भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 32-35 हे गोविंद! हमें राज्य हैं सुख अथवा इस जीवन से क्या लाभ क्योंकि जिन सारे लोगों के लिए हमने चाहते हैं वही इस युद्ध भूमि में खड़े हैं। हे मधुसूदन! जब गुरु जन पितृगण पुत्र गण पितामह मामा ससुर पोत्रगण साले तथा अन्य सारे संबंधी अपना अपना धन एवं प्राण देने के लिए तत्पर हैं और मेरे समक्ष खड़े हैं तो फिर में इन सबों से लड़ने को तैयार नहीं , भले ही बदले में मुझे तीनों लोक क्यों ना मिलते हो , इस पृथ्वी की तो बात ही छोड़ दें । भला धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें कोन सी प्रसनता मिलेगी ? यहां पर जाति या परिवार के प्रति अर्जुन का स्नेह आंशिक रूप से इन सब के प्रति उसकी स्वाभाविक करुणा के कारण है। अतः वह युद्ध करने के लिए तैयार नहीं है। हर व्यक्ति अपने वैभव का प्रदर्शन अपने मित्रो तथा परिजनों के समक्ष करना चाहता है किन्तु अर्जुन को भय है कि उसके साथ अपने वैभव का उपयोग नहीं कर सकेगा । भौतिक जीवन का यह सामान्य लेखा जोखा है। किन्तु आध्यात्मिक जीवन इससे सर्वधा भिन्न होता है । अर्जुन अपने संबंधियों को मारना नहीं चाह रहा था और यदि उनको मारने कि आवशयकता हो तो अर्जुन की इच्छा थी कि कृष्ण स्वयं उनका वध करे । इस समय अर्जुन को पता नहीं है कि कृष्ण पहले ही उन्हें मार चुके है वो तो केवल निमित मात्र है । यह भगवान की योजना थी कि इन सबका वध हो । भगवान किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा से क्षमा कर सकते है किन्तु यदि कोई उनके भक्तों को हानि पहुंचाता है तो वे उसे क्षमा नहीं करते । इसलिए भगवान इन दुराचारियों का वध करने के लिए उद्धत थे यधपी अर्जुन उन्हें क्षमा करना चाहता था । यह भगवत गीता सीरीज का अंग है आप पहले के श्लोक मेरी पिछली पोस्ट में जाकर देख सकते हैं, और आगे के भाग के लिए कृपया मेरे साथ बने रहे । . . . . . #radheradhe🙏 #krishanleela #bhagwadgitachanting #bhagwatgita #bhagwadgitalearnings #krishnaconsciousness #geetasaar #geetadarshan #geetashlok #series #readmorebooks #fallforbooks #bookworm #hindimotivation #hindisanskrit #sanskritshloka #hindi #translation #support #follow #like #save #beattheheat #share #tag #love #hustlers #hustlehard #readersofinstagram #spritualgrowth (at 마투라) https://www.instagram.com/p/CFhT_SCFxna/?igshid=6njrjh29rk53