मीडिया, सोशल मीडिया सब भरा पड़ा है. सब मिलकर, आज ही के दिन औरत को एम्पॉवर कर देंगे. जैसे कि औरत तो इंतज़ार में बैठी थी कि जैसे है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस आएगा, दुनियाँवाले एक फ़ेस्बुक पोस्ट या एक ट्वीट से मुझे मज़बूत कर देंगे. अरे अजब ग़ज़ब दुनियाँ वालों! औरत मज़बूत है, हम तमाम लिखने, पढ़ने और ज्ञान बाँचने वालों से ज़्यादा मज़बूत है. हम सबके अस्तित्व में आने की वजह, वही मज़बूती है. उसे किसी दिवस या जयंती की ज़रूरत नहीं, अपनी मज़बूती को समझने के लिए. ज़रूरत हमें है उसकी मज़बूती को परखने की, समझने और स्वीकार करने की. हम समझें कि उसे दया की नहीं, उसके प्रति हमारे दृष्टिकोण को बदलने की ज़रूरत है. मेरी ज़िंदगी में ऐसी बहुत सारी औरतें हैं - जिनकी वजह से मैं हूँ, बेहतर हो रहा हूँ. उन सभी को सदा सादर नमन! उन आज़ाद, बेख़ौफ़, अल्हड़, और अपने आप में एक उत्सव सी स्त्रीयों को सलाम! अरे हाँ, यह तस्वीर वैसे तो मेरी माँ की है. पर इसे एक संघर्षशील स्त्री की तस्वीर मानें, जो किसी की भी माँ, बहन, दोस्त या पत्नी हो सकती है. #internationalwomensday #inqlabzindabad https://www.instagram.com/p/CMKN0f-sn2R/?igshid=1ispng9ms8k6j

















