PM Modi is known for his big decisions. He has surprised the country with many big decisions like demonetization, lockdown, GST, UPI, Sectio
CAA से पहले मोदी सरकार के 8 बड़े सरप्राइज! नोटबंदी से लेकर लॉकडाउन भी है शामिल


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PM Modi is known for his big decisions. He has surprised the country with many big decisions like demonetization, lockdown, GST, UPI, Sectio
CAA से पहले मोदी सरकार के 8 बड़े सरप्राइज! नोटबंदी से लेकर लॉकडाउन भी है शामिल
CAA: समर्थन में प्रदर्शन कर रहे बीजेपी नेता को महिला कलेक्टर ने जड़ा थप्पड़, शिवराज सिंह चौहान ने की केस दर्ज कराने की मांग
चैतन्य भारत न्यूज राजगढ़. मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा रविवार को रैली निकाली गई। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच टकराव देखने को मिला। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); क्या है मामला दरअसल कलेक्टर निधि निवेदिता ने इस रैली की अनुमति नहीं दी थी और धारा 144 लगा दी थी। कलेक्टर द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद भाजपा नेताओं ने नागरिकता कानून के समर्थन में रैली का आयोजन किया। निधि निवेदिता ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने से रोका लेकिन फिर भी वे नहीं माने। इसे लेकर कलेक्टर और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हो गई। नाराज कलेक्टर खुद मैदान में उतरीं और प्रदर्शनकारियों को रोकने लगी। इसी दौरान उन्होंने एक प्रदर्शनकारी को चांटा भी मार दिया। This is not at all acceptable, who gave the right to this colonial mindset women Nidhi Nivedita, who is collector of Rajgarh district to slap a person who was arguing peacefully with her with folded hands. This is not at all acceptable behaviour by her. pic.twitter.com/MXmpAYPYtn — Rajeev Singh Rathore (@imraajeev) January 19, 2020 दो वीडियो हो रहे वायरल निधि निवेदिता के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में वे कुछ लोगों को थप्पड़ मारते नजर आ रही हैं। जबकि दूसरे वीडियो में तिरंगे लिए कुछ लोग उनके साथ धक्का मुक्की कर रहे हैं। बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस समेत विपक्ष के लोग उन्हें बहादुर अफसर बता रहे हैं। #Terminate_priya_verma #terminate_nidhi_nivedita Holding tricolour is crime? She was pulling his neck so that he could choke down. Shameful act https://t.co/BqVlfMweP3 — shashank singh (@shashan41987508) January 20, 2020 पूर्व सीएम ने सरकार को दी चेतावनी राजगढ़ प्रशासन के कहने पर 650 नेताओं पर बिना इजाजत के प्रदर्शन करने पर मुकदमा भी दर्ज हो गया है। अब बीजेपी चाहती है कि पार्टी कार्यकर्ताओं से मारपीट के आरोप में निधि पर भी केस हो। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो कमलनाथ की सरकार को चेतावनी दी है। शिवराज ने कमलनाथ की सरकार के समक्ष कई सवाल रखे हैं, वह जानना चाहते हैं क्या सीएम ने कलेक्टर को यह आदेश दिया था? साथ ही उन्होंने कलेक्टर निधि निवेदिता से पूछा है कि, उन्होंने कहां से लॉ की पढाई की है जो वह बेकसूर प्रोटेस्टर को तमाचा मार रही हैं? शिवराज सिंह ने ट्वीट किया कि, 'मैं किसी भी कीमत पर इस तरह की घटना बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं 22 जनवरी को राजगढ़ आकर वहाँ के निरपराध लोगों के साथ प्रशासन द्वारा की गई बर्बरता के खिलाफ प्रदर्शन करूंगा।' उन्होंने एक और ट्वीट किया जिसमें लिखा कि, 'राजगढ़ का यह कृत्य कांग्रेस सरकार के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। इसके खिलाफ हम एक विशाल जनांदोलन खड़ा करेंगे। हम कलेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायेंगे और अगर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो कोर्ट भी जायेंगे! #IndiaSupportsCAA' राजगढ़ की घटना से मैं स्तब्ध हूँ! हाथों