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राहतभरी खबर: यदि लॉकडाउन के बाद गई नौकरी तो सरकार देगी आधी सैलरी!
चैतन्य भारत न्यूज कोरोना महामारी ने आर्थिक तौर पर हर तबके को बड़ा झटका दिया है। सबसे ज्यादा संकट रोजगार पर गहराया है। खासतौर से प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले लोगों में बेरोजगारी की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक कोरोना संकट की वजह से अभी तक करीब 1.9 करोड़ लोग नौकरियां गंवा चुके हैं। सिर्फ जुलाई महीने में ही 50 लाख लोग बेरोजगार हुए हैं। यह आंकड़ा चिंता का विषय है, क्योंकि कोरोना संकट से पहले भी रोजगार के आंकड़े परेशान कर रहे थे। अब मोदी सरकार बेरोजगार हुए औद्योगिक कामगारों के लिए राहत की खबर लेकर आई है। सरकार ऐसे कामगारों की नौकरी छूट जाने पर आधी तनख्वाह देने का ऐलान किया है। सरकार की मानें तो 42 लाख कामगारों को इसका फायदा होगा। अब महामारी के दौर में नौकरी गंवाने वालों को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। दरअसल लोगों की आजीविका पर संकट को टालने के लिए श्रम मंत्रालय ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना के तहत राहत बढ़ाने के फैसले को अधिसूचित कर दिया है। जिससे कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में रजिस्टर्ड कामगारों को 50% अनएम्प्लॉयमेंट बेनिफिट मिलेगा। यानी कोरोना संकट में नौकरी गंवा चुके औद्योगिक कामगारों को तीन महीने तक 50 फीसदी सैलरी बेरोजगारी लाभ (अनएम्प्लॉयमेंट बेनिफिट) के रूप में दिया जाएगा। यह फायदा उन कामगारों को मिलेगा, जिनकी नौकरी इस साल 24 मार्च से 31 दिसंबर के बीच चली गई हो। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के वर्कर्स को यह सुविधा दी जाएगी। वे तीन महीने के लिए औसत सैलरी का 50% क्लेम कर सकते हैं। पहले यह सीमा 25 फीसदी थी, जिसे कोरोना संकट की वजह से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दी गई है। अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना कर्मचारी राज्य बीमा निगम यानि ESIC के द्वारा संचालित योजना है। इस योजना को 1 जुलाई, 2020 से एक साल के लिए बढ़ाया गया है। यह 30 जून, 2021 तक प्रभावी रहेगी। हालांकि 1 जनवरी, 2021 के मूल प्रावधान बहाल हो जाएंगे। इस सुविधा को प्राप्त करने के लिए कामगार किसी भी ESIC शाखा में जाकर आवेदन कर सकते हैं, आवदेन की जांच के बाद बैंक क्लेम सही मिलने पर उन्हें आधाी सैलरी दी जाएगी। रकम कामगार के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे। इसके लिए आधार नंबर की मदद ली जाएगी। कामगारों को इस राहत के बदले ईएसआईसी पर 6710।68 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। ESIC श्रम मंत्रालय के तहत आने वाला संगठन है जो 21,000 रुपये तक सैलरी पाने वाले लोगों को ESI स्कीम के तहत बीमा मुहैया करता है। Read the full article
WHO की कोरोना वैक्सीन को लेकर चेतावनी- ये कोई जादुई गोली नहीं होगी, जो पलक झपकते ही खत्म कर देगी वायरस
चैतन्य भारत न्यूज जिनेवा. इस समय पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है। ऐसे में हर कोई कोरोना की वैक्सीन का इंतजार कर रहा है। जल्द ही कोरोना की वैक्सीन आने की उम्मीद भी है। लेकिन इससे पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना की वैक्सीन को लेकर चेतावनी जारी की है। डब्ल्यूएचओ ने क्या कहा डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि, 'कोरोना वैक्सीन कोई जादुई गोली नहीं होगी, जो पलक झपकते ही कोरोना वायरस को खत्म कर देगी।' डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस ने कहा कि, 'अभी हमें लंबा रास्ता तय करना है इसलिए सबको साथ मिलकर प्रयास करने होंगे।' राष्ट्रवाद के खिलाफ जारी की थी चेतावनी बता दें डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में वैक्सीन पर राष्ट्रवाद के खिलाफ चेतावनी दी थी। डब्ल्यूएचओ ने