खुर्पाताल एक अद्भुत सुंदर और 'रहस्यमयी झील'।
खुर्पाताल की भौगोलिक स्थिति
खुर्पाताल खुर्पाताल उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित एक सुन्दर एवं लोकप्रिय पर्यटक स्थल है। यह झील समुद्रतल से 1635 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। खुर्पाताल ऊंचे चीड़ और देवदार के पेड़ों से घिरा हुआ है। जो पहाड़ो की भव्य सौन्दर्यता को प्रस्तुत करता है। प्रकृति का यह सुंदर नजारा नैनीताल से सिर्फ 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
खुर्पाताल नाम कैसे पड़ा
नैनीताल से कालांढूगी रोड पर खुर्पाताल नाम का एक खूबसूरत गांव बसा है। गांव के मुख्य आकर्षण गांव के सीढ़ीदार खेत एवं यह कुदरती झील हैं। यह ताल स्थानीय निवासियों के मुताबिक खुर्पाताल गांव पट्टी कुर्पाखा के अंतर्गत आता है। पूर्व में अंग्रेज कुर्पाखा बोलते-बोलते इसे खुर्पा कहने लगे और तब से ही इस झील को खुर्पाताल कहा जाने लगा। इस झील की आकृति घोड़े के खुर के समान दिखती है इसलिए भी लोग इसे खुर्पाताल कहते हैं।
बेहद खूबसूरत है खुर्पाताल गांव
खुर्पाताल गांव यह गांव चारों तरफ से ऊंची-ऊंची और हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा है। सुंदर झील, प्राकृतिक सौंदर्य और ऊंचे-ऊंचे देवदार तथा पाइन के वृक्ष इस गांव की विशेषतायें हैं। इस गांव का मुख्य आकर्षण हैं यहां के फल व सब्जियों से लदे हरे-भरे सीढ़ीनुमा खेत, सर्पिल आकार के रास्ते या सड़कें जिनसे होकर खुर्पाताल गांव तक पहुंचा जा सकता है।
खुर्पाताल गांव के लोगों का व्यवसाय
19 वीं शताब्दी में यहाँ लोहे के औजार बड़ी मात्रा में बनाये जाते थे, जिन्हें खरीदने के लिए लोग दूर दूर से खुर्पाताल पहुंचते थे। लेकिन समय बदला और इसके साथ-साथ यहां पर लोहे के औजार बनने बंद हो गए। अब यह जगह हरी सब्जियों, पहाड़ी अनाज, पहाड़ी फल-फूल आदि के लिए प्रसिद्ध है।
अंग्रेज शासकों की पसंदीदा जगह रही खुर्पाताल
खुर्पाताल यह जगह आज से ही नहीं, बल्कि ब्रिटिश काल से ही एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में मशहूर है। अंग्रेज शासकों के लिए तो यह समय बिताने की सबसे सुंदर व पसंदीदा जगहों में से एक थी।
रंग बदलने वाली 'रहस्यमयी झील'
आधा किलोमीटर व्यास वाली यह झील चारों ओर से पहाड़ियों से घिरी है। इसका रंग दूर से हल्का हरा दिखाई देता है, लेकिन सालभर में यह झील अपना रंग बदलती रहती है। इसीलिए इसे 'रहस्यमयी झील' भी कहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस झील का रंग भविष्य का संकेत देता है। जैसे- हल्का लाल रंग, विपदा आने का संकेत है। मार्च महीने में इसका रंग धानी हो जाता है, जो यहां के लोगों के मुताबिक खुशहाली का प्रतीक है। मार्च-अप्रैल के महीने में यहां पाइन्स के फूल गिरते हैं, जिसकी वजह से झील के रंग में थोड़ा बहुत बदलाव आता है। पेड़ों की परछाई पड़ने से भी इसमें हरा रंग महसूस होता है। वैसे तो इन रंगों के पीछे अनेक मान्यताएं हैं, लेकिन इसके पीछे एक वैज्ञानिक तथ्य भी मौजूद है। दरअसल झील के अंदर करीब 35 से 40 प्रकार के शैवाल यानि एल्गी की प्रजातियां मौजूद हैं। जब एल्गी बीज छोड़ती है तो सूरज की किरणों की वजह से इसमें अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं। इस झील का पानी साफ और गर्म रहता है, इसलिए इसे गर्म पानी वाला झील भी कहते हैं। खास बात यह है कि इस झील का पानी सर्दियों के मौसम में भी हल्का गुनगुना रहता है।
मछुआरों का स्वर्ग है यह झील
खुर्पाताल खुर्पाताल पर्यटकों के बीच न केवल अपनी अद्भुत सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह मछली पकड़ने के शौकीन लोगों के लिए भी पसंदीदा जगह है। यहां पर काफी मात्रा में मछलियां पाई जाती हैं। यहां पर मछली पकड़ने के शौकीन लोग अपना शौक पूरा करने के लिए पहुंचते हैं और दिन भर झील किनारे बैठ कर मछली पकड़ने का आनंद लेते हैं।
खुर्पाताल की सुंदरता
प्रकृति की गोद में बसा, सुंदर हरियाली से घिरा हुआ यह ताल बहुत ही मनमोहक है। यह ताल पाइन और ओक के जंगलों से घिरा हुआ है। इस झील का वातावरण बहुत ही शान्त है। यह झील पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है क्योंकि इस झील की सुन्दरता देखते ही बनती है।
खुर्पाताल क्षेत्र में है निर्माण प्रतिबंधित
नवंबर 2016 में माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड ने कई झीलों को “इको सेंसेटिव जोन” घोषित करने का आदेश दिया था। जिसके आदेशानुसार कुछ झीलों के 2 से 5 किलोमीटर के परिधि क्षेत्र के अंदर पेड़ों की कटाई नहीं की जा सकती है और न ही किसी भी प्रकार का नया निर्माण कार्य किया जा सकता है। यानि पेड़ों की कटाई व निर्माण कार्य दोनों ही प्रतिबंधित हैं। खुर्पाताल झील को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया है। इसीलिए यहां पर किसी भी तरह के पेड़ों की कटाई नहीं की जाती है तथा किसी भी नए भवन इत्यादि का निर्माण नहीं किया जाता है।
खुर्पाताल में क्या करें
फिशिंग- इस जगह को एंगलर्स यानि मछुआरों का स्वर्ग कहा जाता है। यह झील अलग-अलग तरह की मछलियों के लिए प्रसिद्ध है। ट्रैकिंग- आप नैनीताल शहर से खुर्पाताल तक ट्रैक कर सकते हैं और यहां की सुंदरता को करीब से एक्सप्लोर कर सकते हैं।
खुर्पाताल
खुर्पाताल जाने का सही समय
वैसे तो साल भर में कभी भी आप खुर्पाताल जा सकते हैं, लेकिन फिर भी अक्टूबर से मई के बीच जाना ज्यादा अच्छा है। बता दें कि ठंड के दिनों में स्नोफॉल के कारण यहां का तापमान बहुत कम हो जाता है और बरसात के दिनों में भारी बारिश के चलते यहां की यात्रा करना मुश्किल होता है। Read the full article













