क्या संभव है भारत से चीनी सामान का बहिस्कार ?
कोरोना महामारी के चलते यूँ तो चीन के खिलाफ पूरी दुनिया का गुस्सा है लेकिन वर्तमान में भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा में हुई झड़प के बाद अब दोनों देशों के बीच युद्द जैसे हालात बन रहे है | इतना ही नहीं सीमा विवाद के चलते लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल (LAC) पर दोनों देशों के बीच हुई झड़प में दोनों देशों के कुछ सैनिक मारे भी गये हैं | जिसमे भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए जबकि चीन ने अभी तक सही जानकारी नहीं दी है |अब ऐसे हालात में भारत में यह बात जोर पकड़ती है कि क्या भारत के लोगों को चीनी वस्तुओं को नहीं खरीदना चाहिए या नहीं ,लेकिन क्या भारत के लिए ऐसा करना संभव है?
इस समय भारतियों के मन में चीन के खिलाफ सबसे ज्यादा विरोध चल रहा है | बता दें कि चीन के खिलाफ इस समय भारत में चीनी सामान की होली जलाई जा रही जबकि कुछ समय इनके सामान को लेकर रैली भी निकली जा रही है | इतना ही नहीं अब देश के सभी लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है जहाँ भी मौका लगता है वही सभी लोग चीन के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर देते है और चीनी राष्ट्रपति का पुतला फूंक रहे है |
देश में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की मुहिम चल रही है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का साथ देने वाले चीन से भारत को सारे साझे तोड़ लेने के लिए भारतीय परिदृश्य मचल पड़ा है। ऐसा वाकया सोशल साइट्स पर देखने को मिल रहा है। भारत चीनी वस्तुओं का बड़ा केन्द्र है, क्योंकि चीनी वस्तुएं सस्ती होती हैं।
देश में चीनी वस्तुओं का कारोबार इतना व्यापक है कि त्योहार से पहले वाले कुछ हफ्ते में ही केवल दिल्ली में 1000 करोड़ के उत्पाद बिक चुके होते हैं। भारत को डब्ल्यूटीओ का सदस्य होने के नाते चीनी वस्तुएं आयात करना आवश्यक हो जाता है। चीन और भारत का व्यापारिक साझेदारी 4.6 लाख करोड़ का है, और चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इस कारण भारत को चीन से व्यापारिक साझेदारी खत्म करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत में स्वदेशी वस्तुओं के निर्माण की प्रक्रिया कुंद-सी पड़ गई है। भारत निर्यात की तुलना में 7 गुना ज्यादा माल चीन से आयात करता है। भारत इलेक्ट्रानिक के 32.02, न्यूक्लियर रिएक्टर, बायलर्स और पार्ट्स के 17.01 प्रतिशत, आर्गनिक केमिकल्स 9.83 प्रतिशत फटिलाइजर्स 5.3 प्रतिशत आयात करता है। कृषि और आज के मानव का अहम हिस्सा मोबाइल जब हम चीन से आयात करने पर मजबूर हैं फिर चीन के साथ व्यापार बंद करना उचित नहीं लगता।
कौन-कौन से उत्पाद भारत चीन से आयात करता है….
गौरतलब है कि भारत चीन से सबसे ज्यादा बिजली का सामान आयत करता है | इतना ही नहीं भारत चीन से लगभग 93 % बिजली उपकरण आयात करता है जो चीन भारत को बहुत ही सस्ता और उम्दा दामों में प्रदान करता है | खिलौने,बिजली उत्पाद, कार और मोटरसाइकिल के कलपुर्जे, दूध उत्पाद,उर्वरक,कम्प्यूटर,एंटीबायोटिक्स दवाई, दूरसंचार और उर्जा क्षेत्र का सामान |
चीन के उत्पाद भारत में इतने पसंद क्यों किये जाते हैं
चीन में बने उत्पाद, कम उत्पादन लागत के कारण सस्ते होते है इसी कम कीमत के कारण यहाँ का सामान भारत सहित पूरी दुनिया के बाजार में छाया हुआ हैं| भारत में बने उत्पादों की लागत अधिक होने के कारण भारत, चीन के बाजारों में अपनी पकड़ नही बना पा रहा है |2015-16 के वित्त वर्ष में भारत का चीन को निर्यात $2,390 मिलियन था जो कि भारत के कुल निर्यात का केवल 3.59% था|दूसरी तरफ चीन की तरफ से भारत को निर्यात $14,704 मिलियन था,जो कि भारत के कुल आयात का 15% था |
चीन ने भारत के किस क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है ?
