"नोटबंदी: संगठित लूट और कानूनी डाका थी"
“नोटबंदी: संगठित लूट और कानूनी डाका थी”
वे भले कम बोले, लेकिन झूठ कभी नहीं बोले। जब प्रधानमंत्री थे तब भी और जब पद से हट गए तब भी। वे पद पर रहते हुए भी झूठ के शिकार हुए लेकिन शांत रहे। उनके दामन पर कोई दाग नहीं था, लेकिन कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने अपने मंत्रियों तक को जेल भेज दिया था। बाद में टूजी जैसे बहुचर्चित घोटाले झूठ साबित हुए। हालांकि, वे विचलित नहीं हुए। रैली में रोए नहीं। नाटक नहीं किया। धैर्य के साथ बहादुर की तरह…
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