में तिरंगा झंडा लिये, 'भारत माता की जय' और 'वंदेमातरम' के नारे लगा रहे लोगों के साथ ऐसी बर्बरता की जायेगी, इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। यह मध्यप्रदेश में क्या हो रहा है? #IndiaSupportsCAA pic.twitter.com/xvriA5xDWs — Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) January 20, 2020 शिवराज ने एक वीडियो भी शेयर किया और लिखा कि, 'राजगढ़ की घटना से मैं स्तब्ध हूं! हाथों में तिरंगा झंडा लिए, 'भारत माता की जय' और 'वंदेमातरम' के नारे लगा रहे लोगों के साथ ऐसी बर्बरता की जायेगी, इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। यह मध्यप्रदेश में क्या हो रहा है? #IndiaSupportsCAA' पहले भी विवादों में रही हैं निधि निवेदिता 2012 बैच की आईएएस निधि निवेदिता की पढ़ाई-लिखाई झारखंड में हुई है। निधि निवेदिता की गिनती सख्त और ईमानदार अफसरों में होती है। राजगढ़ की कलेक्टर बनने से पहले भी वह कई बार विवादों में रही हैं। इसके पहले वह उस समय चर्चा में आईं थीं जब वे सिंगरौली में जिला पंचायत की सीईओ थीं। निधि निवेदिता ने एक पंचायत सचिव से उठक बैठक करवा दी थी। दरअसल वह शौचालय योजना का निरीक्षण करने निकली थीं। इस दौरान उन्हें एक जगह पर टॉयलेट बना हुआ नहीं मिला। जबकि वहां के पंचायत सचिव ने शौचालय की फर्जी तस्वीर रिकॉर्ड में लगा दी थी। यह सब देख निधि निवेदिता नाराज हो गईं और उन्होंने मौके पर ही पंचायत सचिव सुरेश सिंह को सजा दे दी। ये भी पढ़े... मप्र: डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा के साथ हुई बदसलूकी, बीजेपी कार्यकर्ताओं को मारा था चांटा, 650 के खिलाफ केस दर्ज कार्यक्रम में पहुंची बीजेपी की महिला नेता के साथ छात्रों ने की बदसलूकी, कहे अपशब्द सेल्फी लेने के चक्कर में फैन ने नवाज के साथ की बदसलूकी, तोड़ दिया हाथ! VIDEO : डेंगू पीड़ितों से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे पर फेंकी स्याही, आरोपित फरार Read the full article
CAA: समर्थन में प्रदर्शन कर रहे बीजेपी नेता को महिला कलेक्टर ने जड़ा थप्पड़, शिवराज सिंह चौहान ने की केस दर्ज कराने की मांग
चैतन्य भारत न्यूज राजगढ़. मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा रविवार को रैली निकाली गई। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच टकराव देखने को मिला। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); क्या है मामला दरअसल कलेक्टर निधि निवेदिता ने इस रैली की अनुमति नहीं दी थी और धारा 144 लगा दी थी। कलेक्टर द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद भाजपा नेताओं ने नागरिकता कानून के समर्थन में रैली का आयोजन किया। निधि निवेदिता ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने से रोका लेकिन फिर भी वे नहीं माने। इसे लेकर कलेक्टर और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हो गई। नाराज कलेक्टर खुद मैदान में उतरीं और प्रदर्शनकारियों को रोकने लगी। इसी दौरान उन्होंने एक प्रदर्शनकारी को चांटा भी मार दिया। This is not at all acceptable, who gave the right to this colonial mindset women Nidhi Nivedita, who is collector of Rajgarh district to slap a person who was arguing peacefully with her with folded hands. This is not at all acceptable behaviour by her. pic.twitter.com/MXmpAYPYtn — Rajeev Singh Rathore (@imraajeev) January 19, 2020 दो वीडियो हो रहे वायरल निधि निवेदिता के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में वे कुछ लोगों को थप्पड़ मारते नजर आ रही हैं। जबकि दूसरे वीडियो में तिरंगे लिए कुछ लोग उनके साथ धक्का मुक्की कर रहे हैं। बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस समेत विपक्ष के लोग उन्हें बहादुर अफसर बता रहे हैं। #Terminate_priya_verma #terminate_nidhi_nivedita Holding tricolour is crime? She was pulling his neck so that he could choke down. Shameful act https://t.co/BqVlfMweP3 — shashank singh (@shashan41987508) January 20, 2020 पूर्व सीएम ने सरकार को दी चेतावनी राजगढ़ प्रशासन के कहने पर 650 नेताओं पर बिना इजाजत के प्रदर्शन करने पर मुकदमा भी दर्ज हो गया है। अब बीजेपी चाहती है कि पार्टी कार्यकर्ताओं से मारपीट के आरोप में निधि पर भी केस हो। