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PHYSICAL APPEARANCE IS NOT ONLY THE THING YOU NEED TO WORRY ABOUT, IT'S ALSO ABOUT HIDDEN APPEARANCE
That’s me
I hate feeling like I’m not attractive, I also hate feeling like I need to be attractive, I am working on excepting my faults and flaws, regardless of how you see me, I see myself how I see myself and it is very hard to change one’s perspective, very hard but not impossible. #physicalappearance #looksarenteverything #iamnotugly (at Rexdale) https://www.instagram.com/p/Ck1VaiGPuOf/?igshid=NGJjMDIxMWI=
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राजस्थान सामान्य ज्ञान-राजस्थान की स्थिति विस्तार आकृति एवं भौगोलिक स्वरूप.
राजस्थान की स्थिति विस्तार आकृति एवं भौगोलिक स्वरूप.
राजस्थान की स्थिति विस्तार आकृति एवं भौगोलिक स्वरूपराजस्थान भारत के उत्तर पश्चिम में स्थित हैं तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद है। इसका क्षेत्रफल 34223 9 वर्ग किलोमीटर है। जो भारत के कुल क्षेत्रफल का 10% है। राजस्थान पूर्व में गंगा यमुना नदियों के दक्षिण में मालवा का पठार उत्तर पश्चिम में सतलज व्यास नदियों के मैदान द्वारा तथा पश्चिम में पाकिस्तान से गिरा हुआ है। राजस्थान का भौगोलिक स्वरूप अत्यधिक जैव विविधता पूर्ण है। जहां एक ओर विशाल मरूभूमि है। तो वहीं दूसरी ओर पहाड़ी एवं मैदानी भाग है। इस भू भाग का भौतिक स्वरूप, भूगर्भिक इतिहास में होने वाली आंतरिक शक्तियों तथा जलवायु से नियंत्रित बाह्य शक्तियों के सम्मिलित प्रभाव से उत्पन्न क्रियाओं का परिणाम हैं। यह भूखण्ड विश्व के प्राचीनतम भूखण्डों (गोंडवाना लैण्ड) का अवशिष्ट भाग है। राज्य के मध्य में उतर पूर्व भाग से दक्षिण पश्चिम तक फैली अरावली पर्वतमाला इसे जलवायु की एवं भू-धरातल की दृष्टि से दो असमान भागो में विभाजित करती हैं।Rajasthan Ki Sthiti Vistar Aakriti Aivam Geogrophical Swaroop Bhaarat Ke Uttar Pashchim Me Sthit Hain Tatha Shetrafal Drishti Se Desh Ka Sabse Bada Rajya Madhy Pradesh Chattishgadh Alag Hone Baad Hai । Iska 34223 9 Warg Kilometer Jo Kul 100th Poorv Ganga Yamuna Nadiyon Dakshinn Malwa Pathar Satluj Vyas Maidan Dwara Pakistan Gira Hua Atyadhik Jaiv Vividhata Purnn Jahan Ek Or Vishal MaruBhumi To Wahin Doosri Pahadi Maidani Bhag I.
राजस्थान सामान्य ज्ञान-राजस्थान की भौगौलिक स्थिति.
राजस्थान की भौगौलिक स्थिति को निम्न प्रकार समझा जा सकता है।स्थिति 23 ’3’ उतरी अक्षांश से 30 ’12’ उतरी अक्षांश (अक्षांशीय विस्तार 7 ’9 ’) तथा 69 ’30’ पूर्वी देशान्तर से 78 ’17’ पूर्वी देशान्तर (विस्तार 8 ’47) के मध्य स्थित राजस्थान का अधिकांश भाग कर्क रेखा (231/2’ कर्क रेखा अर्थात 23 0 30’ उतरी अक्षांश रेखा के उतर में स्थित है। कर्क रेखा राज्य में डूंगरपुर जिले की दक्षिणी सीमा से होती हुई बाँसवाड़ा जिले के लगभग मध्य से गुजरती हैं। बाँसवाड़ा शहर कर्क रेखा से राज्य का सर्वाधिक नजदीक स्थित शहर है। जलवायु की दृष्टि से राज्य का अधिकांश भाग उपोष्ण या शीतोष्ण कटिबन्ध में स्थित है।विस्तारः- उत्तर से दक्षिण तक लम्बाई 826 कि. मी. व विस्तार उत्तर में कोणा गाँव (गंगानगर) से दक्षिण में बोरकुण्ड गाँव (कुशलगढ़, बांसवाड़ा) तक है।पूर्व से पश्चिम तक चौड़ाई 869 कि. मी. व विस्तार पूर्व में सिलाना गाँव (राजाखेड़ा, धौलपुर) से पश्चिम में कटरा (फतेहगढ़,सम, जैसलमेर) तक है।आकृति विषमकोणीय चतुर्भुज या पतंग के समान.
