अनसर काल में भगवान श्रीजगन्नाथ को केवल फल, फूल और विशेष प्रकार का पना अर्पित किया जाता है। इस दौरान उन्हें सामान्य अन्न भोग नहीं लगाया जाता।
प्रतिदिन मध्याह्न धूप और संध्या धूप के बाद दो बार भगवान को सर, नबात (मिश्री), कपूर, जायफल और चंदन से तैयार किया गया 28 ओलि पना समर्पित किया जाता है। यह विशेष भोग भगवान के स्वास्थ्य लाभ और दिव्य सेवा का एक महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।
जय जय श्री जगन्नाथ! 🙏









