गाँधी और कांग्रेस नहीं देना चाहते अछूतों को राजनैतिक संरक्षण बाबा साहब के अनुसार गाँधी अपनी अछूतों के मसीहां की इमेज को स्वराज के चैम्पियन की छवि से अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। राउंड टेबल कांफ्रेंस के दौरान गांधी ने स्वयं को अछूतों का अग्रदूत बता डाला। अपने इस चैम्पियन के रोल को गांधी किसी के साथ… Read More »
उनके अनुसार एनी बेसेंट, जिन्होंने अधिवेशन की अध्यक्षता करी, वे तो खुले आम अछूतों के उत्पीड़न को समाज हित के लिए आवश्यक मानती रहीं, वो कब से अछूतों की हितैषी हो गयीं? साथ ही 1886 से कांग्रेस हर अधिवेशन में समाज सुधार के पचड़े में पड़ने से बचती रही। पर 1917 का प्रस्ताव मात्र राजनैतिक स्वार्थ से प्रेरित था, तथा जिसका एकमात्र उद्देश्य बेईमानी भरे रास्ते से अछूतों का समर्थन हासिल करना मात्र भर था।