Rajasthan Ki Geogrophical Sthiti Ko Nimn Prakar Samjha Jaa Sakta Hai । tabline 23 3 Uttari Akshansh Se 30 12 Akshanshiy Vistar 7 9 Tatha 69 30 Poorvi Deshantar 78 17 8 47 Ke Madhy Sthit Ka Adhikansh Bhag Kark Rekha 231 2 Arthaat 0 Utar Me Rajya Dungarapur Jile Dakshinni Seema Hoti Hui BansWada Lagbhag Gujarti Hain Shahar Sarwaadhik Najdik Jalwayu Drishti Uposhnn Ya Sheetoshn Katibandh Vistar: - Uttar Dakshinn Tak Lambai 826.
2.राजस्थान सामान्य ज्ञान-राजस्थान की स्थलीय सीमाएं.
राजस्थान की स्थलीय सीमाएं स्थलीय सीमा 5920 कि.मी. (1070 अन्तर्राष्ट्रीय व 4850 अंतरराज्यीय) जो निम्न प्रकार विस्तृत है-
उतर में
पंजाब (89 कि.मी) राजस्थान के दो जिलो की सीमा पंजाब से लगती है।तथा पंजाब के दो जिले फाजिल्का व मुक्तसर की सीमा राजस्थान से लगती है। पंजाब के साथ सर्वाधिक सीमा श्री गंगानगर व न्यूनतम सीमा हनुमानगढ़ की लगती है। पंजाब सीमा के नजदीक जिला मुख्यालय श्री गंगानगर तथा दूर जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ हैं। पंजाब सीमा पर क्षेत्रफल में बड़ा जिला श्री गंगानगर व छोटा जिला हनुमानगढ़ है।
उतर पूर्व में
हरियाणा (1262 कि.मी.) राजस्थान के 7 जिलों की सीमा हरियाणा के 7 जिलों (सिरसा, फतेहबाद, हिसार, भिवाणी, महेन्द्रगढ़, रेवाडी, मेवात) से लगती है। हरियाणा के साथ सर्वाधिक सीमा हनुमानगढ़ व न्युनतम सीमा जयपुर की लगती है।तथा सीमा के नजदीक जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ व दूर मुख्यालय जयपुर का हैं। हरियाणा सीमा पर क्षेत्रफल में बड़ा जिला चुरू व छोटा जिला झुंझुनू है। मेवात (नुह) नवनिर्मित जिला है।जो राजस्थान के अलवर जिले को छूता है।
पूर्व
उत्तरप्रदेश (877 कि.मी.) राजस्थान के दो जिलों की सीमा उत्तरप्रदेश के दो जिलों (मथुरा व आगरा) से जगती है। उत्तरप्रदेश के साथ सर्वाधिक सीमा भरतपुर व न्युनतम धौलपुर कि लगती है।उत्तरप्रदेश की सीमा के नजदीक जिला मुख्यालय भरतपुर व दूर जिला मुख्यालय धौलपुर है। उत्तरप्रदेश की सीमा पर क्षेत्रफल में बड़ा जिला भरतपुर व छोटा जिला धौलपुर है।
दक्षिण पूर्व
मध्यप्रदेश (1600 कि.मी.) राजस्थान के 10 जिलों की सीमा मध्यप्रदेश के 10 जिलों की सीमा से लगती है।(झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, नीमच, अगरमालवा, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, श्यौपुर, मुरैना) मध्यप्रदेश के साथ सर्वाधिक सीमा झालावाड़ व न्यूनतम भीलवाड़ा की लगती है।तथा सीमा के नजदीक मुख्यालय धौलपुर व दूर जिला मुख्यालय भीलवाड़ा है।मध्यप्रदेश की सीमा पर क्षेत्रफल में बड़ा जिला भीलवाड़ा व छोटा जिला धौलपुर है।
