शारदीय नवरात्री २०२४
पंचम दिवस साधना
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
जय श्री भैरव जय महाकाल जय बजरंग बली
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्॥ धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पञ्चम दुर्गा त्रिनेत्राम्। अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्। मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल धारिणीम्॥ प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् पीन पयोधराम्। कमनीयां लावण्यां चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥
नैवैद्य:
भापा पीठा, नारियल की खीर एवम फल तथा सुवासित जल
ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना
जय तेरी हो स्कन्द माता। पाँचवाँ नाम तुम्हारा आता॥ सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥ तेरी जोत जलाती रहूँ मैं। हरदम तुझे ध्याती रहूँ मै॥ कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥ कही पहाड़ों पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥ हर मन्दिर में तेरे नजारे। गुण गाये तेरे भक्त प्यारे॥ भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥ इन्द्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥ दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आये। तू ही खण्ड हाथ उठाये॥ दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी॥
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।
“मंगलम भगवान् विष्णु, मंगलम गरुड़ध्वजः। मंगलम पुन्डरी काक्षो, मंगलायतनो हरि॥”
सर्व मंगल मांग्लयै शिवे सर्वार्थ साधिके | शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||
त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बंधू च सखा त्वमेव त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव
कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात करोमि यध्य्त सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि ||
जय मां स्कंदमाता जय भवानी
नम: पार्वती पतये हर हर महादेव:
ॐअपराधसहस्राणिक्रियन्तेऽहर्निशंमया |
दासोऽयमितिमांमत्वाक्षमस्वपरमेश्वरि || १ ||
आवाहनंनजानामिनजानामितवार्चनम |
पूजांचैवनजानामिक्षम्यतांपरमेश्वरि || २ ||
मन्त्रहीनंक्रियाहीनंभक्तिहीनंसुरेश्वरि |
यत्पूजितंमयादेविपरिपूर्णंतदस्तुमें || ३ ||
अपराधशतंकृत्वाजगदम्बेतिचोच्चरेत् |
यांगतिंसमवाप्नोतिनतांब्रह्मादयःसुराः || ४ ||
सापराधोऽस्मिशरणंप्राप्तस्त्वांजगदम्बिके |
इदानीमनुकम्प्योऽहंयथेच्छसितथाकुरु || ५ ||
अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्यायन्न्यूनमधिकंकृतम् |
तत्सर्वंक्षम्यतांदेविप्रसीदपरमेश्वरि || ६ ||
कामेश्वरिजगन्मातःसच्चिदानंदविग्रहे |
गृहाणार्चामिमांप्रीत्याप्रसीदपरमेश्वरि || ७ ||
गुह्यातिगुह्यगोप्त्रीत्वंगृहाणास्मत्कृतंजपम् |
सिद्धिर्भवतुमेंदेवित्वत्प्रसादात्सुरेश्वरि || ८ ||
अनेन पूजनेंन श्री दुर्गार्पणमस्तु 🙏🏼
जय मां भवानी जय मां अम्बे जय महादेव जय गजानन जय भैरव जय बजरंगबली












