हावड़ा ब्रिज के अनसुने तथ्य Howrah bridge facts in Hindi
तीन-चौथाई सदी से कोलकाता की पहचान बना हावड़ा ब्रिज यानी रवींद्र सेतु अपने इस लंबे सफर के दौरान कई ऐतिहासिक घटनाओं का मूक गवाह रहा है.
हावड़ा ब्रिज के अनसुने तथ्य Howrah bridge facts in Hindi
यदि किसी ने कोलकाता का उल्लेख किया है,तो पहली चीज जो दिमाग में आती है वह है हावड़ा ब्रिज। कोलकाता भ्रमण के लिस्ट में जो सबसे प्रमुख स्थान होता है,वह हावड़ा ब्रिज ही है।यह ब्रिज कई कारणों से पर्यटकों को आकर्षित करता है।इसके कई रोचक तथ्य हैं, जिन्हें सुनना और पढ़ना पसंद किया जाता है।यहां, हम आपको हावड़ा ब्रिज के बारे में 9 आश्चर्यजनक एवं ज्ञानवर्धक जानकारियाँ देंगे जो शायद बहुत कम लोग ही जानते होंगे!
1. हावड़ा ब्रिज एक कैंटिलीवर पुल है जो पश्चिम बंगाल में हुगली नदी पर बनाया गया है। यह ब्रैकट ब्रिज एक कैंटिलीवर का उपयोग करके बनाया गया है, सामान्यतः कोई भी ब्रिज कई खम्बों पर टिका होता है लेकिन यह एक ऐसा पुल है जो केवल चार खम्बों पर टिका हुआ है, दो नदी के इस तरफ और दो नदी के उस तरफ।
2. इस पुल के निर्माण के लिए तत्कालीन बंगाल सरकार के द्वारा एक एक्ट पारित किया गया,जिसे HOWRAH BRIDGE ACT, 1926 नाम से जाना जाता है।
3. बहुत कम लोगो को ये जानकारी होंगी के द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानियों द्वारा इस ब्रिज को नष्ट करने की कोशिश की गयी थी, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिल पायी।
Old Photo Of Howrah Bridge
3. 14 जून 1965 को महान राष्ट्रीय कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर पुल का नाम बदलकर रवींद्र सेतु रखा गया। हालांकि, यह अभी भी हावड़ा ब्रिज के रूप में अधिक लोकप्रिय है।
4. इस पुल से प्रतिदिन लगभग 100000 वाहन एवं लगभग 150000 पैदल यात्री हुगली नदी को पार करते है, जो पश्चिम बंगाल के दो प्रमुख शहरों कोलकाता एवं हावड़ा को जोड़ता है।
5. पुल का उपयोग करने वाला पहला वाहन "ट्राम" था।
6. इसके निर्माण के समय, यह तीसरा सबसे लंबा कैंटिलीवर पुल था। अब, यह दुनिया में अपने प्रकार का आठवाँ सबसे लंबा पुल है।
7. कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट को प्रत्येक वर्ष पक्षिओं के मल एवं पैदल यात्रिओं के थूकने से ब्रिज को होने वाली क्षति एवं गन्दगी की सफाई के लिए लगभग 5 लाख रूपये खर्च करने पड़ते है, साथ ही पुल को पेंट करने में लगभग 6.5 मिलियन और 26,500 लीटर पेंट की आवश्यकता होती है।
8. हावड़ा ब्रिज के निर्माण में 26,500 टन स्टील की खपत हुई थी,जिसकी आपूर्ति टाटा स्टील द्वारा की गई थी।
9. आपको को जानकर हैरानी होगी कि हावड़ा ब्रिज ने लगभग हर दौर के फिल्म निर्माताओं को आकर्षित किया है। इसने कई हिंदी, मलयालम, बंगाली, तमिल, अंग्रेजी इत्यादि फिल्मों में अभिनय किया है। यहाँ शूट की गई फ़िल्मों में हावड़ा ब्रिज ,गुंडे, बर्फी, लव आज-कल, तमिल फ़िल्म आधार, मलयालम फ़िल्म कलकत्ता न्यूज़, रोलैंड जोफ़े की अंग्रेज़ी भाषा की फ़िल्म सिटी ऑफ़ जॉय शामिल है, लिस्ट बहुत लम्बी है।
Howrah Bridge In Night
पश्चिम बंगाल के लोगों में इस पुल का एक विशेष महत्व है, साथ ही यह पुरे विश्व में अपनी बनावट के लिए विख्यात है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि इस पुल को स्वस्छ एवं सुरक्षित रखने में प्रशासन की सहायता करे।
कैसे बना हावड़ा ब्रिज
कोलकाता और हावड़ा के बीच हुगली नदी पर पहले कोई ब्रिज नहीं था. नदी पार करने के लिए नाव ही एकमात्र जरिया थी.
बंगाल सरकार की ओर से वर्ष 1871 में हावड़ा ब्रिज अधिनियम पारित होने के बाद वर्ष 1874 में सर ब्रेडफोर्ड लेसली ने नदी पर पीपे के पुल का निर्माण कराया था.