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो कमलनाथ की सरकार को चेतावनी दी है। शिवराज ने कमलनाथ की सरकार के समक्ष कई सवाल रखे हैं, वह जानना चाहते हैं क्या सीएम ने कलेक्टर को यह आदेश दिया था? साथ ही उन्होंने कलेक्टर निधि निवेदिता से पूछा है कि, उन्होंने कहां से लॉ की पढाई की है जो वह बेकसूर प्रोटेस्टर को तमाचा मार रही हैं? शिवराज सिंह ने ट्वीट किया कि, 'मैं किसी भी कीमत पर इस तरह की घटना बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं 22 जनवरी को राजगढ़ आकर वहाँ के निरपराध लोगों के साथ प्रशासन द्वारा की गई बर्बरता के खिलाफ प्रदर्शन करूंगा।' उन्होंने एक और ट्वीट किया जिसमें लिखा कि, 'राजगढ़ का यह कृत्य कांग्रेस सरकार के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। इसके खिलाफ हम एक विशाल जनांदोलन खड़ा करेंगे। हम कलेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायेंगे और अगर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो कोर्ट भी जायेंगे! #IndiaSupportsCAA' राजगढ़ की घटना से मैं स्तब्ध हूँ! हाथों में तिरंगा झंडा लिये, 'भारत माता की जय' और 'वंदेमातरम' के नारे लगा रहे लोगों के साथ ऐसी बर्बरता की जायेगी, इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। यह मध्यप्रदेश में क्या हो रहा है? #IndiaSupportsCAA pic.twitter.com/xvriA5xDWs — Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) January 20, 2020 शिवराज ने एक वीडियो भी शेयर किया और लिखा कि, 'राजगढ़ की घटना से मैं स्तब्ध हूं! हाथों में तिरंगा झंडा लिए, 'भारत माता की जय' और 'वंदेमातरम' के नारे लगा रहे लोगों के साथ ऐसी बर्बरता की जायेगी, इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। यह मध्यप्रदेश में क्या हो रहा है? #IndiaSupportsCAA' पहले भी विवादों में रही हैं निधि निवेदिता 2012 बैच की आईएएस निधि निवेदिता की पढ़ाई-लिखाई झारखंड में हुई है। निधि निवेदिता की गिनती सख्त और ईमानदार अफसरों में होती है। राजगढ़ की कलेक्टर बनने से पहले भी वह कई बार विवादों में रही हैं। इसके पहले वह उस समय चर्चा में आईं थीं जब वे सिंगरौली में जिला पंचायत की सीईओ थीं। निधि निवेदिता ने एक पंचायत सचिव से उठक बैठक करवा दी थी। दरअसल वह शौचालय योजना का निरीक्षण करने निकली थीं। इस दौरान उन्हें एक जगह पर टॉयलेट बना हुआ नहीं मिला। जबकि वहां के पंचायत सचिव ने शौचालय की फर्जी तस्वीर रिकॉर्ड में लगा दी थी। यह सब देख निधि निवेदिता नाराज हो गईं और उन्होंने मौके पर ही पंचायत सचिव सुरेश सिंह को सजा दे दी। ये भी पढ़े... मप्र: डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा के साथ हुई बदसलूकी, बीजेपी कार्यकर्ताओं को मारा था चांटा, 650 के खिलाफ केस दर्ज कार्यक्रम में पहुंची बीजेपी की महिला नेता के साथ छात्रों ने की बदसलूकी, कहे अपशब्द सेल्फी लेने के चक्कर में फैन ने नवाज के साथ की बदसलूकी, तोड़ दिया हाथ! VIDEO : डेंगू पीड़ितों से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे पर फेंकी स्याही, आरोपित फरार Read the full article
मप्र: डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा के साथ हुई बदसलूकी, बीजेपी कार्यकर्ताओं को मारा था चांटा, 650 के खिलाफ केस दर्ज
