उत्तराखंड का नाम उत्तराखंड क्यों पड़ा ?
उत्तराखंड का गठन
पृथक राज्य की मांग को लेकर कई वर्षों तक चले एक लम्बे आंदोलन के बाद ९ नवम्बर २००० को उत्तराखंड राज्य का गठन भारत के २७ वें राज्य के रूप में हुआ | प्रारंभ में इसका नाम उत्तरांचल था | वर्ष २००० से २००६ तक इसका नाम उत्तरांचल रहा | १ जनवरी २००७ से उत्तरांचल का नाम बदल कर उत्तराखंड कर दिया गया |
उत्तराखंड नाम का अर्थ
उत्तराखंड का अर्थ कई लोग उत्तर दिशा में स्थित भू-खंड या भू-भाग समझते हैं | लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि राज्य का नाम उत्तरखंड नहीं है | यदि हम उत्तराखंड का संधि विच्छेद करें तो यह उत्तरा + खंड होगा | जिसका अर्थ है उत्तरा का खंड अर्थात् उत्तरा से सम्बंधित भू-खंड या भू-भाग |
उत्तराखंड नामकरण के पीछे की पौराणिक कहानी
महाभारत काल में उत्तराखंड भू-भाग पर राजा विराट राज्य करते थे | उनकी राजधानी कत्यूरकालीन बैराठ (गेवाड) थी | महाभारत की कथा के अनुसार पाँचों पांडवों और उनकी भार्या द्रौपदी ने राजा विराट के राज्य में रहकर अपना अज्ञातवास पूरा किया था | अज्ञातवास पूर्ण होने के पश्चात जब पांडव अपने असली रूप में राजा विराट के सामने आए तो राजा विराट ने उनका भव्य आदर सत्कार किया और अर्जुन के साथ अपनी पुत्री उत्तरा का विवाह प्रस्ताव रखा | किन्तु अर्जुन ने इस प्रस्ताव को मना कर दिया | क्योंकि बृहनल्ला के रूप में अर्जुन उत्तरा के संगीत शिक्षक थे और वे उत्तरा के साथ गुरु-शिष्या के पवित्र बंधन में बंध गए थे | वे उत्तरा को अपनी पुत्री समान समझते थे | इसलिए वे उत्तरा से विवाह नहीं कर सकते थे | लेकिन राजा विराट के स्नेह और आग्रह को देखते हुए उन्होंने राजा से कहा वे उत्तरा को अपनी पुत्रवधू स्वीकार कर सकते हैं | अर्जुन के इस सुझाव पर विराट राज ने अपनी पुत्री उत्तरा का विवाह अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु से कर दिया | राजा विराट ने हिमालय का यह राज्य अपनी पुत्री उत्तरा को यौतुक (दहेज़) में दे दिया | इस राज्य को उत्तरा का स्त्रीधन (दायभाग) या दहेज धन माने जाने के कारण ही इसका नाम उत्तराखंड पड़ा और तभी से यह भू-खंड उत्तराखंड कहा जाने लगा | Read the full article