दक्षिण पश्चिम
गुजरात (1022 कि.मी.) राजस्थान के 6 जिलों की सीमा गुजरात के 6 जिलों से लगती है। (कच्छ, बनासकांठा, साबरकांठा, अरावली, माहीसागर, दाहोद) गुजरात के साथ सर्वाधिक सीमा उदयपुर व न्युनतम सीमा बाड़मेर की लगती है।तथा सीमा के नजदीक जिला मुख्यालय डुंगरपुर व दूर मुख्यालय बाड़मेर है। गुजरात सीमा पर क्षेत्रफल में बड़ा जिला बाडमेर व छोटा जिला डुंगरपुर है। राजस्थान के पांच पडौसी राज्य है।- पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात। सबसे कम अंतरराज्यीय सीमा बनाने वाला जिला बाडमेर व अधिक झालावाड़ बनाता है। सन् 1800 में जॉर्ज थामसन ने सर्वप्रथम इस भू-प्रदेश को राजपुताना नाम दिया सन् 1829 में कर्नल जेम्सटॉड ने अपनी पुस्तक द एनल्स एण्ड एन्टीक्यूटीज ऑफ राजस्थान में हमारे इस राज्य के लिए राजस्थान, रायथान, रजवाडा नाम दिया था।
पश्चिम
पाकिस्तान (पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का बहावलपुर जिला व सिन्ध प्रान्त का खैरपुर व मीरपुर खस जिले -3 जिले सीमा पर बाङमेर, जैसलमेर, बिकानेर व गंगानगर – 4 जिले) सीमा पर बाङमेर जैसलमेर बिकानेर गंगानगर – 4 जिले इस अन्तर्राष्ट्रीय सीमा रेखा का नाम रेडक्लिफ रेखा है। यह राज्य में उत्तर में गंगानगर के हिंदुमल कोट से लेकर दक्षिण में बाड़मेर के बाखासर गाँव तक विस्तृत है। गंगानगर एवं बिकानेर का पाकिस्तानी सीमावर्ती जिला बहावलपुर है।
सर्वाधिक लम्बी सीमा अन्तर्राष्ट्रीय
– जैसलमेर अंतरराज्यीय झालावाङ की सबसे लम्बी सीमा है। जो मध्यप्रदेश से लगती है।
सबसे कम लम्बी सीमा अन्तर्राष्ट्रीय बिकानेर अंतरराज्यीय बाङमेर जिले की, जो गुजरात की सर्वाधिक लम्बी अंतरराज्यीय सीमा उदयपुर जिले से लगती है।
राज्य की सबसे कम लम्बी अन्तर्राज्यीय सीमा पंजाब राज्य से लगती है..
राज्य की सर्वाधिक लम्बी अन्तर्राज्यीय सीमा मध्यप्रदेश से मिलती है।
सीमावर्ती जिले अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित श्री गंगानगर, बिकानेर, जैसलमेर, बाङमेर
अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित जिले (23) बाङमेर जालौर सिरोही उदयपुर बाँसवाड़ा डुंगरपुर चित्तौड़गढ़ प्रतापगढ भीलवाङा कोटा झालावाङ बारां सवाईमाधोपुर करौली धौलपुर भरतपुर अलवर जयपुर सीकर झुन्झुनू चुरू हनुमानगढ एवं श्रीगंगानगर श्रीगंगानगर की 204 किमी सीमा पाकिस्तान से लगती है। तथा 115 किमी पंजाब से लगती है..