चैतन्य भारत न्यूज भोपाल. मध्यप्रदेश के राजगढ़ की डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा सुर्खियों में बनी हुई हैं। दरअसल रविवार को राजगढ़ जिले के ब्यावरा में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में बीजेपी द्वारा तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा ने एक कार्यकर्ता को थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद विवाद बढ़ गया और भीड़ में से ही किसी प्रदर्शनकारी ने प्रिया के बाल खींच दिए। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); जानकारी के मुताबिक, राजगढ़ में धारा 144 लागू है बावजूद इसके बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने यहां तिरंगा यात्रा निकाली। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। प्रशासन प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर रहा था और वह बीच रास्ते में प्रदर्शन कर रहे लोगों को भी वहां से हटा रहा था। इसी दौरान डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा एक प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने लगीं। जिसके बाद किसी प्रदर्शनकारी ने प्रिया वर्मा के बाल खींच दिए। सोशल मीडिया पर इस मामले का वीडियो भी वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला अधिकारी एक प्रदर्शनकारी को पकड़ती हैं और फिर थप्पड़ मारती हैं। #WATCH Madhya Pradesh: A protestor pulls hair of Rajgarh Deputy Collector Priya Verma, after she hits BJP workers and drags them. The clash broke out during a demonstration in support of #CAA. pic.twitter.com/7ckpZaFBkJ — ANI (@ANI) January 19, 2020 डिप्टी कलेक्टर से अभद्रता के मामले में दो आरोपियों पर धारा 353 व 354 के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसमें एक नामजद और एक अज्ञात है। इसके अलावा धारा 144 के उल्लंघन करने पर भी करीब 650 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें 150 लोगों की पहचान हो चुकी है और बाकी 500 लोगों की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। Former MP Chief Minister, Shivraj Singh Chouhan: It is a black day for democracy, Collector slapped people who were chanting 'Bharat Mata ki jai' & holding tricolor in their hands, this is too much. We will not tolerate this at any cost, did Kamal Nath order Collector to do this? https://t.co/jqGhpBcGDJ pic.twitter.com/xskbMP4hX9 — ANI (@ANI) January 19, 2020 घटना के बाद मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा कि, 'आज का दिन लोकतंत्र के सबसे काले दिनों में गिना जाएगा। आज राजगढ़ में डिप्टी कलेक्टर साहिबा ने जिस बेशर्मी से CAA के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को लताड़ा, घसीटा और चांटे मारे, उसकी निंदा मैं शब्दों में नहीं कर सकता। क्या उन्हें प्रदर्शनकारियों को पीटने का आदेश मिला था?' इस मामले में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि, 'राजगढ़ में बीजेपी की गुंडागर्दी सामने आ गई। महिला जिला कलेक्टर और महिला एसडीएम अधिकारियों को पीटा गया। बाल खींचे गए। महिला अधिकारियों की बहादुरी पर हमें गर्व है।' बता दें मध्यप्रदेश सरकार शुरुआत से ही नागरिकता कानून का विरोध कर रही है। इसके खिलाफ विरोध में मुख्यमंत्री कमलनाथ और सरकार के सभी मंत्री व कांग्रेस कार्यकर्ता पैदल मार्च भी निकाल चुके हैं।
कौन हैं प्रिया वर्मा? प्रिया वर्मा इंदौर के पास मांगलिया गांव की रहने वाली हैं।
उन्होंने साल 2014 में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की थी। तब उनकी पोस्टिंग भैरवगढ़ जेल उज्जैन में बतौर जेलर हुई थी।
साल 2015 में वह प्रमोट होकर डिप्टी सुप्रिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) बन गईं। उस वक्त प्रिया की उम्र महज 21 साल थी।
प्रिया यहीं नहीं रुकीं उन्होंने आगे और जमकर मेहनत की।
साल 2017 में एक बार फिर उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा देकर प्रदेश में चौथा स्थान हासिल किया और डिप्टी कलेक्टर बनीं।
ये भी पढ़े... कार्यक्रम में पहुंची बीजेपी की महिला नेता के साथ छात्रों ने की बदसलूकी, कहे अपशब्द सेल्फी लेने के चक्कर में फैन ने नवाज के साथ की बदसलूकी, तोड़ दिया हाथ! VIDEO : डेंगू पीड़ितों से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे पर फेंकी स्याही, आरोपित फरार Read the full article
