भीष्म पंचक
"भीष्म पितामह की कथा कर्म, धर्म और भक्ति का अद्भुत संदेश देती है। उनके उपदेश बताते हैं कि जीवन की कठिनाइयाँ हमारे कर्मफल का हिस्सा हैं। 'भीष्म-पंचक' व्रत इन मूल्यों को समर्पित है। आइए, इस प्रेरणा से जीवन में सकारात्मकता और भक्ति अपनाएँ। 🙏✨ #धर्म #कर्म"
यह कथा महाभारत के भीष्म पितामह के अंतिम समय की है, जो जीवन और मृत्यु के बीच उनके अद्भुत दृष्टिकोण को दर्शाती है। महाभारत के युद्ध के दौरान भीष्म पितामह जख्मी हो गए। वे अर्जुन को बुलाकर बाणों की शैय्या बनाने की बात करते हैं। वे जानते थे कि उनका शरीर दुःखी है, लेकिन उनकी चैतन्य आत्मा में कोई दुःख नहीं था। वे श्री कृष्ण का ध्यान करने लगे। इसी बीच श्री कृष्ण ध्यान मग्न थे और उन्हें यह महसूस हुआ कि…
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