A former member of al-Qaeda turned MI6 spy said that there “is no such thing as a rehabilitated jihadist” and that deradicalisation wont work.
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A former member of al-Qaeda turned MI6 spy said that there “is no such thing as a rehabilitated jihadist” and that deradicalisation wont work.
Damaging claim comes as solicitor for London Bridge attacker says he asked for help to turn away from terrorism – but was not given any
Brits Fight Off London Bridge Attacker with Fire Extinguisher and Narwhal Tusk
Brits Fight Off London Bridge Attacker with Fire Extinguisher and Narwhal Tusk
There is something to be said about improvisation when it comes to fighting off an attacker. When Usman Khan, a convicted Islamic terrorist began stabbing people on the London Bridge yesterday, members of the public ran toward him in an effort to save lives. Just remember, Brits fight.
This makes me exceptionally proud to be British. pic.twitter.com/WS9W4s3H1z
— Martin Shapland (@MShapland) Nove…
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बाकी प्रेम कविताएँ: उस्मान खान
1. वहां बारिश होती है पुरानी लकड़ी की पाट भींगती है उसकी दरारों से दीमक चूने लगते हैं माथे पर खिड़की के लोहे की ठंडक महसूस करता हूं भाप जैसे बूंद-बूंद कर टपक रही है दिमाग़ में मैं आंखें बंद कर लंबी सांस खींचता हूं जैसे सकल विस्तार को अपनी श्वास-नलिका में घूमता महसूस करता हूं बिंदु-बिंदु प्रकाश छिटका है प्रकाश वर्ष दूर एक-एक बिंदु कोई मासूम नहीं होता न तू थी, न मैं था तू भूल भी गई शायद या याद भी रहा तो क्या मुझे पता नहीं! पर एक इच्छा है जागी हुई कि एक दिन उस खिड़की के लोहे पर माथा रख हम दोनों बारिश देखें! मैं तुझे जिस उम्र में छोड़ आया था असल में, वहीं से तुझे अपने साथ लाया था जिस दिन बारिश हो रही थी रसायनों की हल्की गंध के बीच मैं खड़ा था अकेला अपने में तुम मुस्कुराई जैसे, आज कहूं, वसंतसेना! इसीलिए चाहता था बहुत तुम्हें कि बक़ौल बेदिल सच सच को ढूंढ़ता है। जिस दिन बारिश हो रही थी मैंने एक पल के लिए ब्रह्माण्ड को सुंदर रूप दिया आत्मसात किया जैसे एक ठोस वस्तु तरंग बन जाती है देखते ही देखते विचार बदले कि बस! एक पल के लिए मैं कितनी दूर बह चला जैसे ये पल भी उस पल का विस्तार है जिस दिन बारिश हो रही थी। 2. मैं बहता जा रहा था आगे, आगे, बहुत आगे कि तुमने मुझे श्मशान की याद दिला दी दोपहर वह मई की वह झरबेरियों से उलझना पर तुमने क्यों कहा कि मैं बदल गया हूं, मुझसे बात भी नहीं की मिली भी नहीं! क्या मैं ऐसा बदल गया था कि हम बात भी नहीं कर सकते थे। शायद मैंने तुम्हारे मन में बसी अपनी ही छवि तोड़ दी थी। 3. तुम ही थी, जिसने मुझसे कहा, किसी का मज़ाक उड़ाना नहीं अच्छा! मैंने मन में बसा ली वो तरलता। कोई कितना इंसान हो सकता! और कौन सिखाता? 4. मैं तुम्हें अपनी शक्ल देना चाहता था तुम मुझे अपनी समुद्र की लहरों को मैं बाहों में समेट लेना चाहता था तुम किनारे-किनारे थोड़ी दूर जाना चाहती थी नाव में ठहरे जल में हमने देखा अपना बिम्ब तुम अलग- मैं अलग- बहुत दूसरी नाव में लेटा मैं अलग हो गया अचानक तुमसे – समुद्र से – सबसे ये सबसे ध्वंसक पल था मैं बाद में आत्मसात कर पाया बहुत बाद में बात कर पाया वह समुद्री खोह का कालापन मांसल एकदम ठोस मांस का लोथड़ा समुद्र में गहरे-गहरे डूबते जाने जैसा सुबह अचानक रात का नशा उतरा लगे जैसे तूफ़ान में मिले हम, तूफ़ान में बिछड़े। 