अमीर देशों को आगाह करते हुए कहा था कि, यदि वे खुद के लोगों के उपचार में लगे रहते हैं और अगर गरीब देश बीमारी की जद में हैं तो वे सुरक्षित रहने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। डब्लूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस ने कहा था कि, वैक्सीन पर राष्ट्रवाद अच्छा नहीं है, यह दुनिया की मदद नहीं करेगा। दुनिया के लिए तेजी से ठीक होने के लिए, इसे एक साथ ठीक होना होगा, क्योंकि यह एक वैश्वीकृत दुनिया है। अर्थव्यवस्थाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। दुनिया के सिर्फ कुछ हिस्से या सिर्फ कुछ देश सुरक्षित या ठीक नहीं हो सकते। 12 अगस्त को रूस देगा पहली वैक्सीन को मंजूरी गौरतलब है कि कोविड-19 वैक्सीन को मंजूरी देने वाला रूस पहला देश बनने जा रहा है। यहां के उप स्वास्थ्य मंत्री ओलेग ग्रिडनेव ने कहा है कि, 12 अगस्त को कोरोनो वायरस के खिलाफ बनाई गई पहली वैक्सीन को मंजूरी देगा। ये वैक्सीन मॉस्को स्थित गमलेया इंस्टीट्यूट और रूसी रक्षा मंत्रालय ने संयुक्त रूप से मिलकर बनाई है। हालांकि, दुनियाभर के वैज्ञानिक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं सबसे आगे निकलने की यह दौड़ उलटी न साबित हो जाए। ये भी पढ़े... पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी हुए कोरोना संक्रमण का शिकार, जांच रिपोर्ट आई पॉजिटिव कोरोना का कहर: दुनियाभर में 2 करोड़ के करीब पहुंची मरीजों की संख्या, 7.18 लाख मौतें हुईं, देश में 22 लाख से ज्यादा मरीज कोरोना काल में अमिताभ बच्चन परेशान, पूछा- मेरे लिए कोई और जॉब है क्या Read the full article
कोरोना संकट: 15 अगस्त के बाद खुलेंगे सभी स्कूल-कॉलेज, मानव संसाधन मंत्री ने की घोषणा
चैतन्य भारत न्यूज नई दिल्ली. मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रविवार को यह घोषणा की है कि सभी स्कूलों और कॉलेजों को 15 अगस्त के बाद खोला जाएगा। उन्होंने यह बात एक इंटरव्यू के दौरान कही। निशंक ने कहा कि, '15 अगस्त तक सभी परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने की कोशिश कर रहे हैं।' बता दें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एचआरडी मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को स्कूल पुनः खोलने की योजना पर पत्र लिखा था। इस बात की जानकारी उन्होंने कल ट्वीट के माध्यम से दी थी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि, 'अब समय आ गया है कि कोरोना के सहअस्तित्व को स्वीकार करते हुए देश में स्कूलों की भूमिका नए सिरे से तय की जाए।' साथ ही उन्होंने यह भी लिखा था कि, 'स्कूलों को साहसिक भूमिका के लिए तैयार नहीं किया गया तो यह हमारी ऐतिहासिक भूल होगी, स्कूलों की भूमिका पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों को जिम्मेदार जीवन जीने के लिए तैयार करने की होगी।' बता दें कोरोना महामारी के चलते देशभर में मार्च से ही स्कूल- कॉलेज बंद है। ऐसे में बच्चों को ऑनलाइन क्लासेस के जरिए पढ़ाया जा रहा है। लेकिन इस बात से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है कि कहीं न कहीं छात्रों की पढ़ाई का नुकसान भी हो रहा है। कब होंगी बची हुई परीक्षाएं और प्रवेश परीक्षा CBSE बोर्ड परीक्षा 1 जुलाई से 15 जुलाई तक आयोजित की जाएगी, ICSE / ISC परीक्षा 1 जुलाई से शुरू होकर 12 जुलाई तक चलेगी। NEET और JEE की परीक्षा जुलाई में होगी। NEET की प्रवेश परीक्षा 26 जुलाई और JEE की प्रवेश परीक्षा 18 जुलाई से 23 जुलाई तक होगी। Read the full article
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कोरोना से देश बनी इमरजेंसी जैसे हालातों से निपटने के लिए केंद्र सरकार को मंदिरों का सोना लेने की सलाह दी थी
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, भारत के मंदिरों और घरों का मिलाकर कुल 22 हजार से 25 हजार टन सोना है, रिजर्व बैंक के पास 612 टन सोना है
