जानिए क्या है नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ?
मौजूदा वक़्त की शिक्षा नीति राजीव गाँधी द्वारा 1986 में लागू की गई थी। 1992 में नरसिम्हा राव के समय में थोड़ा सा परिवर्तन किया गया था लेकिन वह प्रणाली अब नरेंद्र मोदी सरकार पूरी तरह बदलेगी।
जब देश आज़ाद हुआ तब से ले कर 1985 तक शिक्षा मंत्री और शिक्षा मंत्रालय ही हुआ करते थे लेकिन फिर राजीव गाँधी सरकार ने इसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय कर दिया। इस नाम को लेकर आर.एस.एस. से जुड़े संगठन भारतीय शिक्षण मंडल ने आपत्ति जताई थी और साल 2018 के अभिवेशन में इस नाम को बदलने की मांग भी उठाई थी। दलील यह दी थी कि मानव को संसाधन नहीं मान सकते ऐसा करना भारतीय मूल्यों के विरुद्ध होगा।आज पूरे 34 साल बाद फिर से मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नामांकरण शिक्षा मंत्रालय के रूप में हुआ।
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क्या है नई शिक्षा नीति 2020 :
नई नीति के अनुसार जी.डी.पी. का 6% शिक्षा में इस्तेमाल होगा जो की वर्तमान समय में 4.3 % है।नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट को आज केंद्रीय कैबिनेट ने मंज़ूरी दे दी है। 2014 के लोक सभा चुनाव में नई शिक्षा नीति भा.जा.पा. के घोषणापत्र का हिस्सा थी।नई शिक्षा नीति को बनाने के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर 2015 को सरकार ने पूर्व कैबिनेट सचिव टी.एस.आर. सुब्रमणियम की अध्यक्षता में 5 सदस्यों की कमिटी बनाई।कमिटी ने अपनी रिपोर्ट 27 मई 2016 को दी इसके बाद 24 जून 2017 को इसरो के प्रमुख वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 9 सदस्यों की कमिटी को नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार करने की ज़िम्मेदारी सौंप दी गई। 31 मई 2019 को यह ड्राफ्ट एच आर डी मंत्री रमेश पोखरयाल को सौंपा गया। इस ड्राफ्ट पर मंत्रालय ने लोगो के सुझाव भी मांगे जिस पर 2 लाख सुझाव आए और उसके बाद 29 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को मंज़ूरी दे दी।
क्यों पड़ी नई शिक्षा नीति की ज़रूरत ?
सरकार ने यह दलील दी कि बदलते समय की आवश्यकताओं को पूर्ण करने और शिक्षा की गुडवत्ता को बढ़ाने के लिए नवोन्मेष ,शोध की तरफ बढ़ने के लिए और देश को शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति प्रदान करने के लिए नई शिक्षा नीति की ज़रूरत पड़ी।
मौजूदा वक़्त की शिक्षा नीति राजीव गाँधी द्वारा 1986 में लागू की गई थी। 1992 में नरसिम्हा राव के समय में थोड़ा सा परिवर्तन किया गया था लेकिन वह प्रणाली अब नरेंद्र मोदी सरकार पूरी तरह बदलेगी।
एच.आर.डी. मंत्री के बदलाव को लेकर विचार:
एच.आर.डी. मिनिस्टर ने बदलाव पर जो कथन कहे वो इस प्रकार हैं “आज हिंदुस्तान के हाँथ में एक ऐसा अवसर आया है जब इस देश के यशस्वी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में इस देश की ऐसी शिक्षा नीति जो 1986 के बाद जो स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा में उसका परिवर्तन कार्य सुधारो के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता प्रशस्त करेगा। और जो हमारे देश के प्रधान मंत्री ने एक नए भारत के निर्माण की बात की है ,जो स्वच्छ भारत होगा ,स्वस्थ भारत होगा ,सशक्त भारत होगा ,समृद्ध भारत होगा श्रेष्ठ भारत होगा ,एक भारत होगा उस नए भारत के निर्माण में यह नई शिक्षा नीति 2020 मील का पत्थर साबित होगी।”
मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय करदिया जाएगा।
जब देश आज़ाद हुआ तब से ले कर 1985 तक शिक्षा मंत्री और शिक्षा मंत्रालय ही हुआ करते थे लेकिन फिर राजीव गाँधी सरकार ने इसे मानव संसाधन मंत्रालय कर दिया।
एच आर डी मिनिस्टर शिक्षा मंत्री कहलाएंगे
क्या है क्रेडिट ट्रांसफर ?:
