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श्री आशारामायण पाठ व विधि
श्री आशारामायण पाठ व विधि
श्री आशारामायण विधि – जहाँ अनुष्ठान करने का है वो जगह ईशान कोन होना चाहिए ( पूरब और उत्तर के बीच का कोन ) उस कोने में तुलसी का कुंडा रखे, साथ में गोझरन, हल्दी, कुंकुम, गंगाजल, शुद्ध अत्तर नहीं तो शुद्ध गुलाबजल ये पाँच चीजे लेकर उससे पूरब या उत्तर दिशा के दीवार पर समांतर भुजाओं स्वस्तिक निकालना और उसके बाजूमें याने नीचे जमीन पर पूज्य गुरुदेव का तसवीर रखना (चौरंग या पाठ पर ) बाद में जमीन पर एक…
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श्री आशारामायण पाठ व विधि
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श्री आशारामायण विधि – जहाँ अनुष्ठान करने का है वो जगह ईशान कोन होना चाहिए ( पूरब और उत्तर के बीच का कोन ) उस कोने में तुलसी का कुंडा रखे, साथ में गोझरन, हल्दी, कुंकुम, गंगाजल, शुद्ध अत्तर नहीं तो शुद्ध गुलाबजल ये पाँच चीजे लेकर उससे पूरब या उत्तर दिशा के दीवार पर समांतर भुजाओं स्वस्तिक निकालना और उसके बाजूमें याने नीचे जमीन पर पूज्य गुरुदेव का तसवीर रखना (चौरंग या पाठ पर ) बाद में जमीन पर एक…
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श्री आशारामायण पाठ व विधि
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श्री आशारामायण विधि – जहाँ अनुष्ठान करने का है वो जगह ईशान कोन होना चाहिए ( पूरब और उत्तर के बीच का कोन ) उस कोने में तुलसी का कुंडा रखे, साथ में गोझरन, हल्दी, कुंकुम, गंगाजल, शुद्ध अत्तर नहीं तो शुद्ध गुलाबजल ये पाँच चीजे लेकर उससे पूरब या उत्तर दिशा के दीवार पर समांतर भुजाओं स्वस्तिक निकालना और उसके बाजूमें याने नीचे जमीन पर पूज्य गुरुदेव का तसवीर रखना (चौरंग या पाठ पर ) बाद में जमीन पर एक…
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श्री आशारामायण विधि – जहाँ अनुष्ठान करने का है वो जगह ईशान कोन होना चाहिए ( पूरब और उत्तर के बीच का कोन ) उस कोने में तुलसी का कुंडा रखे, साथ में गोझरन, हल्दी, कुंकुम, गंगाजल, शुद्ध अत्तर नहीं तो शुद्ध गुलाबजल ये पाँच चीजे लेकर उससे पूरब या उत्तर दिशा के दीवार पर समांतर भुजाओं स्वस्तिक निकालना और उसके बाजूमें याने नीचे जमीन पर पूज्य गुरुदेव का तसवीर रखना (चौरंग या पाठ पर ) बाद में जमीन पर एक…
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श्री आशारामायण विधि – जहाँ अनुष्ठान करने का है वो जगह ईशान कोन होना चाहिए ( पूरब और उत्तर के बीच का कोन ) उस कोने में तुलसी का कुंडा रखे, साथ में गोझरन, हल्दी, कुंकुम, गंगाजल, शुद्ध अत्तर नहीं तो शुद्ध गुलाबजल ये पाँच चीजे लेकर उससे पूरब या उत्तर दिशा के दीवार पर समांतर भुजाओं स्वस्तिक निकालना और उसके बाजूमें याने नीचे जमीन पर पूज्य गुरुदेव का तसवीर रखना (चौरंग या पाठ पर ) बाद में जमीन पर एक…
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श्री आशारामायण विधि – जहाँ अनुष्ठान करने का है वो जगह ईशान कोन होना चाहिए ( पूरब और उत्तर के बीच का कोन ) उस कोने में तुलसी का कुंडा रखे, साथ में गोझरन, हल्दी, कुंकुम, गंगाजल, शुद्ध अत्तर नहीं तो शुद्ध गुलाबजल ये पाँच चीजे लेकर उससे पूरब या उत्तर दिशा के दीवार पर समांतर भुजाओं स्वस्तिक निकालना और उसके बाजूमें याने नीचे जमीन पर पूज्य गुरुदेव का तसवीर रखना (चौरंग या पाठ पर ) बाद में जमीन पर एक…
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श्री आशारामायण विधि – जहाँ अनुष्ठान करने का है वो जगह ईशान कोन होना चाहिए ( पूरब और उत्तर के बीच का कोन ) उस कोने में तुलसी का कुंडा रखे, साथ में गोझरन, हल्दी, कुंकुम, गंगाजल, शुद्ध अत्तर नहीं तो शुद्ध गुलाबजल ये पाँच चीजे लेकर उससे पूरब या उत्तर दिशा के दीवार पर समांतर भुजाओं स्वस्तिक निकालना और उसके बाजूमें याने नीचे जमीन पर पूज्य गुरुदेव का तसवीर रखना (चौरंग या पाठ पर ) बाद में जमीन पर एक…
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