CAA को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाला पहला राज्य बना केरल, कहा- यह कानून संविधान की मूल भावना के खिलाफ
चैतन्य भारत न्यूज तिरुवनंतपुरम. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इसी बीच केरल सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। केरल पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती दी है। बता दें सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस कानून के खिलाफ करीब 60 याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); संविधान की मूल भावना के खिलाफ यह कानून केरल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस कानून को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है। केरल सरकार ने नागरिकता कानून के खिलाफ संविधान के आर्टिकल 131 के तहत सूट दाखिल किया है। बता दें संविधान का आर्टिकल 131 भारत सरकार और किसी भी राज्य के बीच किसी भी विवाद में सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकार क्षेत्र देता है। इससे पहले केरल में नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं करने का प्रस्ताव विधानसभा में पास कर रिकॉर्ड बनाया जा चुका है। बता दें केरल में वामपंथी गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की सरकार है जिसकी अगुवाई पिनरायी विजयन कर रहे हैं। केरल के राज्यपाल ने की आलोचना केरल सरकार ने नागरिकता कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास करवाने के बाद अखबारों में विज्ञापन देकर अपनी पीठ थपथपाई। जिसके बाद केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि, 'भारत की संसद द्वारा निर्मित कानून के खिलाफ इस तरह विज्ञापन प्रकाशित करने पर राज्य का संसाधन खर्च करना सही नहीं है। इस प्रस्ताव की कोई कानूनी या संवैधानिक वैधता नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि, 'नागरिकता विशेष रूप से केंद्र का विषय है, इसका वास्तव में कोई महत्व नहीं है।' CAA और NPR लागू नहीं करने की घोषणा केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि, उनकी सरकार संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपने राज्य में लागू नहीं करेगी। इस कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए सीएम पिनराई ने कहा था कि, 'केरल में धर्मनिरपेक्षता, यूनानियों, रोमन, अरबों का एक लंबा इतिहास है, हर कोई हमारी भूमि पर पहुंच गया। ईसाई और मुस्लिम शुरुआत में केरल पहुंचे। हमारी परंपरा समावेशी है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि केरल में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनेगा।' बता दें केरल विधानसभा में कांग्रेस, सीपीआई (एम) ने पिनराई द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। 10 जनवरी को भारत में लागू हुआ CAA नागरिकता कानून को लेकर पूरे देश में जबरदस्त प्रदर्शन हो रहा है बावजूद इसके शुक्रवार यानी 10 जनवरी से इसे देशभर में लागू कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी कर कहा कि, 'कानून 10 जनवरी से प्रभावी होगा, जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी।' साथ ही अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि, 'नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का 47) की धारा 1 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 10 जनवरी 2020 को उक्त अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होने की तारीख के रूप में तय करती है।' ये भी पढ़े... CAA और NRC पर घमासान के बीच NPR लाने की तैयारी में मोदी सरकार! जानें क्या है NPR और इसका उद्देश्य नागरिकता कानून के समर्थन में पीएम मोदी ने शुरू किया #IndiaSupportsCAA अभियान, ट्वीट कर छेड़ी मुहिम नागरिकता कानून पर बवाल, विरोध में सत्याग्रह पर बैठी कांग्रेस, सोनिया-राहुल-मनमोहन ने पढ़ा संविधान का प्रस्तावना उप्र में नागरिकता कानून पर बवाल, 9 लोगों की मौत, 21 जिलों में इंटरनेट बैन, 31 जनवरी तक धारा 144 लागू Read the full article
