महानवमी नवैद्य महाप्रसाद एवम् कन्या पूजन
मां सिद्धिदात्री जो की सर्व सिद्धि की अधिष्ठात्री हैं, जो पूर्ण आद्याशक्ति स्वरूपा एवम साक्षात महाकाल महादेव की शक्ति का स्त्रोत्र हैं , अर्धनारीश्वर रूप से भगवान शिव के साथ इस सृष्टि का संस्थापन करती हैं
सर्व स्वरूप सर्वेशी सर्व शक्ति समन्विते की आधारभूता महादेवी सिद्धिदात्री को नवैद्य स्वरूप गुड़ , तिल एवम काले चने , पूरी हलवा का भोग मुख्य रूप से लगता है । कन्या पूजन में इसके साथ ही खीर की भी परंपरा रही है । अतैव मनसा आज मां को यही भोग स्वरूप समर्पित है ।
भोग हेतु
तिल्ली गुड़ की बर्फी
एवम् हलवा पूरी चना
तथा खीर
कन्या पूजन
साथ में छोटे छोटे भैरव गणपति बजरंगबली रूपी बालक
पग पखारन एवम अगवानी
पग पूजन एवम चुनरी श्रृंगार
कन्या भोज
जल सेवा
प्रसाद वितरण
बिदाई एवम उपहार
पुनरागमन का निवेदन करते हैं
यह पूजा यथाशक्ति जिस प्रकार संभव हुई , मां को समर्पित करते हैं और भूल चूक ज्ञात अज्ञात त्रुटियों के लिए क्षमा मांगते हैं 🙏🏻 मां से निवेदन है की हम पर प्रसन्न हो हमें अपनी छत्रछाया में लें और सर्व प्रकार से हमारी रक्षा करने की कृपा करें 🙏🏻
ब्रहमार्पणं ब्रहमहविर्ब्रहमाग्नौ ब्रहमणा हुतम्।
ब्रहमैव तेन गन्तव्यं ब्रहमकर्मसमाधिना ॥
ॐ सह नाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्विनावधीतमस्तु।
मा विद्विषावहै ॥
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥
क्षमा प्रार्थना
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥१॥
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥२॥ (आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनं। स्तवनं चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥)
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि। यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥३॥
अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत्। यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रह्मादयः सुराः॥४॥
सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके। इदानीमनुकम्प्योऽहं यथेच्छसि तथा कुरू॥५॥
अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम्। तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि॥६॥
कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे। गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरि॥७॥
गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम्। सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादात्सुरेश्वरि॥८॥ प्रसीद भगवत्यम्ब प्रसीद भक्तवत्सले । प्रसादं कुरु मे देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥९॥
जय मांअंबे जय मां दुर्गे जय आद्याशक्ति मां जय सिद्धिदात्री मां
जय गजानन महाराज जय भैरव नाथ , जय विश्वेश्वर महादेव
