सीमावर्ती चारों जिलों में से अन्तर्राष्ट्रीय सीमा (पाकिस्तानी सीमा या रेडक्लिफ लाइन) के सर्वाधिक निकट शहर श्रीगंगानगर व सर्वाधिक दूर शहर बिकानेर है।
उत्तरप्रदेश से सबसे कम लम्बी सीमा धौलपुर जिले से लगती है। तथा भरतपुर की सबसे अधिक मध्यप्रदेश से सर्वाधिक अन्तर्राज्यीय सीमा झालावाङ की एवं न्यूनतम भीलवाङा जिले की लगती है।
पाली जिले की सीमा सर्वाधिक 8 जिलों अजमेर बाङमेर जालौर जोधपुर नागौर राजसमंद सिरोही व उदयपुर से मिलती है।
बाङमेर ऐसा जिला है। जिसकी सीमा पाकिस्तान से अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से मिलती है। एवं गुजरात से अन्तर्राज्यीय सीमा भी मिलती है। इसी प्रकार गंगानगर जिले की सीमा पाकिस्तान तथा पंजाब दोनो से मिलती है।
पंजाब राज्य से सबसे कम लम्बी सीमा हनुमानगढ जिले की सर्वाधिक श्रीगंगानगर जिले से मिलती है।
हरियाणा राज्य से सर्वाधिक लम्बी सीमा हनुमानगढ जिले की तथा सर्वाधिक श्रीगंगानगर जिले की मिलती है।
हरियाणा राज्य से सर्वाधिक लम्बी सीमा हनुमानगढ जिले की व न्यूनतम जयपुर जिले की लगती है।
अन्तर्वर्ती जिले 8 पाली जोधपुर नागौर दौसा टोंक बूंदी अजमेर व राजसमंद इन जिलों की सीमा किसी भी अन्य राज्य या अन्य देश से नहीं मिलती है।
जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बङा जिला जयपुर एवं सबसे छोटा जिला जैसलमेर है। एवं क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बङा जैसलमेर एवं सबसे छोटा धौलपुर है।Rajasthan Ki Sthaliya Seemayein Seema 5920 Mee 1070 International Wa 4850 Interstate Jo Nimn Prakar Vistrit Hai । - Utar Me tabline Punjab 89 Ke Do Jilon Se Lagti Tatha Jile Fajilka MuktSar Sath Sarwaadhik Shri GangaNagar Nyoontam Hanumangarh Najdik Zila Mukhyalaya Door Hain Par Shetrafal Bada Chhota Poorv Hariyana 1262 7 Zilon Sirsa FatehBaad Hisar Bhiwani MahendraGadh Rewadi Mewat Nyuntam Jaipur Ka Churu Jhunjhunu Nuh Navnirmit.
3.
राजस्थान के भौतिक विभाग
पृथ्वी अपने निर्माण के प्रारम्भिक काल में एक विशाल भू-खण्ड पैंजिया तथा एक विशाल महासागर पैंथालासा के रूप में विभक्त था कालान्तर में पैंजिया के दो टुकडे़ हुए उत्तरी भाग अंगारालैण्ड तथा दक्षिणी भाग गोडवानालैण्ड के नाम जाना जाने लगा। तथा इन दोनों भू-खण्डों के मध्य का सागरीय क्षेत्र टेथिस सागर कहलाता है। राजस्थान का पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्र तथा उसमें स्थित खारे पानी की झीलें टेथिस सागर का अवशेष है। जबकि राजस्थान का मध्य पर्वतीय प्रदेश तथा दक्षिणी पठारी क्षेत्र गोडवानालैण्ड का अवशेष है।
राजस्थान को सामान्यतः चार भौतिक विभागों में बांटा जाता हैः-
1.पश्चिमी मरूस्थली प्रदेश
2.अरावली पर्वतीय प्रदेश
3.पूर्वी मैदानी प्रदेश
4.दक्षिणी पूर्वी पठारी भाग
Rajasthan Ke Bhautik Vibhag Prithvi Apne Nirmann Prarambhik Kaal Me Ek Vishal Bhu - Khannd Panzia Tatha Mahasagar Panthalasa Roop Vibhakt Tha Kalantar Do Tukde Hue Uttari Bhag AngaraLand Dakshinni GodawanaLand Naam Jana Jane Laga । In Dono Khando Madhy Ka Sagariy Shetra Tethis Sagar Kehlata Hai Pashchimi Registani Usme Sthit Khare Pani Ki Jhilen Avashesh Jabki Parvatiya Pradesh Pathari Ko Samanyat Char Vibhagon Banta Jata Hain 1.
