यदि कुंडली में शनि नीच राशि में हो तो शनिदेव की नियमित पूजा अर्चना और शनि मंत्र जाप के माध्यम से नीचस्थ शनि की शुभता को बढ़ाया जा सकता है.
सौरमंडल के नौ ग्रहों में से शनि को शक्तिशाली, बलवान व क्रूर ग्रह माना जाता है. मानवीय जीवन पर शनि का व्यापक व गहन प्रभाव पड़ता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि को भगवान सूर्य का पुत्र बताया गया है. शनि को दुःख, कष्ट, परेशानियां, गरीबी, रुकावट, बाधाएं, विलंब, जटिल रोग, अवसाद, मोक्ष, आध्यात्मिक ज्ञान, वैराग्य, परिश्रम, परिपक्वता, सहनशीलता आदि का कारक माना जाता है.









