भूतों का बाज़ार(एक सच्ची घटना पर आधारित कहानी…)
हर गांव में कोई न कोई रहस्यमयी बात ज़रूर छुपी होती है।कभी कोई पुराना कुआँ, कभी किसी बरगद की छांव, तो कभी खेतों के किनारे वो पुराना पगडंडी रास्ता...हमारे गांव "निवाड़ा" में भी एक ऐसा ही रहस्य है — "भूतों का बाज़ार"।दादी अक्सर कहा करती थीं –"रात के तीसरे पहर, जब गांव गहरी नींद में होता है, तब कुछ परछाइयाँ खेतों की तरफ जाती हैं... और लौटती नहीं..."हमें ये सब कहानियाँ लगती थीं —लेकिन एक दिन दादाजी के साथ ऐसा कुछ हुआ, जो हमें हमेशा के लिए बदल गया।
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