1.पश्चिमी मरूस्थली प्रदेश राजस्थान का अरावली श्रेणीयों के पश्चिम का क्षेत्र शुष्क एवं अर्द्धशुष्क मरूस्थली प्रदेश है। यह एक विशिष्ठ भौगोलिक प्रदेश है। जिसे भारत का विशाल मरूस्थल अथवा थार का मरूस्थल के नाम से जाना जाता है। थार का मरूस्थल विश्व का सर्वाधिक आबाद तथा वन वनस्पति वाला मरूस्थल है। ईश्वरी सिंह ने थार के मरूस्थल को रूक्ष क्षेत्र कहा है। राज्य के कुल क्षेत्रफल का 61 प्रतिशत है। इस क्षेत्र में राज्य की 40 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र से होकर सरस्वती नदी बहती थी। सरस्वती नदी के प्रवाह क्षेत्र के जैसलमेर जिले के चांदन गांव में चांदन नलकूप की स्थापना कि गई है। जिसे थार का घड़ा कहा जाता है। इसका विस्तार बाड़मेर, जैसलमेर, बिकानेर, जोधपुर, पाली, जालोर, नागौर,सीकर, चुरू झुंझुनू, हनुमानगढ़ व गंगानगर 12 जिलों में है। सम्पूर्ण पश्चिमी मरूस्थलीय क्षेत्र समान उच्चावचन नहीं रखता अपितु इसमें भिन्नता है। इसी भिन्नता के कारण इसको 4 उपप्रदेशों में विभक्त किया जाता है..- 1.शुष्क रेतीला अथवा मरूस्थलीय प्रदेश 2.लूनी- जवाई बेसीन 3.शेखावाटी प्रदेश 4.घग्घर का मैदान
1 शुष्क रेतीला अथवा मरूस्थलीय प्रदेश
यह वार्षिक वर्षा का औसत 25 सेमी. से कम है। इसमें जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर एवं जोधपुर और चुरू जिलों के पश्चिमी भाग सम्मलित है। इन प्रदेश में सर्वत्र बालुका - स्तूपों का विस्तार है।
पश्चिमी रेगिस्तान क्षेत्र के जैसलमेर जिले में सेवण घास के मैदान पाए जाते है। जो कि भूगर्भीय जल पट्टी के रूप में प्रसिद्ध है। जिसे लाठी सीरीज कहलाते है।
पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्र के जैसलमेर जिले में लगभग 18 करोड़ वर्ष पुराने वृक्षों के अवशेष एवं जीवाश्म मिले है। जिन्हें "अकाल वुड फॉसिल्स पार्क" नाम दिया है। पश्चिमी रेगिस्तान क्षेत्र के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर जिलों में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैसों के भंडार मिले है।
2 लूनी - जवाई बेसीन
यह एक अर्द्धशुष्क प्रदेश है। जिसमें लूनी व इसकी प्रमुख नदी जवाई एवं अन्य सहायक नदियां प्रवाहित होती है। इसका विस्तार पालि, जालौर, जोधपुर व नागौर जिले के दक्षिणी भाग में है। यह एक नदी निर्मित मैदान है। जिसे लूनी बेसिन के नाम से जाना जाता है।
3 शेखावाटी प्रदेश
इसे बांगर प्रदेश के नाम से जाना जाता है। शेखावटी प्रदेश का विस्तार झुझुनूं, सीकर, चुरू तथा नागौर जिले के उतरी भाग में है। इस प्रदेश में अनेक नमकीन पानी के गर्त (रन) हैं जिसमें डीडवाना, डेगाना, सुजानगढ़, तालछापर, परीहारा, कुचामन आदि प्रमुख है।
4 घग्घर का मैदान
गंगानगर हनुमानगढ़ जिलों का मैदानी क्षेत्र का निर्माण घग्घर के प्रवाह क्षेत्र के बाढ़ से हुआ है।1 Pashchimi Marusthali Pradesh Rajasthan Ka Arawali Shreniyon Ke Pashchim Shetra Shushk Aivam ArddhShushk Hai । Yah Ek Vishishth Geogrophical Jise Bhaarat Vishal Marusthal Athvaa Thar Naam Se Jana Jata Vishwa Sarwaadhik Aabad Tatha Van Vanaspati Wala Ishwari Singh ne Ko Ruksh Kahaa Rajya Kul Shetrafal 61 Pratishat Is Me Ki 40 Jansankhya Niwas Karti Pracheen Kaal Hokar Saraswati Nadi Bahti Thi Prawah Jaisalmer Jile Chandan Village