CAA को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाला पहला राज्य बना केरल, कहा- यह कानून संविधान की मूल भावना के खिलाफ
चैतन्य भारत न्यूज तिरुवनंतपुरम. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इसी बीच केरल सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। केरल पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती दी है। बता दें सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस कानून के खिलाफ करीब 60 याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); संविधान की मूल भावना के खिलाफ यह कानून केरल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस कानून को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है। केरल सरकार ने नागरिकता कानून के खिलाफ संविधान के आर्टिकल 131 के तहत सूट दाखिल किया है। बता दें संविधान का आर्टिकल 131 भारत सरकार और किसी भी राज्य के बीच किसी भी विवाद में सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकार क्षेत्र देता है। इससे पहले केरल में नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं करने का प्रस्ताव विधानसभा में पास कर रिकॉर्ड बनाया जा चुका है। बता दें केरल में वामपंथी गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की सरकार है जिसकी अगुवाई पिनरायी विजयन कर रहे हैं। केरल के राज्यपाल ने की आलोचना केरल सरकार ने नागरिकता कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास करवाने के बाद अखबारों में विज्ञापन देकर अपनी पीठ थपथपाई। जिसके बाद केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि, 'भारत की संसद द्वारा निर्मित कानून के खिलाफ इस तरह विज्ञापन प्रकाशित करने पर राज्य का संसाधन खर्च करना सही नहीं है। इस प्रस्ताव की कोई कानूनी या संवैधानिक वैधता नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि, 'नागरिकता विशेष रूप से केंद्र का विषय है, इसका वास्तव में कोई महत्व नहीं है।' CAA और NPR लागू नहीं करने की घोषणा केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि, उनकी सरकार संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपने राज्य में लागू नहीं करेगी। इस कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए सीएम पिनराई ने कहा था कि, 'केरल में धर्मनिरपेक्षता, यूनानियों, रोमन, अरबों का एक लंबा इतिहास है, हर कोई हमारी भूमि पर पहुंच गया। ईसाई और मुस्लिम शुरुआत में केरल पहुंचे। हमारी परंपरा समावेशी है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि केरल में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनेगा।' बता दें केरल विधानसभा में कांग्रेस, सीपीआई (एम) ने पिनराई द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। 10 जनवरी को भारत में लागू हुआ CAA नागरिकता कानून को लेकर पूरे देश में जबरदस्त प्रदर्शन हो रहा है बावजूद इसके शुक्रवार यानी 10 जनवरी से इसे देशभर में लागू कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी कर कहा कि, 'कानून 10 जनवरी से प्रभावी होगा, जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी।' साथ ही अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि, 'नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का 47) की धारा 1 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 10 जनवरी 2020 को उक्त अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होने की तारीख के रूप में तय करती है।' ये भी पढ़े... CAA और NRC पर घमासान के बीच NPR लाने की तैयारी में मोदी सरकार! जानें क्या है NPR और इसका उद्देश्य नागरिकता कानून के समर्थन में पीएम मोदी ने शुरू किया #IndiaSupportsCAA अभियान, ट्वीट कर छेड़ी मुहिम नागरिकता कानून पर बवाल, विरोध में सत्याग्रह पर बैठी कांग्रेस, सोनिया-राहुल-मनमोहन ने पढ़ा संविधान का प्रस्तावना उप्र में नागरिकता कानून पर बवाल, 9 लोगों की मौत, 21 जिलों में इंटरनेट बैन, 31 जनवरी तक धारा 144 लागू Read the full article
