BadFaali Aur BadShuguni
*🕋 आसान तौहीद 🕋*
*🛣️ बद-फ़ाली और बदशगुनी 🛣️*
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*सवाल 267 :* बद-फ़ाली और बदशगुनी क्या है?
*जवाब :* किसी जानवर या परिंदे वगैरा द्वारा अपनी कामयाबी, नाकामी का तास्सुर लेना बद-फ़ाली या बदशगुनी कहलाता है।
*सवाल 268 :* इस्लाम में बद-फ़ाली और बदशगुनी की कोई हक़ीक़त है?
*जवाब :* इस्लाम में बद-फ़ाली और बदशगुनी की कोई हक़ीक़त नहीं है। रसूलुल्लाह सल्ल० ने फ़रमाया: *"कोई बीमारी मुतअद्दी नहीं, बद-फ़ाली और बदशगुनी की कोई हक़ीक़त नहीं, न उल्लू का बोलना कोई बुरा असर रखता है और न ही माह-ए-सफ़र मनहूस है।"* ( बुखारी : 5425 )
*सवाल 269 :* क्या बद-फ़ाली और बदशगुनी शिर्क-ए- असग़र है?
*जवाब :* जी हाँ! बद-फ़ाली और बदशगुनी शिर्क-ए-असग़र है, क्योंकि बदशगुनी की वजह से आदमी अपने काम से रुक जाता है।
*सवाल 270 :* काहिन किसे कहते है?
*जवाब :* ग़ैब की बातों का दावा करने वाले को काहिन कहा जाता है।
*सवाल 271 :* काहिन असल में मुशरिक होता है, इसका क्या कारण है?
*जवाब :* काहिन असल में मुशरिक होता है, इसका कारण यह है कि: काहिन *जिन्नात* की इबादत करके उनकी नज़दीकी हासिल करता है। उनकी सेवाएँ
हासिल करता है। शैतानों के माध्यम से कुछ छिपी हुई बातें मालूम कर लेता है।
*सवाल 272 :* रुहों को हाज़िर करने के बारेमें काहिनों और जादूगरों का दावा कैसा है?
*जवाब :* रुहों को हाज़िर करने के बारेमें काहिनों और जादूगरों का दावा बे-बुनियाद है।
*सवाल 273 :* अरवाह की क्या हक़ीक़त है?
*जवाब :* अरवाह, रुहनुजूम का जमा (बहुवचन) है, जिसका अर्थ है जान। रूह को हाज़िर करना जादू का एक क़िस्म है। मुर्दा लोगों की रूहें नहीं होतीं, बल्कि ये शैतान होते हैं। शैतान मुर्दा लोगों के शक्लों में आते हैं।
*सवाल 274 :* रुह शरीर से निकलने के बाद वापस नहीं आती, इसकी दलील क्या है?
*जवाब :* *अल्लाह तआला फ़रमाता है:अल्लाह ही रुहों को उनकी मौत के वक़्त क़ब्ज़ करता है, और जिसकी मौत नहीं आई, उसे उसकी नींद की हालत में क़ब्ज़ कर लेता है; फिर जिसकी मौत का फ़ैसला कर दिया है उसे रोक रखता है, और दूसरों को एक मुक़र्रर वक़्त तक के लिए छोड़ देता है। यक़ीनन इसमें ग़ौर व फ़िक्र करने वाले लोगों के लिए कितनी ही निशानियाँ हैं।* ( अज़-जुमरः 42 )




















