क्या नज़ारा है? मन ग्लानि समाए एक तरफ पाप धोता जाए एक तरफ पिरोता जाए पवित्रता की देवी निश्छल मन जाने पापी पाप करता जाए गंगा पाप धोती जाए संयम मौन भरा कितना धैर्य समाए मैला मन ये धोती जाए खुद मैल पाती जाए देवी गंगा कहलाए पापी किसे ठहराए भक्त प्रदूषित करता जाए मन दूषित होता जाए स्वच्छता श्रृंगार तेरा मन कोमल कहलाए मानव प्रदूषण अलंकृत कर जाए जल धारा गरल बनाता जाए #dil_ke_bol_alfaaz #hindikavita #hindilekhan #hindilekh #ganga #pradushan #panchdoot_news #hindi #hindipatrika #kavyasangam https://www.instagram.com/p/BoN0l0fBgP9/?utm_source=ig_tumblr_share&igshid=rz376ipkqki3