पीएम मोदी का ऐलान- अब 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी' के नाम से जाना जाएगा कोलकाता पोर्ट
चैतन्य भारत न्यूज कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर कोलकाता में हैं। आज उनके दौरे का दूसरा दिन है। आज पीएम मोदी हावड़ा में राम कृष्ण के मुख्यालय के बेलूर मठ में कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के स्थापना के 150वें वर्ष में प्रवेश करने के लिए सभी को बधाई दी। साथ ही पोर्ट ट्रस्ट से रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन के लिए 500 करोड़ रुपए का चेक सौंपा। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); यहां पीएम मोदी ने कहा कि, 'आज का ये दिन कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के लिए, इससे जुड़े लोगों के लिए, यहां काम कर चुके साथियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर है। भारत में पोर्ट डेवलपमेंट को नई ऊर्जा देने का इससे बड़ा कोई अवसर नहीं हो सकता। मां गंगा के सानिध्य में, गंगासागर के निकट, देश की जलशक्ति के इस ऐतिहासिक प्रतीक पर, इस समारोह का हिस्सा बनना सौभाग्य की बात है।' उन्होंने कहा कि, कोलकाता का ये पोर्ट भारत की औद्योगिक, आध्यात्मिक और आत्मनिर्भरता की आकांक्षा का प्रतीक है। ऐसे में जब ये पोर्ट डेढ़ सौवें साल में प्रवेश कर रहा है, तब इसको न्यू इंडिया के निर्माण का भी एक प्रतीक बनाना आवश्यक है। पीएम ने कहा कि, 'देश की इसी भावना को नमन करते हुए मैं कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम, भारत के औद्योगीकरण के प्रणेता, बंगाल के विकास का सपना लेकर जीने वाले और एक देश, एक विधान के लिए बलिदान देने वाले डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने की घोषणा करता हूं।' ये भी पढ़े... बेलूर मठ से पीएम मोदी का ममता को जवाब- युवा समझ गए CAA, लेकिन कुछ नेता समझना नहीं चाहते नए साल में पीएम मोदी ने 6 करोड़ किसानों को दिया तोहफा, खाते में ट्रांसफर की 12000 करोड़ की राशि पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ झारखंड में केस दर्ज, जानें पूरा मामला Read the full article
बेलूर मठ से पीएम मोदी का ममता को जवाब- युवा समझ गए CAA, लेकिन कुछ नेता समझना नहीं चाहते
चैतन्य भारत न्यूज कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय कोलकाता दौरे पर हैं। रविवार सुबह पीएम मोदी ने रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ (Belur Math) में ध्यान किया। उन्होंने मठ में ही शनिवार की पूरी रात बिताई। उनके मठ में ठहरने की खास वजह 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती बताई जा रही है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); 'मैं बंगाल सरकार का आभारी हूं' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, 'मैं पश्चिम बंगाल सरकार का आभारी हूं, जिन्होंने प्रोटोकॉल तोड़कर बेलूर मठ में रात बिताने का मौका दिया।' उन्होंने आगे कहा कि, 'मेरा अतीत बेलूर मठ से जुड़ा है। बेलूर मठ में मुझे सिखाया गया था जनसेवा ही प्रभु सेवा है। बेलूर मठ की धरती पर आना मेरे लिए तीर्थयात्रा करने जैसा है। पिछली बार जब यहां आया था तो गुरुजी, स्वामी आत्मआस्थानंद जी के आशीर्वचन लेकर गया था। आज वो शारीरिक रूप से हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं। लेकिन उनका काम, उनका दिखाया मार्ग, रामकृष्ण मिशन के रूप में सदा हमारा मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।' Our Govt has only delivered on the wishes of our great freedom fighters who got us Independence. We've only done what Mahatma Gandhi had said decades ago. In this Citizenship Amendment Act, we're only giving citizenship. We aren't taking away anyone's citizenship: PM Modi pic.twitter.com/FOfeQP8xDR — BJP (@BJP4India) January 12, 2020 नागरिकता कानून को लेकर भ्रम फैलाया गया बता दें