Arawali Hills and Mountain Area Parvatiya Pradesh
2.अरावली पर्वतीय प्रदेश
राज्य के मध्य अरावली पर्वत माला स्थित है। यह विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वत माला है। यह पर्वत श्रृंखला श्री केम्ब्रियन (पेलियोजोइक) युग की है। यह पर्वत श्रृंखला दक्षिण-पश्चिम से उतर-पूर्व की ओर है। इस पर्वत श्रृंखला की चौड़ाई व ऊंचाई दक्षिण -पश्चिम में अधिक है। जो धीरे -धीरे उत्तर-पूर्व में कम होती जाती है। यह दक्षिण -पश्चिम में गुजरात के पालनपुर से प्रारम्भ होकर उत्तर-पूर्व में दिल्ली तक लम्बी है। जबकि राजस्थान में यह श्रंखला खेड़ब्रहमा (सिरोही) से खेतड़ी (झुनझुनू) तक 550 कि.मी. लम्बी है। जो कुल पर्वत श्रृंखला का 80 प्रतिशत है।
अरावली पर्वत श्रंखला राजस्थान को दो असमान भागों में बांटती है। अरावली पर्वतीय प्रदेश का विस्तार राज्य के सात जिलों सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, जयपुर, दौसा और अलवर में। अरावली पर्वतमाला की औसत ऊँचाई समुद्र तल से 930 मीटर है। राज्य के कुल क्षेत्रफल का 9.3 प्रतिशत है। इस क्षेत्र में राज्य की 10 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।
2.अरावली पर्वतमाला को ऊँचाई के आधार पर तीन प्रमुख उप प्रदेशों में विभक्त किया गया है।
1. दक्षिणी अरावली प्रदेश
2. मध्यवर्ती अरावली प्रदेश
3. उतरी - पूर्वी अरावली प्रदेश
1.
दक्षिणी अरावली प्रदेश
इसमें सिरोही उदयपुर और राजसमंद सम्मिलित है। यह पूर्णतया पर्वतीय प्रदेश है। इस प्रदेश में गुरूशिखर (1722 मी.) सिरोही जिले में मांउट आबु क्षेत्र में स्थित है। जो राजस्थान का सर्वोच्च पर्वत शिखर है।
यहां की अन्य प्रमुख चोटियां निम्न है:-
सेर (सिरोही) -1597 मी. , देलवाडा (सिरोही) -1442 मी. , जरगा-1431 मी. , अचलगढ़- 1380 मी. , कुम्भलगढ़ (राजसमंद) -1224 मी.
प्रमुख दर्रे (नाल) -
जीलवा कि नाल (पगल्या नाल) - यह मारवाड से मेवाड़ जाने का रास्ता है।
सोमेश्वर की नाल विकट तंग दर्रा, हाथी गढ़ा की नाल कुम्भलगढ़ दुर्ग इसी के पास बना है। सरूपघाट, देसूरी की नाल (पाली) दिवेर एवं हल्दी घाटी दर्रा (राजसमंद) आदि प्रमुख है।
आबू पर्वत से सटा हुआ उड़िया पठार आबू से लगभग 160 मी. ऊँचा है और गुरूशिखर मुख्य चोटी के नीचे स्थित है। जेम्स टॉड ने गुरूशिखर को सन्तों का शिखर कहा जाता है। यह हिमालय और नीलगिरी के बीच सबसे ऊँची चोटी है।
2
मध्यवर्ती अरावली प्रदेश
यह मुख्यतया अजमेर जिले में फेला है। इस क्षेत्र में पर्वत श्रेणीयों के साथ संकरी घाटियाँ और समतल स्थल भी स्थित है। अजमेर के दक्षिणी पश्चिम में तारागढ़ (870 मी.) और पश्चिम में सर्पिलाकार पर्वत श्रेणीयाँ नाग पहाड़ (795 मी.) कहलाती है।
प्रमुख दर्रे
:- बर, परवेरिया, शिवपुर घाट, सुरा घाट, देबारी, झीलवाडा, कच्छवाली, पीपली, अनरिया आदि।
3.