अब यह शिक्षा अनेक प्रविष्टि और बाहर निकलने वाली होगी इसका मतलब यह है की अगर किसी ने इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया और 2 सेमेस्टर के बाद किसी भी समस्या के कारण पढाई जारी ना कर पाने की स्थिति आई या कोई और कोर्स करने का मन हुआ तो यह एक साल व्यर्थ नहीं होगा इस एक साल के आधार पर सर्टिफिकेट मिलेगा यदि दो साल पढ़ेंगे तो डिप्लोमा मिलेगा और कोर्स पूरा करने पर डिग्री मिलेगी।
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बी.ए.या बी.एस.सी. जैसे ग्रेजुएशन करने वालो के लिए खुशखबरी :
जिन्हे नौकरी करनी है केवल उनके लिए यह कोर्स 3 साल का होगा और जिन्हे आगे रिसर्च करनी है उनके लिए 4 साल।फिर 1 साल का पोस्ट ग्रेजुएशन और 4 साल का पी.एच.डी. जिसमे अब एम.फिल. की ज़रूरत नहीं होगी।
बहु अनुशासनात्मक शिक्षा होगी ,यानि की कोई एक स्ट्रीम नहीं होगी कोई भी मनचाहे विषय चुन सकता है। यदि आप फिजिक्स में ग्रेजुएशन कर रहे हैं और पोलिटिकल साइंस या म्यूजिक जैसे विषयो में रूचि रखते हैं तो उन्हें भी पढ़ सकते हैं।
कॉलेजो में होगी ग्रेडेड ऑटोनोमी :
कई कॉलेज एक ही विश्वविद्यालय से संबद्ध यानि एफिलिएटेड होते हैं और उनकी परीक्षा विश्वविद्यालयों के हाँथ में होती है।लेकिन अब कॉलेजो को भी अधिकार होंगे।
सिंगल रेगुलेटर बनाया जाएगा :
इस समय कई अलग संस्थाए हैं जो उच्च शिक्षा के लिए नियम बनती हैं जैसे यू.जी.सी., ए.आई.सी.टी.ई., आदि।इन सबको मिला कर एक कर दिया जाएगा।
देश के हर विश्वविद्यालय के लिए शिक्षा के मानक एक सामान होंगे यानि की केंद्र,राज्य या डीम्ड विश्वविद्यालय हो सबका स्तर एक जैसा होगा।
प्राइवेट कॉलेज मनमानी फीस नहीं वसूल कर सकेंंगे। जिसके लिए फी कप तय होंगे।
शोध की फंडिंग के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाया जाएगा।जिसमे साइंस और आर्ट्स सभी विषयो को फण्ड किया जाएगा।तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा।आभासी या वर्चुअल लैब भी शुरू किये जाएंगे।
स्कूली शिक्षा में बदलाव :
वर्तमान समय में स्कूली शिक्षा 10 + 2 के आधार पर है जिसमे 10वी तक सभी विषय पढ़ने होते हैं और और 11वी में स्ट्रीम तय करनी होती है।
नए सिस्टम के तहत 5 +3 +3 +4 बताया गया है जिसमे स्कूल के आखरी साल 9वी से 12वी तक एक समान होंगे।
जिसमे विषयो को गहराई से पढ़ाया जाएगा लेकिन स्ट्रीम का चुनाव ज़रूरी नहीं होगा यह पढाई मल्टीस्ट्रीम होगी मैथ्स
वाला इतिहास भी पढ़ सकेगा और एक्स्ट्रा सुर्रिकुलुर में जैसे म्यूजिक या स्पोर्ट्स भी शामिल कर लिया जाएगा। इन विषयो को एक्स्ट्रा ना मान कर मुख्य समझा जाएगा।
3 से 6 साल के बच्चों के लिए अलग पाठ्यक्रम तैयार होगा जिसमे उन्हें खेल -खेल में सिखाया जाएगा जिसके लिए शिक्षकों की भी अलग तरह से ट्रेनिंग होगी।
6 से 9 साल तक के बच्चों को लिखना पढ़ना आ जाए इस बात पर ध्यान दिए जाएगा जिसके लिए नेशनल मिशन शुरू होगा।
कक्षा 6 से ही बच्चों को वोकेशनल कोर्स पढ़ाई जाएंगे यह पढाई स्किल बेस्ड होगी और इसमें इंटर्नशिप भी होगी जिसमे वह किसी एक जगह जा कर काम सीखेंगे।
6ठी कक्षा से बच्चों के प्रोजेक्ट बेस्ड सिखने के मॉडल तैयार किये जाएंगे। इन्हे कोडिंग भी सिखाई जाएगी।
सिलेबस में बदलाव होंगे। सिलेबस में बदलाव सारे देश में एक जैसा होगा।
मात्र भाषा में पढ़ाने के लिए ज़ोर दिया जाएगा।
साल में 2 बार बोर्ड की परीक्षाए कराई जा सकती हैं जिसमे ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न भी हो सकते हैं।
रिपोर्ट कार्ड में ना केवल शिक्षकों के लिए बल्कि बच्चों के लिए भी एक कॉलम होगा जिसमे बच्चे स्वयं अपना मूल्याँकन करेंगे, और एक कॉलम में सहपाठी में उनका मूल्याँकन करेंगे।
स्कूल के बाद कॉलेज में दाखिले के लिए एक सामान्य प्रवेश परीक्षा हो इसके लिए राष्ट्रीय सहायता केंद्र बनाए जाएंगे।
स्कूल से निकलते वक़्त हर बच्चे के पास एक व्यावसायिक कौशल होगा।
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