स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। युवाओं को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि, 'इस देश के युवाओं से भारत को ही नहीं दुनिया को भी बड़ी अपेक्षाएं हैं।' साथ ही उन्होंने नागरिकता कानून का जिक्र करते हुए कहा कि, 'भारत सरकार ने रातों रात कोई कानून नहीं बनाया है। देश में इसको लेकर काफी चर्चा हुई, लेकिन इसको लेकर युवाओं में भ्रम फैलाया गया। इस कानून के मुताबिक किसी भी देश का कोई भी व्यक्ति जो भारत से आस्था रखता है वह भारत की नागरिक हो सकता है।' नागरिकता कानून का सरल किया पीएम मोदी ने कहा कि, नागरिकता कानून किसी भी नागरिकता छीनता नहीं बल्कि नागरिकता देता है। उन्होंने आगे कहा कि, 'नागरिकता कानून को लेकर कुछ युवा गलतफहमी का शिकार हैं। हमने नागरिकता कानून का सरल किया।' पीएम मोदी ने बताया कि, 'ये कानून रातों-रात नहीं बनाया गया बल्कि महात्मा गांधी भी ऐसा चाहते थे। इतनी स्पष्टता के बावजूद कुछ लोग इस कानून को लेकर भ्रम फैला रहे हैं।' ममता बनर्जी पर कसा तंज इस दौरान पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर इशारा करते हुए कहा कि, 'जो बात यहां बैठे बच्चों को समझ में आ गई वह बात राजनीतिक खेल खेलने वालों को समझ में नहीं आती है। दरअसल, वे इसे समझना ही नहीं चाहते हैं।' पूर्वोत्तर की संस्कृति पर गर्व प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्वोत्तर के राज्यों का भी जिक्र किया और कहा कि, उन्हें पूर्वोत्तर की संस्कृति पर गर्व हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि, 'CAA की वजह से पूर्वोत्तर के किसी संवैधानिक व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लोगों से किया यह सवाल पाकिस्तान के बारे में बात करते हुए पीएम ने कहा कि, 'पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर जो अत्याचार होता है उसका पर्दाफाश सीएए की वजह से हो सका है, और युवाओं ने पाकिस्तान के इस सच को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई है। दुनिया भर में पाकिस्तान के जुल्म के खिलाफ भारत का युवा आवाज उठा रहा है। पाकिस्तान को जवाब देना पड़ेगा कि 70 साल में वहां अल्पसंख्यकों के साथ जुल्म क्यों हुआ।' साथ ही मोदी ने बेलूर मठ में मौजूद लोगों से सवाल किया कि, 'क्या भारत आए शरणार्थियों को मरने के लिए छोड़ देना चाहिए, क्या उन्हें लेकर हमारी जिम्मेदारी नहीं है? नागरिकता कानून को लेकर विरोध क्यों? गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर शुरू से देश के कुछ हिस्सों में विरोध किया जा रहा है। नागरिकता संशोधन विधेयक को 10 दिसंबर को लोकसभा ने पारित किया गया था। राज्य सभा में यह विधेयक 11 दिसंबर को पारित हुआ। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद 12 दिसंबर को यह विधेयक कानून बन गया। सबसे पहले इस कानून का विरोध पूर्वोत्तर राज्यों में शुरू हुआ। असम में लोग इस कानून से लोग सबसे ज्यादा गुस्से में हैं। साथ ही राजधानी दिल्ली में भी इस कानून के खिलाफ आग भड़की है। यह विरोध उत्तर प्रदेश होते हुए पश्चिम बंगाल तक पहुंच गया है। बता दें नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की एक वजह यह भी है कि इसे मुस्लिमों के खिलाफ माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस कानून के चलते उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी। कांग्रेस सहित कुछ प्रमुख विपक्षी दल इस कानून के खिलाफ हैं। लेकिन हम आपको बता दें इस कानून में देश के मुस्लिम नागरिकों के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। इस कानून से उनका कोई संबंध नहीं है। ये भी पढ़े... नागरिकता कानून के समर्थन में पीएम मोदी ने शुरू किया #IndiaSupportsCAA अभियान, ट्वीट कर छेड़ी मुहिम नागरिकता कानून पर बवाल, विरोध में सत्याग्रह पर बैठी कांग्रेस, सोनिया-राहुल-मनमोहन ने पढ़ा संविधान का प्रस्तावना उप्र में नागरिकता कानून पर बवाल, 9 लोगों की मौत, 21 जिलों में इंटरनेट बैन, 31 जनवरी तक धारा 144 लागू Read the full article