🐄 अब यूपी में डेयरी खोलने पर मिलेगी ₹5 करोड़ तक की सब्सिडी!
उत्तर प्रदेश सरकार की डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने की महत्वाकांक्षी पहल
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में डेयरी उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में, "उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2022" में संशोधन को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत अब डेयरी इकाई स्थापित करने या मौजूदा इकाइयों का आधुनिकीकरण करने पर ₹5 करोड़ तक की भारी सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह कदम राज्य में निजी निवेश को आकर्षित करने, आधुनिक डेयरी बुनियादी ढांचे का निर्माण करने और दुग्ध उत्पादन में क्रांति लाने की क्षमता रखता है।
संशोधित नीति के अंतर्गत, राज्य सरकार डेयरी स्थापित करने की कुल लागत का 35% अनुदान के रूप में प्रदान करेगी, जिसकी अधिकतम सीमा ₹5 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। यह वित्तीय सहायता केवल नई डेयरी इकाइयों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न संबंधित गतिविधियों को भी कवर करती है:
नई डेयरी इकाइयां एवं आधुनिकीकरण: परियोजना लागत का 35% या अधिकतम ₹5 करोड़।
पशु आहार एवं पोषण निर्माण इकाइयां: लागत का 35% या अधिकतम ₹5 करोड़।
पशु आहार इकाइयों का विस्तार: लागत का 35% या अधिकतम ₹2 करोड़।
डेयरी प्लांट का आधुनिकीकरण: लागत का 35% या अधिकतम ₹2.5 करोड़।
ट्रेसेबिलिटी और गुणवत्ता नियंत्रण उपकरण/मशीनरी: लागत का 35% या अधिकतम ₹1 करोड़।
कोल्ड चेन अवसंरचना (जैसे रेफ्रिजेरेटेड वैन, टैंकर, फ्रीजर): लागत का 35% या अधिकतम ₹1 करोड़।
छोटे डेयरी व्यवसाय (मशीनरी खरीद): लागत का 50% तक या अधिकतम ₹50 लाख।
इस महत्वाकांक्षी सब्सिडी योजना के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार के कई रणनीतिक उद्देश्य हैं:
निवेश को प्रोत्साहन: डेयरी क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करना।
आधुनिकीकरण: डेयरी फार्मों और प्रसंस्करण इकाइयों में नवीनतम प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना।
दुग्ध उत्पादन में वृद्धि: राज्य की दूध उत्पादन क्षमता को बढ़ाना।
गुणवत्ता में सुधार: दूध और दूध उत्पादों की गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ में सुधार करना।
किसानों की आय में वृद्धि: दुग्ध उत्पादकों के लिए बेहतर आय सुनिश्चित करना।
रोजगार सृजन: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना।
खाद्य प्रसंस्करण नीति के साथ संरेखण: डेयरी नीति को राज्य की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अनुरूप बनाना ताकि व्यापक लाभ मिल सके।
नंद बाबा मिशन का भी योगदान
राज्य में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए "नंद बाबा मिशन" भी सक्रिय है। इस मिशन के तहत नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना जैसी पहलें चलाई जा रही हैं, जो विशेष रूप से स्वदेशी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने और छोटी डेयरी इकाइयों की स्थापना पर केंद्रित हैं। इन योजनाओं के तहत भी आकर्षक सब्सिडी प्रदान की जाती है, जैसे 25 दुधारू गायों की इकाई के लिए ₹31.25 लाख तक और दो गायों की इकाई के लिए ₹80,000 तक की सब्सिडी।
आवेदन प्रक्रिया और पात्रता
इस सब्सिडी योजना का लाभ उठाने के इच्छुक उद्यमियों और किसानों को उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग से संपर्क करना होगा। विभाग द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले आवेदक इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेंगे। पात्रता और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश विभाग द्वारा जारी किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह ₹5 करोड़ तक की सब्सिडी योजना डेयरी क्षेत्र के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल राज्य दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। आधुनिक तकनीक और बेहतर बुनियादी ढांचे से दूध की गुणवत्ता बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा। साथ ही, इस क्षेत्र में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे, जो राज्य के समग्र आर्थिक विकास में सहायक सिद्ध होंगे। यह पहल उत्तर प्रदेश को देश के डेयरी मानचित्र पर एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।