नव वर्ष की शुभकामनाएं
ऐसा हो हमारा तुम्हारा यह नया साल बढे हर कोई और रहे समृद्ध, खुशहाल न हो कोई तकलीफ में न कोई बदहाल मिले सब जो चाहें न रहे कोई सवाल | देश को मिले एक मजबूत सरकार जिसे न हो किसी समर्थन की दरकार ले सके निर्णय जो रुके फैसले हज़ार मिले स्थिरता, ना पड़े महंगाई की मार | आशा यह भी है कि देश तरक्की करे डेफिसिट कम हो, जीडीपी आगे बढे मंगल ही क्यूँ, हम हर गृह की सैर करें पर उपज हो जो हर भूखा अपना पेट भरे | जी करता है इतनी अपेक्षा भाइयों से रखू जो रखे संयम और बहाये न बहनो के खूं पर जिस संवेदना से वाक्य लिख रहा हूँ इसी वक्त एक अबला का है बेह रहा लहू | यूँही करते हैं कई ख्वाहिशें हर साल हम कुछ होते हैं पूरे कुछ रेह जाते हैं दो कदम कहते हैं उम्मीद पर दुनिया है जब कायम तब फर्क नहीं ख्वाहिशें ज्यादा हो या कम | ---- शशि










