'कारीगरी कलम की' प्रस्तुत करते हैं, 'हमारे पिटारे से' सीरीज में ; अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश के कवि उत्कर्ष द्विवेदी जी की एक कविता। आप भी पढें और कमेन्ट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दें, विशेष रूप से लखनऊ वालों ;आप... 😊💫🌻 किस्मत की क्या बात बताए, सपनों को कब तक भरमाए भाग रही दुनिया ये लेकिन, रिश्तों को कैसे झुठलाए निकल रही है रेत हाथ से, दिन हर रोज निकल जाते हैं इसी जगह से दौड़ लगाकर, इसी जगह पर फिर आते हैं। सपना पीछे छूट रहा है, सबसे नाता टूट रहा है। नई नई आशाओ का अब, दामन हमसे छूट रहा है। रुकने का तो नाम नहीं है, बिना थके विश्राम नहीं है रोज नई असफलता आती, किस्मत को कुछ काम नहीं है। ✍️उत्कर्ष द्विवेदी LIKE | COMMENT | SHARE | AND FOLLOW THE PAGE @karigari_kalam_ki रोचक रचनाओं को पढ़ने के कृपया पेज को जरूर फॉलो करें 😊💫🌻 @karigari_kalam_ki #utkarsh #hindikavita #hindiwriter #hindisahitya #newhindi #newpost❤ #viralpoetry #poetrystatus #karigari_kalam_ki #ankuraanandit #karigarikalamki #newshayari #hindipoem #newpoet #newpoetry (at लखनऊ उत्तर प्रदेश) https://www.instagram.com/p/CZa6vT4pfUp/?utm_medium=tumblr













