YSRCP Stage Dharna : శాసన మండలి ఛైర్మన్ గది ముందు వైఎస్సార్సీపీ సభ్యుల ధర్నా
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YSRCP Stage Dharna : శాసన మండలి ఛైర్మన్ గది ముందు వైఎస్సార్సీపీ సభ్యుల ధర్నా
తీన్మార్ మల్లన్న అరెస్ట్ అక్రమం. మరింత సమాచారం కోసం: https://bit.ly/2WGJoEM
इंदौर: भिखारी निकला करोड़पति, 2 साल से मंदिर के बाहर भीख मांग रहा, खुद के नाम बंगला, प्लॉट, नशे का है आदी
चैतन्य भारत न्यूज शराब की लत बर्बादी की कगार पर पहुंचा देती है। मध्य प्रदेश के इंदौर का ऐसा मामला सामने आया है। जिसके बारे में सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। दरअसल, इंदौर में निगमकर्मियों और जिला प्रशासन ने सड़कों पर पड़े वृद्धजनों और भिखारियों को उठाना शुरू किया। इस दौरान एक रमेश यादव नामक भिखारी करोड़पति निकला। बता दें देश के 10 शहरों को भिखारी मुक्त किए जाने वाले शहरों में इंदौर भी शामिल है। केंद्र सरकार की दीनबंधु पुनर्वास योजना के तहत भिक्षुकों और बेसहारा लोगों के लिए पंजाब अरोड़वंशी धर्मशाला के शिविर में रह रहे हैं। शिविर में अब तक 109 लोगों को लाया जा चुका है जिनमें से 36 लोगों का इलाज अस्पताल में किया जा रहा है। इन्हीं में से एक हैं रमेश यादव। परम पूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसायटी प्रवेश संस्था की हेड रूपाली जैन ने बताया कि। रमेश यादव काे हमारी टीम इंदाैर वायर चाैराहा स्थित कालका माता मंदिर के पास से लेकर आई थी। ये दाे साल से वहां पर रहकर भिक्षावृत्ति कर रहे थे। इन्हाेंने शादी नहीं की है। इसलिए इनका खुद का ताे काेई परिवार नहीं है। लेकिन भाई-भतीजे जरूर हैं। उनके मुताबिक। रमेश यादव की शराब की लत ने यहां पहुंचा दिया। रमेश के नाम पर एक बंगला है। एक प्लॉट भी है। संपत्ति की बात करें तो वे वैसे तो करोड़पति हैं। लेकिन सीधी आय नहीं होने से वे मंदिर में बैठकर भीख मांगने लगे और उससे मिले रुपयों से नशा करते थे। जब यादव की काउंसिलिंग की तो उन्होंने शराब नहीं पीने की बात कही है। टीम जब इनके घर पर पहुंची और उनके कमरे का इंटीरियर देखा तो यहां पर करीब चार लाख रुपए का सामान लगा मिला। इसमें एसी सहित सभी सुख-सुविधा की वस्तुएं मौजूद हैं। रमेश ने कहा कि अब घर पर रहकर काम करेंगे। परिवार के लोग इसलिए खफा थे कि इनके शराब पीने से उनकी बदनामी होती है। वे कहते हैं कि इनकी शराब आप छुड़वा दीजिए हम। इनका हम पूरा ध्यान रखेंगे। अब रमेश में काफी सुधार हो रहा है। शुरुआत में वालंटियर से भी वे शराब मांगते थे। रेस्क्यू किए गए 90 फीसदी लोग नशे के आदी हैं। फिर चाहे वह पाउडर का नशा हो। शराब का नशा हो। किसी ना किसी तरह का नशा वे करते ही रहते थे। शुरुआत के दो दिनों तक तो बेचैन थे। इनमें से कुछ ऐसे हैं जो नशे के बिना रह रहीं पा रहे हैं। इसलिए उन्हें नशा मुक्ति केंद्र छोड़ने की तैयारी हो रही है। Read the full article
इंदौर: भिखारी निकला करोड़पति, 2 साल से मंदिर के बाहर भीख मांग रहा, खुद के नाम बंगला, प्लॉट, नशे का है आदी
चैतन्य भारत न्यूज शराब की लत बर्बादी की कगार पर पहुंचा देती है। मध्य प्रदेश के इंदौर का ऐसा मामला सामने आया है। जिसके बारे में सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। दरअसल, इंदौर में निगमकर्मियों और जिला प्रशासन ने सड़कों पर पड़े वृद्धजनों और भिखारियों को उठाना शुरू किया। इस दौरान एक रमेश यादव नामक भिखारी करोड़पति निकला। बता दें देश के 10 शहरों को भिखारी मुक्त किए जाने वाले शहरों में इंदौर भी शामिल है। केंद्र सरकार की दीनबंधु पुनर्वास योजना के तहत भिक्षुकों और बेसहारा लोगों के लिए पंजाब अरोड़वंशी धर्मशाला के शिविर में रह रहे हैं। शिविर में अब तक 109 लोगों को लाया जा चुका है जिनमें से 36 लोगों का इलाज अस्पताल में किया जा रहा है। इन्हीं में से एक हैं रमेश यादव। परम पूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसायटी प्रवेश संस्था की हेड रूपाली जैन ने बताया कि। रमेश यादव काे हमारी टीम इंदाैर वायर चाैराहा स्थित कालका माता मंदिर के पास से लेकर आई थी। ये दाे साल से वहां पर रहकर भिक्षावृत्ति कर रहे थे। इन्हाेंने शादी नहीं की है। इसलिए इनका खुद का ताे काेई परिवार नहीं है। लेकिन भाई-भतीजे जरूर हैं। उनके मुताबिक। रमेश यादव की शराब की लत ने यहां पहुंचा दिया। रमेश के नाम पर एक बंगला है। एक प्लॉट भी है। संपत्ति की बात करें तो वे वैसे तो करोड़पति हैं। लेकिन सीधी आय नहीं होने से वे मंदिर में बैठकर भीख मांगने लगे और उससे मिले रुपयों से नशा करते थे। जब यादव की काउंसिलिंग की तो उन्होंने शराब नहीं पीने की बात कही है। टीम जब इनके घर पर पहुंची और उनके कमरे का इंटीरियर देखा तो यहां पर करीब चार लाख रुपए का सामान लगा मिला। इसमें एसी सहित सभी सुख-सुविधा की वस्तुएं मौजूद हैं। रमेश ने कहा कि अब घर पर रहकर काम करेंगे। परिवार के लोग इसलिए खफा थे कि इनके शराब पीने से उनकी बदनामी होती है। वे कहते हैं कि इनकी शराब आप छुड़वा दीजिए हम। इनका हम पूरा ध्यान रखेंगे। अब रमेश में काफी सुधार हो रहा है। शुरुआत में वालंटियर से भी वे शराब मांगते थे। रेस्क्यू किए गए 90 फीसदी लोग नशे के आदी हैं। फिर चाहे वह पाउडर का नशा हो। शराब का नशा हो। किसी ना किसी तरह का नशा वे करते ही रहते थे। शुरुआत के दो दिनों तक तो बेचैन थे। इनमें से कुछ ऐसे हैं जो नशे के बिना रह रहीं पा रहे हैं। इसलिए उन्हें नशा मुक्ति केंद्र छोड़ने की तैयारी हो रही है। Read the full article