5. उस रात मैं दुःखी था दुःख से टूटा था दुःख से भरा हुआ वंचना का दाह उपेक्षा की कड़ुआहट क्रूरता का दर्शन विश्वासघात का डर जैसे मैं तुम्हारे सामने इतना बच्चा हो गया कि खुद डर गया। 6. जुनूं का एक पल वो अगर जिंदगी बदलता मैं खींच लाता आज तक वो दोपहर, वो गली तुम्हारी एड़ियों के ऊपर जो दूज का चांद रखा है तुम्हारे कंधे के ठोसपन ने जो लरज़ मुझे दी है लगता है आज भी उस गली में तुम्हारी एड़ियों पर दूज का चांद रखा हो जैसे – मैंने एक घर चुन लिया था एक जिंदगी एक शहर चुन लिया था एक नदी वहां बहती थी रेल के पुल के नीचे जहां हम शाम को घूमने जाया करते थे मैं खूब मेहनत करता था तुम खूब खुश होती थीं तुम खूब मेहनत करती थीं मैं खूब खुश होता था वहां गाड़ियां तेज़ चलती थीं शाम को बाज़ार में खाने-पीने की तमाम तरह की चीज़ें मिलती थीं वहीं एक गली में मैदान के पास मैंने घर ले लिया था (मुझे और अच्छे से याद नहीं!) – मैं तुम्हारे इतने पास होना चाहता था कि मेरा दिल फटने लगता था सांसे तेज़ होने लगती थी इतने पास के खयाल से ही – मैं इतनी तेज़ दौड़ा तेज़, और तेज़ मेरी सांस फूलने लगी सीना फटने लगा मैं और, और लंबे डग भरने लगा थंबे, नाले, नदियां, पुल कूदने लगा मैदान-पहाड़-देश-ग्रह-नक्षत्र मैं तारों के महासमुद्र में तैरने लगा तेज़-तेज़-और तेज़- मैं पार करता गया एक महासमुद्र से दूसरे महासमुद्र से तीसरे महासमुद्र मैं साइकिल से गिर पड़ा और मैंने महसूस किया मेरे सिर पर तुम्हारी हंसी जुनून बनकर खड़ी है। 7. वह रहस्य जन्म का जीवन का रसमयी लालसा, विस्मयी वासना उष्ण द्रव वसीय वह मध्यमिका जैसे शरीर से परे किसी ताप में प्रथम आविष्कार वह न गंध न रूप न आकार केवल एक उष्ण तरल एहसास वाष्प की तरह अब भी जमा जैसे छाती मैं। 8. मैंने ठुकराया तुम्हारा प्यार मैंने तुम्हें छीज-छीजकर मरते देखा मैंने तुम्हारी देह को गलते देखा मैंने बहुत कामना की तुम्हें गले लगाने की पर जब सब कुछ छुट गया तुम एक दिन विलीन हो गईं किस वक़्त पता नहीं मुझे तुम्हारी लाश से क्या मतलब! मैं तुम्हारा प्यार ठुकरा चुका था पर एक इच्छा थी तुम्हें गले लगाता और हम लोग मगरे तक घूमने चलते एक बार। 9. दोपहर है नीम-नील, नीम-सफ़ेद दीवार है मैं एक पल के लिए उसके इतने नज़दीक़ हूं कि उसकी सांसें अपनी गर्दन पर महसूस कर सकता हूं एक उसी पल में मैं घबरा जाता हूं अपने-आप से पीछे हट जाता हूं अचानक एक आवाज़, दोपहर खींच लेती है। आगे नहीं… मैं पीछे हटता जाता हूं! इसके आगे क्या… 10. फिर बारिश हुई नदी पर रात के आखरी-आखरी पहर सांय-सांय में घुल गई बूंद-बूंद फिर लहर-लहर
मैं मिट्टी के इतने पास तुम्हारे इतने पास आम की जड़ के इतने पास जैसे यहीं मिलनी मुझे युगों से मुझे ढूंढ़ती : तस्क़ीन!
उस्मान खान, बाकी प्रेम कवियाएँ
Johnson five-for headlines nervy win as Australia take series
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Congratulations to the three debutants from last night! Unfortunately it will be overshadowed by rain, but no doubt the next game you’ll showcase your talents. 💚
Repatriate Usman Khan has been banned from UAE for 5 years after a ‘breach of his contract.’ He will also not play in the UAE cricket leagues, as he decided to play for Pakistan.
Not a big loss. As if the UAE offers anything to cricket anyways.