साल 1874 में 22 लाख रुपये की लागत से नदी पर पीपे का एक पुल बनाया गया जिसकी लंबाई 1528 फीट और चौड़ाई 62 फीट थी.
हावड़ा ब्रिज के अनसुने तथ्य Howrah bridge facts in Hindi
फिर 1906 में हावड़ा स्टेशन बनने के बाद धीरे-धीरे ट्रैफिक और लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी.
तब इस पुल की जगह एक फ्लोटिंग ब्रिज यानी तैरता हुआ पुल बनाने का फैसला किया गया.
लेकिन तब तक पहला विश्वयुद्ध शुरू हो चुका था. इस वजह से काम शुरू नहीं हुआ.
साल 1922 में न्यू हावड़ा ब्रिज कमीशन का गठन करने के कुछ साल बाद इसके लिए निविदाएं आमंत्रित की गईं.
हावड़ा ब्रिज के अनसुने तथ्य Howrah bridge facts in Hindi
तब जर्मनी की एक फर्म ने सबसे कम दर की निविदा जमा की थी.
लेकिन तब जर्मनी और ग्रेट ब्रिटेन के आपसी संबंधों में भारी तनाव रहने की वजह से जर्मन की फर्म को ठेका नहीं दिया गया.
बाद में वह काम ब्रेथवेट, बर्न एंड जोसेप कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया. इसके लिए ब्रिज निर्माण अधिनियम में संशोधन किया गया.
दोनों पायों के बीच 1500 फीट की दूरी
इस कैंटरलीवर ब्रिज को बनाने में 26 हजार 500 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है. इसमें से 23 हजार पांच सौ टन स्टील की सप्लाई टाटा स्टील ने की थी.
हावड़ा ब्रिज के अनसुने तथ्य Howrah bridge facts in Hindi
तैयार होने के बाद यह दुनिया में अपनी तरह का तीसरा सबसे लंबा ब्रिज था. पूरा ब्रिज महज नदी के दोनों किनारों पर बने 280 फीट ऊंचे दो पायों पर टिका है.
इसके दोनों पायों के बीच की दूरी डेढ़ हजार फीट है. नदी में कहीं कोई पाया नहीं है.
इसकी खासियत यह है कि इसके निर्माण में स्टील की प्लेटों को को जोड़ने के लिए नट-बोल्ट की बजाय धातु की बनी कीलों यानी रिवेट्स का इस्तेमाल किया गया है.
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापानी सेना ने इस ब्रिज को नष्ट करने के लिए भारी बमबारी की थी. लेकिन संयोग से ब्रिज को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.
हावड़ा ब्रिज के अनसुने तथ्य Howrah bridge facts in Hindi
अब इससे रोजाना लगभग सवा लाख वाहन और पांच लाख से ज्यादा पैदल यात्री गुजरते हैं. ब्रिज बनने के बाद इस पर पहली बार एक ट्राम गुजरी थी.
लेकिन वर्ष 1993 में ट्रैफिक काफी बढ़ जाने के बाद ब्रिज पर ट्रामों की आवाजाही बंद कर दी गई थी. 75 साल पूरे होने पर एक कॉफी टेबल बुक भी प्रकाशित की गई.
इसमें ब्रिज के जन्म से लेकर अब तक के सफर को तस्वीरों के जरिए उकेरा गया है.
यह ब्रिज बीते खासकर डेढ़ दशकों के दौरान कई हादसों और तकनीकी समस्याओं का भी शिकार रहा है.
साल 2005 में एमवी मणि नामक एक मालवाहक जहाज का मस्तूल इसके ढांचे में फंस गया था. इससे ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा था.
उस नुकसान की मरम्मत के लिए कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने इस ब्रिज के निर्माण के दौरान सलाहकार रहे इंग्लैंड के रेंडल, पाल्मर एंड ट्रिटान लिमिटेड से भी सहायता ले थी.
हावड़ा ब्रिज के अनसुने तथ्य Howrah bridge facts in Hindi
पोर्ट ट्रस्ट को वर्ष 2011 के दौरान एक अजीब समस्या से जूझना पड़ा था.
तब एक अध्ययन से यह बात सामने आई थी कि तंबाकू थूकने की वजह से ब्रिज के पायों की मोटाई कम हो रही है.
तब स्टील के पायों को नीचे फाइबर ग्लास से ढंकने पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च हुए थे.
पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष विनीत कुमार कहते हैं, "सामान्य तौर पर इस ढांचे का जीवन सौ से डेढ़ सौ साल तक होना चाहिए. लेकिन बीते 75 वर्षों के दौरान इससे गुजरने वाला ट्रैफिक कई गुना बढ़ गया है. इसलिए इसकी नियमित जांच जरूरी है."
हावड़ा ब्रिज के अनसुने तथ्य Howrah bridge facts in Hindi
वह बताते हैं कि जल्दी ही भारतीय तकनीकी संस्थान (आईआईटी) के विशेषज्ञों की एक टीम ब्रिज की स्थिति का अध्ययन करेगी.
उस रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत और रखरखाव का फैसला किया जाएगा.
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