उतरी - पूर्वी अरावली प्रदेश
इस क्षेत्र का विस्तार जयपुर, दौसा तथा अलवर जिले में है। इस क्षेत्र में अरावली की श्रेणीयाँ अनवरत न हो कर दूर - दूर हो जाती है। इस क्षेत्र में पहाड़ियों की सामान्य ऊँचाई 450 से 700 मी. है। इस प्रदेश की प्रमुख चोटियां:- रघुनाथगढ़ (सीकर) - 1055 मी. ,खोह (जयपुर) -920 मी. , भेराच (अलवर) -792 मी. , बरवाड़ा (जयपुर) -786 मी.।Arawali Parvatiya Pradesh Rajya Ke Madhy Parvat Mala Sthit Hai । Yah Vishwa Ki Pracheentam Valit Shrinkhla Shri Cambrian Paliozoic Yug Dakshinn - Pashchim Se Utar Poorv Or Is Chaudai Wa Unchai Me Adhik Jo Dhire Uttar Kam Hoti Jati Gujarat Palanapur Prarambh Hokar Delhi Tak Lambi Jabki Rajasthan Shrankhla खेड़ब्रहमा Sirohi Khetadi Jhujhunu 550 Mee Kul Ka 80 Pratishat Ko Do Asaman Bhagon Bantati Vistar Sat Zilon Udaipur RajSaman.
3.पूर्वी मैदानी प्रदेश.
अरावली पर्वत के पूर्वी भाग और दक्षिणी-पूर्वी पठारी भाग के दक्षिणी भाग में पूर्व का मैदान स्थित है..। यह मैदान राज्य के कुल क्षेत्रफल का 23.3 प्रतिशत है..। इस क्षेत्र में राज्य की 39 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है..। इस क्षेत्र में - भरतपुर, अलवर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, जयपुर, दौसा, टोंक, भीलवाडा तथा दक्षिण कि ओर से डुंगरपुर, बांसवाडा ओर प्रतापगढ जिलों के मैदानी भाग सम्मिलित है..। यह प्रदेश नदी बेसिन प्रदेश है.. अर्थात नदियों द्वारा जमा कि गई मिट्टी से इस प्रदेश का निर्माण हुआ है..। इस प्रदेश में कुओं द्वारा सिंचाई अधिक होती है..। इस मैदानी प्रदेश के तीन उप प्रदेश है..।
बनास- बाणगंगा बेसीन
चम्बल बेसीन
मध्य माही बेसीन
1 बनास- बाणगंगा बेसीन
बनास और इसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित यह एक विस्तृत मैदान है.. यह मैदान बनास और इसकी सहायक बाणगंगा, बेड़च, डेन, मानसी, सोडरा, खारी, भोसी, मोरेल आदि नदियों द्वारा निर्मित यह एक विस्तृत मैदान है.. जिसकी ढाल पूर्व की और है..।
2 चम्बल बेसीन
इसके अन्तर्गत कोटा, सवाईमाधोपुर, करौली तथा धौलपुर जिलों का क्षेत्र सम्मिलित है..। कोटा का क्षेत्र हाड़ौती में सम्मिलित है.. किंतु यहां चम्बल का मैदानी क्षेत्र स्थित है..। इस प्रदेश में सवाईमाधोपुर, करौली एवं धौलपुर में चम्बल के बीहड़ स्थित है..। यह अत्यधिक कटा- फटा क्षेत्र है.., इनके मध्य समतल क्षेत्र स्थित है..।
3 मध्य माही बेसीन या छप्पन का मैदान
इसका विस्तार उदयपुर के दक्षिण पूर्व से डुंगरपुर, बांसवाडा और प्रतापगढ़ जिलों में है..। माही मध्य प्रदेश से निकल कर इसी प्रदेश से गुजरती हुई खंभात कि खाडी में गिरती है..। यह क्षेत्र वागड़ के नाम से पुकारा जाता है.. तथा प्रतापगढ़ व बांसवाड़ा के मध्य भाग में छप्पन ग्राम समुह स्थित है..। इसलिए यह भू-भाग छप्पन के मैदान के नाम से भी जाना जाता है..।3 Poorvi Maidani Bhag Aravali Parvat Ke Aur Dakshinni - Pathari Me Poorv Ka Maidan Sthit Hai । Yah Rajya Kul Shetrafal 23 Pratishat Is Shetra Ki 39 Jansankhya Niwas Karti Bharatpur Alwar Dholpur Karauli Sawai Madhopur Jaipur Dausa Tonk BhilWada Tatha Dakshinn Or Se Dungarpur BansWada Prataapgarh Zilon Sammilit Pradesh Nadi Basin Arthaat Nadiyon Dwara Jama Gayi Mitti Nirmann Hua Kuon Irrigation Adhik Hoti Teen Up Banas BannGanga.
