन, 15 घटी, 31 पल व 30 #विपल होते हैं जबकि #चन्द्र #वर्ष में 354 दिन, 22 घटी, 1 पल व 23 विपल होते हैं। #सूर्य व #चन्द्र दोनों वर्षों में 10 दिन, 53 घटी, 30 पल एवं 7 विपल का अंतर प्रत्येक #वर्ष में रहता है। इसी अंतर को #समायोजित करने हेतु 'अधिक #मास' की व्यवस्था होती है। '#अधिक मास' प्रत्येक #तीसरे #वर्ष होता है। 'अधिक #मास' #फाल्गुन से #कार्तिक मास के मध्य होता है। जिस वर्ष '#अधिक मास' होता है उस वर्ष में 12 के स्थान पर 13 महीने होते हैं। '#अधिक मास' के माह का निर्णय #सूर्य संक्रान्ति के आधार पर किया जाता है। जिस माह सूर्य #संक्रान्ति नहीं होती वह मास '#अधिक मास' कहलाता है।










