May Lord Ram bless you with peace, luck, and success throughout the year. Here wishing you all a very Happy Ram Navami.
Web@ http://bit.ly/2XlNNIe
seen from China

seen from Chile
seen from China

seen from United States
seen from South Korea

seen from Malaysia

seen from United States

seen from Russia
seen from China
seen from United States

seen from Türkiye
seen from United States

seen from China
seen from China
seen from United States
seen from China

seen from Türkiye
seen from United States
seen from United States

seen from United States
May Lord Ram bless you with peace, luck, and success throughout the year. Here wishing you all a very Happy Ram Navami.
Web@ http://bit.ly/2XlNNIe
भगवान राम के जीवन से इन पांच चीजों को जरूर सीखे, आपको सफल बनाने में हमेशा होगी मददगार
चैतन्य भारत न्यूज अश्विन महीने के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि को विजयदशमी पर्व मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर बनाया जाता है। भगवान राम ने इसी दिन अपनी विजय यात्रा की शुरुआत की थी। भगवान राम ने अपने कुछ खास गुणों से रावण पर जीत पाई थी। उनमें सामाजिक समानता, सेना को प्रोत्साहित करना, शांति से लक्ष्य की ओर बढ़ना, त्याग और संयम के गुण थे। इसलिए भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है। जीवन को सफल बनाने के लिए भगवान राम के इन गुणों से प्रेरणा ली जा सकती है। वह जिस तरह से समय और स्थिति को देखकर आगे की रणनीति बनाते थे उनसे सीख ली जा सकती है। 1.खुद एक आदर्श बने भगवान राम को चूंकि दैवीय शक्ति प्राप्ति थी, तो वह चाहते तो कुछ भी एक इशारे में कर सकते थे। वह चाहते तो खुद को भगवान बताकर बुराइयां खत्म करने का अभियान चला सकते थे, लेकिन नहीं। उन्होंने हर काम एक आम व्यक्ति की भांति किया जिससे के लोग उनसे सीख सकें। भगवान राम ने खुद उस रास्ते पर चलकर दिखाया जिसे लोग आदर्श मानते थे। उन्होंने जिस तरह से हर काम किया लोग उसकी मिसाल देते हैं। 2.अपनी टीम को प्रोत्साहित करना तमिलनाडु के तट से लंका तक पुल बनाना उस वक्त इंसानों की बस की बात नहीं थी। हजारों, लाखों की संख्या में भी लोग पुल बनाते तो उसमें सालों लग जाते। लेकिन भगवान राम ने अपनी वानर सेना को इस तरह से प्रोत्साहित किया कि उन्होंने बहुत ही कम समय में पुल बना दिया। 3.सामाजिक समानता भगवान राम चूंकि राज परिवार से थे। वे चाहते तो केवट या शबरी को बिना गले लगाए भी अपना वनवास गुजार सकते थे। लेकिन उन्होंने सामाजिक समानता के लिए शबरी और के केवट को गले लगाया। ऐसा करने से उनके साथ लोगों में समानता का विश्वास पैदा हुआ। 4.शांति से लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास मिला था, जिसमें 12 साल उन्होंने चित्रकूट में ही बिता दिए। जब उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि वन के सभी लोग उन्हें पहचानने लगे हैं, इससे उनके उद्देश्य में व्यवधान पड़ सकता है, तब वह वन से अगले पड़ाव की ओर चल पड़े थे। राम को आत्म प्रचार पसंद नहीं था। वे चुपचाप रहकर काम करना पसंद करते थे और अपने बारे में किसी को अधिक बताना भी नहीं चाहते थे। विज्ञापन के इस युग में राम के चरित्र से एक सीख लेनी चाहिए कि बिना प्रचार के शांति से हम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें। Read the full article
दुनिया का पहला पायलट था रावण, श्रीलंका का दावा- साबित करेंगे 5 हजार साल पहले कैसे भरी थी उड़ान
चैतन्य भारत न्यूज कोलंबो. श्रीलंका सरकार ने यह दावा किया है कि रावण दुनिया का पहला पायलट था। उसने पांच हजार साल पहले भारत के लिए उड़ान भरी थी और वह सकुशल लौटकर भी आया है। श्रीलंका के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने प्राचीन काल में रावण द्वारा उड़ान भरने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों को समझने के लिए पहल शुरू की है।
श्रीलंका के काटुनायके में नागरिक उड्डयन विशेषज्ञों, इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों का एक सम्मेलन आयोजित हुआ था। श्रीलंका का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बंदरानाइक पर यह सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में निष्कर्ष निकाला कि, रावण ने श्रीलंका से भारत के लिए उड़ान भरी थी और वापस लौटकर भी आया है इसलिए वह दुनिया का पहला पायलट है। हालांकि, कई वक्ताओं ने इन कहानियों को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि यह सिर्फ एक भारतीय कहानी है। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शशि दानतुनगे ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, उनके पास यह साबित करने के लिए फैक्ट भी हैं कि रावण विमान का उपयोग करने वाला और उड़ान भरने वाला पहला व्यक्ति था। साथ ही दानतुनगे ने आगे यह भी कहा कि, 'यह न सिर्फ एक पौराणिक कथा है बल्कि यह तथ्य भी है। इस पर एक विस्तृत शोध किए जाने की आवश्यकता है और हम अगले पांच वर्षों में यह साबित करेंगे।'
इन दिनों श्रीलंका के लोगों में लंका के राजा के बारे में जानने के लिए रुचि देखने को मिल रही है। हाल ही में श्रीलंका ने 'रावण' नाम के उपग्रह को भी अपने पहले अंतरिक्ष मिशन भेजा है। शास्त्रों के अनुसार रावण एक महान ब्राह्मण होने के साथ-साथ बहुत ज्ञानी पुरुष भी था। रावण ने मोक्ष पाने की लालसा में भगवान श्रीराम से बैर कर उनकी पत्नी सीता का अपहरण कर लिया था। इस घटना का विस्तारित वर्णन रामायण में किया गया है। Read the full article