चीन के द्वारा सबसे ज्यादा नुकसान भारत के खिलौना उद्योग को हुआ है | चाइनीज खिलौनों की लागत इतनी कम है कि कोई भी भारतीय कम्पनी चीन की प्रतियोगिता का मुकाबला करने में असमर्थ है | पिछले साल भारतीय खिलौनों के केवल 20% बाजार पर भारतीय कंपनियों का अधिकार था बाकी के 80% बाजार पर चीन और इटली का कब्ज़ा था |एसोचैम के एक अध्ययन के अनुसार पिछले 5 साल में 40% भारतीय खिलौना बनाने वाली कम्पनियां बंद हो चुकी है और 20 % बंद होने की कगार पर हैं|
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चीन ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक उद्योग की भी कमर तोड़ दी है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिवाली के मौके पर घर- घर में इस्तेमाल होने वाली “बिजली की लड़ी” है | इसके अलावा बिजली का लगभग हर सामान भारत के बाजारों में भरा पड़ा है |
क्या भारत चीन के उत्पादों को भारत में आने से रोक सकता है?
भारत के सामने सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि,‘डब्ल्यूटीओ नियमों के कारण अब किसी देश से आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है चाहे उस देश के साथ हमारे राजनयिक,क्षेत्रीय या सैन्य समस्याएं क्यों न हो।
लोकसभा में सदस्यों के पूरक प्रश्नों के उत्तर में वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत ने चीन से दूध एवं दुग्ध उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि उनकी गुणवत्ता अस्वीकार्य थी।
उन्होंने कहा कि वैसे कुछ मोबाइल फोन जिन पर अंतराष्ट्रीय मोबाइल स्टेशन उपकरण पहचान संख्या (IMEI No.) या अन्य सुरक्षा सुविधाएं नहीं थी, उन्हें भी प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ चीन से कुछ इस्पात उत्पादों के आयात पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
यहाँ पर यह बात भी ध्यान दिलाने योग्य है कि,भारत अपने कुल निर्यात का 8% चीन को भेजता है जबकि चीन अपने कुल निर्यात का केवल 2% भारत को भेजता है | इस प्रकार यदि भारत चीन के उत्पादों को बंद करता है तो चीन भी ऐसा ही करेगा जिससे ज्यादा नुकसान चीन का ना होकर भारत का और उसके निवासियों का होगा |चीन के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को बंद करना भी भारत के हित में नही होगा क्योंकि भारत में इलेक्ट्रॉनिक की ज्यादातर चीजें चीन से ही आती है जो कि सस्ती होती है| यदि भारत ने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर रोक लगा भी दी तो भी इतनी जल्दी इन चीजों का उत्पादन भारत में शुरू नही हो सकता क्योंकि इसमें अधिक समय और अधिक निवेश की जरुरत होती है |
भारत, चीन के उत्पादों को रोकने के लिए क्या कर सकता है ?
डब्ल्यूटीओ नियमों के कारण भारत चीन के सामान पर प्रत्यक्ष नियंत्रण तो नही लगा सकता लेकिन भारत सरकार चीनी सामान पर “एंटी डंपिंग ड्यूटी” जरूर लगा सकती है | यह एक प्रकार का शुल्क है जिससे चीनी वस्तुओं की कीमतें बढ़ जायेगीं और भारतीय उत्पादक उनका मुकाबला कर सकेंगे | यदि चीन के उत्पादक इस ड्यूटी की वजह से भारत में सामान नही भेजते हैं तो भारतीय उत्पादक उन्हें भारत में बनाना शुरू करेंगे जिससे हमारे देश में रोजगारों का सृजन होगा और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी |
भारतीय बाजार में जितनी बड़ी मात्रा में चाइनीज सामान मिलता है उससे तो सिर्फ यह लगता है कि चीन के उद्योगपतियों ने भारत में मनाये जाने वाले हर त्यौहार, उत्सव, समाज, आयु वर्ग, विभिन्न प्रदेशों में इस्तेमाल होने वालों समानों की लिस्ट बनायी होगी फिर उत्पादन शुरू किया होगा तभी तो हमारे शादी समारोह से लेकर जन्मदिन, होली, दिवाली, रक्षाबंधन सभी अवसरों के लिए ‘मेड इन चाइना’ सामान सस्ते दामों पर हर दुकान और नुक्कड़ पर मिलता है|
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