4.दक्षिणी पूर्वी पठारी भाग.
राज्य के कुल क्षेत्रफल का 9.6 प्रतिशत है। इस क्षेत्र में राज्य की 11 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। राजस्थान के इस क्षेत्र में राज्य के चार जिले कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ सम्मिलित है।इस पठारी भग की प्रमुख नदी चम्बल नदी है.. और इसकी सहायक नदियां पार्वती, कालीसिंध, परवन, निवाज, इत्यादि भी है। इस पठारी भाग की नदियाँ है। इस क्षेत्र में वर्षा का औसत 80 से 100 से.मी. वार्षिक है। राजस्थान का झालावाड़ जिला राज्य का सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला जिला है.. और यह राज्य का एकमात्र अति आर्द्र जिला है। इस क्षेत्र में मध्यम काली मिट्टी की अधिकता है। जो कपास, मूंगफली के लिए अत्यन्त उपयोगी है। यह पठारी भाग अरावली और विन्ध्याचल पर्वत के बीच "सँक्रान्ति प्रदेश" ( Transitional इमसज) है।
दक्षिणी-पूर्वी पठारी भाग को दो भागों में बांटा गया है।
हाडौती का पठार - कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़
विन्ध्यन कगार भूमि - धौलपुर. करौली, सवाईमाधोपुर.4 Dakshinn - Poorv Ka Pathari Bhag Rajya Ke Kul Shetrafal 9 6 Pratishat Hai । Is Shetra Me Ki 11 Jansankhya Niwas Karti Rajasthan Char Jile Kota Bundi Baran Jhalawad Sammilit Pramukh Nadi Chambal Aur Iski Sahayak Nadiyan Parvati Kalisindh Parvan Niwaj Ityadi Bhi Varsha Average 80 Se 100 Mee Vaarshik Zila Sarwaadhik Prapt Karne Wala Yah Ekmatra Ati Aadra Madhyam Kali Mitti Adhikta Jo Kapas Mungfali Liye Atyant Upyogi Aravali.
Great post from @craftingyourimage ... Crafting tip: Gentlemen the tie bar is a small detail that can have a big impact on your look. It’s meant to keep your tie fastened to your shirt. However placement is very important. A good rule of thumb is to fasten it between your third and fourth buttons. • • • • • #styling #stylist #gqinsider #dapperedman #physicalappearance #creativity #mensfashion #debonair #dapper #physicalappearance #communication #behavior #charlottenc #menswear #king #class #classy #classic #gqstyle #blackmen #blackmenstyle #craftingyourimage #fashion #mensfashionreview #imageconsulting #charlotteprofessionals #mensstyle #gentlemenstyle #gentleman #stylingtips https://www.instagram.com/websterstylemag/p/BjxKczhHD4Q/?utm_source=ig_tumblr_share&igshid=159t1tr1xw6v4