तू मेरी खुश्क सी स्याही की प्यास हैं,
तू मेरे कोरे से वरक़ पर उतरा सराब है,
तू मुक़ाबिल बैठी हैं मेरे सामने,
और आज चाँद आस्मां पर सवर कर यूं आया है,
चेहरे से पर्दा हटाना ज़रा,
उसे भी तो दिखाऊ,
महज़ बहिश्त का अक्स नही तू,
मेरे साग़र में उतरा आतिश सा शराब है ।।
- अय्यारी
अल्फाज़ –
खुश्क – सूखा
वरक़ – पन्ना
सराब – मरीचिका
बहिश्त – स्वर्ग
साग़र – प्याला
आतिश – आग