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया कहते हैं कि फिलहाल मंदिरों से सोना लेने की नौबत नहीं आई है, यह सोना सिर्फ गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के जरिए अगले 2-3 साल तक सोने का आयात कम करने में मदद कर सकता है
दैनिक भास्कर
May 26, 2020, 07:37 AM IST
नई दिल्ली. दो हफ्ते पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के एक ट्वीट ने बहुत सुर्खियां बटोरीं थीं। ट्वीट में चव्हाण ने लिखा था, “वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत के धार्मिक ट्रस्टों के पास 1 ट्रिलियन डॉलर (76 लाख करोड़) का सोना है, भारत सरकार को देश के इन तमाम धार्मिक ट्रस्टों के पास मौजूद सोने का तुरंत इस्तेमाल करना चाहिए। आपातकाल जैसी इस स्थिति में सरकार गोल्ड बॉन्ड्स के जरिए सरकार कम ब्याज दरों पर यह सोना उधार ले सकती है।”
चव्हाण के इस ट्वीट के बाद भाजपा नेता उन पर बरस पड़े थे। भाजपा से राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा भी इनमें से एक थे। इन्होंने इस ट्वीट के जवाब में लिखा था, “क्या कांग्रेस अपने नेता पृथ्वीराज चव्हाण की राय से इत्तफाक रखती है कि मंदिरों का सोना ले लेना चाहिए ? क्या पृथ्वीराज चौहान जी अकेले कैथेड्रल चर्च की जमीन जिसकी अनुमानित कीमत 7000 करोड़ है, वक्फ जिसकी अनुमानित सम्पत्ति 60 लाख करोड़ है उसका भी इस्तेमाल करने की भी बात करेंगे?”
ये दो हफ्ते पहले की बात है लेकिन सोशल मीडिया पर यह बहस अभी भी जारी है। क्या देश के मंदिरों का सोना इस आपात स्थिति में उपयोग किया जाना चाहिए? क्या वक्फ बोर्ड के पास भी सोना है? क्या उसकी संपत्ति भी कोरोना से आहत हुई अर्थव्यवस्था को सींचने में उपयोग की जा सकती है? इन सवालों के जवाब सोशल मीडिया पर लोग अपने-अपने अंदाज में दे रहे हैं।
हमने भी इस पर कुछ रिसर्च की और पाया कि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एक अनुमान के मुताबिक भारत के मंदिरों में 2 हजार टन सोना है। अलग-अलग अनुमानों में इसे 3 हजार से 4 हजार टन के बीच भी बताया गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ही मानें तो भारत के मंदिरों के पास जो सोना है, वह भारत के रिजर्व बैंक के पास मौजूद सोने का तीन गुना है। जून 2019 की वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक के पास 618 टन सोना मौजूद था।
केन्द्र सरकार को नहीं पता कि मंदिरों के ट्रस्टों के पास कितना सोना है?
22 दिसंबर 2015 को राज्यसभा में सांसद रंजिब बिस्वाल ने जब भारत के मंदिरों में सोने की अनुमानित मात्रा का ब्यौरा मांगा था, तो इस पर वित्त मंत्रालय का कहना था कि उनके पास देश के मंदिरों में सोने के भंडार के बारे में कोई आंकड़ा नहीं है। इसके साथ ही रंजिब बिस्वाल ने यह भी पूछा था कि क्या सरकार ने गोल्ड मोनेटाइजेशन स्किम के माध्यम से मंदिरों के गोल्ड रिजर्व को वित्तीय प्रणाली में शामिल करने के लिए इनके ट्रस्टों से बातचीत शुरू की है? इस पर भी वित्त मंत्रालय का जवाब ना में ही मिला था। गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से मंदिरों का सोना बाजार में आने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा बहुत कम हुआ साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लॉन्च कर घरों और मंदिरों में पड़े इस सोने को बाहर निकालने की एक कोशिश की थी। इसी साल आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा था, “सोने को ‘डेड मनी’ के रूप में रखना यह आज के युग में शोभा नहीं देता है। सोना डेड मनी से एक जीवंत ताकत के रूप में परिवर्तित हो सकता है, अब घर में गोल्ड मत रखिए। उसे बैंक को दीजिए, ब्याज लीजिए और खुद को और देश को आर्थिक रूप से मजबूत कीजिए।”
मोदी की इस पहल पर कई मंदिर आगे भी आए थे। उन्होंने बैंकों में गोल्ड डिपोजिट कराया। लेकिन ज्यादातर मंदिरों के ट्रस्टों ने इस पर रूचि नहीं ली। लेकिन सरकार की इस योजना से यह कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी भी पृथ्वीराज चव्हाण की तरह ही बेकार पड़े सोने को अर्थव्यवस्था में लाकर इसे तेजी प्रदान करना चाहते थे।
