Boat Ride
वाराणसी की घाट पर शाम का समय बहुत शांतिपूर्ण होता है। इसी समय हम अक्सर वहाँ जाकर शाम की ठंडी हवा और चाय का आनंद लेते हैं। सामने गंगा मैया विश्व से आए सभी लोगों के पाप धो रही होती हैं और सूर्य देव दुनिया की ब्राइट्निस कम कर रहे होते हैं। चाय की पहली चुस्की लेते ही, हमे घाट के किनारे एक बहुत सुंदर गुलाब का फूल नजर आया।
गुलाब का फूल घाट पर यूं पड़ा देखकर हम रह ना सके, हमने जैसे ही उसे अपने हाथों मे उठाना चाहा, एक दूसरा हाथ हमारे हाथ से टकरा गया। लपक के खड़े हुए तो चाय हमारी शर्ट पर मॉडर्न आर्ट बना चुकी थी और सामने एक फ़िरंग महिला मुस्कुरा रही थी। शायद वो भी उस फूल को उठाने जा रही थी और हम दोनों का हाथ इसी चक्कर मे टकरा गया। उनकी सुंदरता देख हम भूल ही गए कि हमारी छाती पर अंगारे नाच रहे थे, हमने जल्दीबाज़ी मे उन्ही के सामने शर्ट उतार दी।
वो कुछ पल वहीं खड़ी मुसकुराती रही, उनके कपोलों पर एक लालिमा आ रही थी, जिसे देखकर हमने गुलाब तुरंत उनकी तरफ कर दिया। उनकी मुस्कान और चौड़ी हो गई और मोहित नैनों से उन्होंने हमे कुछ पल देखा और फिर अपना नाम बताया – “सोफिया”
उन्होंने जैसे ही हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया, हमने उन्हे नमस्ते कर दिया, और मन मे खुद को एक जोर का चांटा भी मारा। हमने अपनी शर्ट फटाफट गंगा मे धोई, उसे झाड़ा और फिर वापस पहन ली। सोफिया ने अपना हाथ नीचे किया और मुस्कान मानो पान की पिचकारी की तरह थूक दी। युद्ध भूमि मे थे हम और अपनी जान बचाने का सिर्फ एक मात्र तरीका बचा था, हमने तुरंत पूछा –
हम चाय?
उन्होंने थोड़ी देर हमे देखा, फिर इधर-उधर कुछ तांकती दिखीं, लेकिन अंत मे मान गईं।
हम आप यहीं रुकें, हम अभी आए।
बुद्धू सा मन, हिन्दी तो ऐसे बोल रहे थे हम जैसे सब समझ आ रहा था उन्हे। सोफिया ने हमे ऐसे देखा मानो हम ही वो वानर थे जो राम सेतु बनाते समय पत्थर नहीं उठा पा रहे थे। हमने तुरंत अपनी भाषा पलटी, थोड़ी अंग्रेजी तो हमे भी आती थी।
हम आईगो, ब्रिंग टी, यू वेट।
तुरंत सामने से उनका जवाब आया।
सोफिया ओह.. ओके।
हम जैसे ही भागे चाय लेने के लिए, फर्श पर जमी काई ने हमे अपना परिचय दिया। हमने भी बड़े प्यार से अपना मस्तक संग शरीर झुकाया। सोफिया ने गुलाब के फूल को सूंघते हुए हमे फर्श पर रगड़ते हुए देखा। हम तुरंत उठके खड़े हो गए और थोड़ी देर एक सैनिक की तरह सीधे खड़े रहे। सोफिया अपनी हंसी रोकने की पूरी कोशिश कर रहीं थी फिर उनसे रहा ना गया। वो खिलखिलाकर हसने लगीं और फिर हमसे बोलतीं –
सोफिया Looks like it isn’t your day today.
हमने भी हामी भरी, शायद वो हमसे कह रहीं थी कि हमारा दिन खराब है। उनकी आवाज की मधुरता पर हमारा दिल या गया। सरल होते हैं हम पुरुष लोग बहुत। दो चार मीठी बातें और चाय.. अरे चाय तो भूल ही गए लाना.. दोबारा पलटे तो सोफिया ने ही रोक लिया।
सोफिया Hey, let it be. What’s your name?
शायद उन्होंने हमे चाय रहने देने के लिए कहा। हम तुरंत उनकी ओर पलटे और घाट पर उनके नजदीक आकार खड़े हो गए। पीछे गंगा आरती शुरू होने जा रही थी। हमने अपना नाम बताया।
हम हमारा नाम कृष्णा है।
सोफिया Krishna? Like him?
उन्होंने पीछे इशारा करते हुए हमे दीवार पर बने बंसी बजाते मुरली मनोहर की तस्वीर दिखाई। हमने हामी भरते हुए सर ऊपर नीचे किया। फिर हम दोनों कुछ क्षण वहीं खड़े रहे और कुछ नहीं बोले। कभी कभी ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं जहां आप खड़े रहते हैं और प्रकृति बोलने लगती है। ये वैसा ही पल था। चिड़ियाओं को चहचहाना, आरती की तरफ बढ़ती हुई भीड़, जाप करते हुए साधु, और दूर कहीं एक बंसी भी सुनाई दी जो शंख की गूंज मे मिल गई। तभी हम दोनों को एक आवाज सुनाई पड़ी –
“साहब, बोट राइड?”















