नीविया - सीप का मोती नीविया
दुनिया के बाजार में एक ब्रांड का स्थापित करना उतना ही कठिन काम है जितना कि मोतीवाली सीप खोजना। नीविया ब्रांड की संघर्ष गाथा सच्चाई को बयाँ करती है। यह ब्रांड बना, खत्म हुआ और फिर से जिंदा हुआ। नीविया की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। यह लगभग सन् 1875-80 की बात है। जर्मन दुनिया की बड़ी औद्योगिक शक्ति के रूप में उभर रहा था। सैकड़ों जर्मन वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशालाओं में दिन-रात खपाकर ऐसी ईजादें कर रहे थे, जिनपर बाकी दुनिया या तो हैरान थी या ईर्ष्या कर रही थी। इन्हीं वैज्ञानिकों में से एक थे फार्मासिस्ट कार्ल पॉल बीयर्सडॉर्फ। बीयर्सडॉर्फ उत्तरी जर्मनी के एल्बे नदी के किनारे बसे शहर हैंबर्ग में रहते थे। चिकित्सा-विज्ञान की खोजों को लेकर उनका जुनून उनकी खूबी बन गया था। एक दड़बेनुमा कमरे की अपनी लैब में बीयर्सडॉर्फ मेडिकल साइंस खासकर घाव पर लगाई जानेवाली पट्टियों या प्लास्टर पर नित नए प्रयोग करते रहते थे। To read more, visit www.speakinedit.com Read the full article









