✨ कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 27 - Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 27
कृष्ण नाम का आसरा, कृष्ण नाम का ध्यान । सत्ताईसवाँ अध्याय अब, लिखने लगा महान ॥
पार्षदों ने कहा- एक दिन की बात है, विष्णुदास ने नित्यकर्म करने के पश्चात भोजन तैयार किया किन्तु कोई छिपकर उसे चुरा ले गया..
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पार्षदों ने कहा- एक दिन की बात है, विष्णुदास ने नित्यकर्म करने के पश्चात भोजन तैयार किया किन्तु कोई छिपकर उसे चुरा ले गया। विष्णुदास ने देखा
✨ दामोदर अष्टकम - Damodarastakam 📲 https://www.bhaktibharat.com/mantra/damodarastakam
✨ कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 28 📲 https://www.bhaktibharat.com/katha/kartik-mas-mahatmya-katha-adhyaya-28
धर्मदत्त ने पूछा- मैंने सुना है कि जय और विजय भी भगवान विष्णु के द्वारपाल हैं। उन्होंने पूर्वजन्म में ऐसा कौन सा पुण्य किया था जिससे वे भगवा