यूपीए सरकार के आखिरी साल में रिजर्व बैंक ने मंदिरों से गोल्ड स्टॉक का ब्यौरा मांगा था
सितंबर 2013 में भारतीय रिजर्व बैंक ने देशभर के मंदिर ट्रस्टों से उनके पास जमा सोने का ब्यौरा मांगा था। उस समय भी हिंदू संगठनों ने और मंदिरों के ट्रस्टों ने इस पर आपत्ति जताई थी। इस बार भी जब पृथ्वीराज चव्हाण के ट्वीट पर कंट्रोवर्सी बनी तो कई पुजारियों को यह कहते सुना गया कि भक्त सोने को भगवान को चढ़ाते हैं, यह इसलिए नहीं होता कि ट्रस्ट इसे सरकार को दान दे दें या उधार दें। लोगों की भावनाएं इससे जुड़ी होती हैं, ट्रस्ट भक्तों के विश्वास को नहीं तोड़ सकते।
कमोडिटी एक्सपर्ट की राय- मंदिरों से सोना लेकर सरकार सिर्फ अगले कुछ सालों तक गोल्ड इंपोर्ट कम कर सकती है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया बताते हैं कि फिलहाल ऐसी नौबत नहीं आई है कि सरकार को मंदिरों का सोना लेने की जरूरत पड़े। इस सोने को लेकर सरकार अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा सकती है लेकिन वर्तमान में केन्द्रीय बैंक के पास पर्याप्त गोल्ड रिजर्व है, तो इसकी भी जरूरत नहीं। 1990 में सरकार को अपना सोना गिरवी रखने की जरुरत पड़ी थी, वैसे हालात अभी बिल्कुल नहीं है।
“सरकार बस इस सोने को गोल्ड मोनेटाइजेशन योजना के तहत उपयोग कर सकती है। इसके तहत मंदिर अगर बैंकों में सोना डिपोजिट करते हैं तो इसे पिघलाकर ज्वैलर्स को लोन पर दिया जाता है ताकि देश में उपलब्ध सोने से ही लोगों की मांग की पूर्ति की जा सके और सोने के आयात से होने वाला वित्तीय घाटा कम किया जा सके। भारत पिछले तीन सालों से औसतन 750 टन सोना आयात कर रहा है। अगर मंदिरों का सोना मिलता है तो अगले 3-4 सालों तक बाहर से सोना आयात करने की जरुरत नहीं होगी। यानी देश का पैसा देश में रहेगा। मंदिरों का सोना उधार लेकर हम बस यही कर सकते हैं।”
तिरुपति बालाजी में हर सप्ताह औसतन 10 किलो सोना चढ़ता है। एक अनुमान के मुताबिक यहां 200 टन सोना है।
देश में मंदिरों के पास तो सोना है, लेकिन क्या वक्फ बार्ड के पास भी सोने का कोई स्टॉक है?
इस सवाल पर हमें कुछ खास जानकारी नहीं मिली। लेकिन देशभर में वक्फ की संपत्ति को लेकर एक डाटा जरूर मिला। राज्यसभा में 9 अगस्त 2016 को सासंद हुसैन दलवाई के एक लिखित सवाल के जवाब में अल्पसंख्यक मंत्रालय ने बताया था कि सच्चर समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में 6 लाख एकड़ वक्फ भूमि है और इसकी कीमत 1.2 लाख करोड़ है।
हालांकि इसमें अतिक्रमण की गई प्रापर्टी का ब्यौरा शामिल नहीं था। मंत्रालय का कहना था कि अतिक्रमण की गई प्रापर्टी को वह वक्फ की संपत्ति नहीं मानता इसलिए इसका ब्यौरा इसमें शामिल नहीं है। वहीं पिछले साल नवंबर में मुख्तार अब्बास नकवी ने बताया था कि देश भर में वक्फ की 16,937 प्रापर्टी अतिक्रमण कर के बनाई गई है।
Dainik Bhaskar
भारत के मंदिरों में 2000 टन सोना है, यह केंद्रीय बैंक के गोल्ड रिजर्व का तीन गुना: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल
भारत के मंदिरों में 2000 टन सोना है, यह केंद्रीय बैंक के गोल्ड रिजर्व का तीन गुना: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल
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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कोरोना से देश बनी इमरजेंसी जैसे हालातों से निपटने के लिए केंद्र सरकार को मंदिरों का सोना लेने की सलाह दी थी
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, भारत के मंदिरों और घरों का मिलाकर कुल 22 हजार से 25 हजार टन सोना है, रिजर्व बैंक के पास 612 टन सोना है
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया कहते हैं कि फिलहाल मंदिरों से सोना लेने की नौबत नहीं आई है, यह…
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