भगवन्नाम-माहात्म्य ( स्कन्द-पुराणसे )(पोस्ट.०१)
भगवन्नाम-माहात्म्य ( स्कन्द-पुराणसे ) भगवन्नाम-माहात्म्य ( स्कन्द-पुराणसे )(पोस्ट.०१) “कृष्ण कृष्णेति कृष्णेति यो मां स्मरति नित्यशः। जलं भित्वा यथा पद्मं नरकादुद्वराम्यहम्॥“ भगवान् विष्णुने ब्रह्माजीसे कहा:- ‘तुमने जो पूछा था सो कहता हूं, मन लगाकर सुनो। यह अत्यन्त गोपनीय विषय है, तुम्हारी प्रीति देखकर ही कह रहा हूं। जो मनुष्य मन, कर्म और वाणीसे मेरे शरणागत है उसके सब मनोरथ पूरे होते हैं। …
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