मेरी बहन पर मेरी एक छोटी कविता
संसार की उन तमाम बहनो के लिए जो भाईयो के लये अनगिनत दुआएँ करती ही रहती है ।मेरी छोटी से कविता से प्रणाम करता हूँ।
कौन सा छंद लिंखू ए बहन तेरे लिए , कौन सा गीत लिंखू ए बहन तेरे लिए , तू मेरे छन्दों की ,गीतो की शब्दसः बोली है , मेरी हर खुशियो की तू ही तो रंगोली है ,
तेरे बिना न पता ये मेरा खुशनुमा बचपन, खट्टा मीठा ये अल्हड रंगीन सा अपनापन, तूने ही तो चलना सिखलाया था मुझे, गिर के उठाना कैसे है समझाया था…
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