Pakistan की Imran Khan सरकार ने एक बार फिर इंतेहा पसंद संगठन तहरीक ऐ लबैक Pakistan के सामने घुटने टेक दिए हैं। Will Pakistan Take This Self
Pakistan की इमरान खान सरकार ने एक बार फिर इंतेहा पसंद संगठन तहरीक ऐ लबैक Pakistan के सामने घुटने टेक दिए हैं। तहरीक ऐ लबैक पाकिस्तान यानी TLP ने पाकिस्तान सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि वह 20 April तक या तो पाकिस्तान में France के राजदूत को निष्कासित करे या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। तमाम शोर शराबे और सख्ती करने का एलान करने के बाद वही हुआ जो पाकिस्तान की सरकारें करती रही हैं। सरकार France के सफीर को निष्कासित करने के विचार पर संसद में बहस करने को तैयार हो गई और सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीके इंसाफ के सदस्य अमजद अली खान ने इस संबंध में एक प्रस्ताव नेशनल असेंबली में पेश कर दिया। स्पीकर असद कैसर इस प्रस्ताव को चर्चा के लिए मंज़ूर कर लिया। T L P या अन्य कट्टरपंथी संगठन क्यों फ्रांस के प्रति इतनी कटुता रखे हुए हैं ? यह एक लंबी कहानी है।
शुरुआत पिछले साल के नवंबर के महीने से होती है। France में एक स्कूल शिक्षक की हत्या सिर्फ इस लिए कर दी जाती है कि वो क्लास में पत्रिका Charlie Hebdo में छपे हजरत मोहम्मद के कार्टून पर चर्चा कर रहा था। इस घटना के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने न केवल इस घटना की निंदा की बल्कि इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला भी कहा। Macron के इस बयान की तीखी प्रतिक्रिया हुई। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री Imran Khan और तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan सहित कई इस्लामिक देशों के प्रमुखों ने Macron के बयान की निंदा की। इसके साथ ही पाकिस्तान की आवाम भी सड़कों पर उतर आई। तहरीके लाबैक जैसे संगठन France के साथ कूटनीयक संबंध तोड़ लेने की मांग करने लगे। दबाव में आई इमरान सरकार ने फ्रांस से अपने राजदूत को वापिस बुलाने की घोषणा भी कर दी। पर आंदोलनकारी इस से शांत नहीं हुए और फ्रांस के साथ सभी संबंध तोड़ लेने की अपनी मांग पर अड़े रहे। आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। तहरीके लाबैक के साथ लिखित समझौते में सरकार ने फ्रांस के राजनयिकों को तीन महीने के अंदर निष्कासित करने का आश्वासन दिया।
बहरहाल न चाहते हुए भी सरकार को सड़कों पर उतरे कट्टरपंथियों की मांग को मानना पड़ा है। पर क्या वास्तव में सरकार इतना बड़ा फैसला ले पाएगी यह एक बड़ा सवाल है।
इमरान खान पहले ही चेतावनी दे चुके हैं की यह फैसला पाकिस्तान के लिए आत्मघाती साबित होगा। अपनी वित्तीय जरूरतों से लेकर रक्षा संबंधी जरूरतों तक पाकिस्तान फ्रांस पर निर्भर है। यही नहीं फ्रांस यूरोपियन यूनियन का अहम हिस्सा है और पाकिस्तान का आधा निर्यात यूरोपियन यूनियन के देशों को होता है। पहले से ही एफ ए टी एफ की तलवार पाकिस्तान पर लटक रही है। Covid19 की मार झेल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था क्या इस खुदकुश मार को झेल पाए गी यह सवाल हर कोई पूछ रहा है।








