विश्व-प्रसिद्ध संगीत निर्देशक जोड़ी शंकर-जयकिशन के श्री शंकर द्वारा विविध भारती पर प्रस्तुत विशेष जयमाला [उन्होंने २ बार अलग-अलग विशेष जयमाला प्रस्तुत की थी, यह कार्यक्रम-१ का लिप्यन्तरण (transcription) है]
contributed by Shri Devendra Shastry
प्यारे फौजी भाइयों को और सुननेवालों को शंकर का नमस्कार। मैं संगीतकार हूँ और मेरा काम है संगीत बनाना। मैं और जयकिशन, हम संगीत के बारे में जानते हैं, दुनिया के बारे में तो नहीं जानते हैं, और यह संगीत के ज़रिये ही जो भी बोलना है वह आपके सामने रखते हैं। और संगीत की ज़ुबान ही आपको सुनाते हैं।
गीत: होंठों पे सच्चाई रहती है... (जिस देश में गंगा बहती है)
यह आप लोगों को मालूम है, यह राज कपूर साहब की फिल्म का गाना है। आप जानते हैं कि गाना एक 'सिचुएशन' पर बनता है। और वह 'सिचुएशन' का गाना एक इंसान की जिन्दगी से भी ताल्लुक रखता है और फिल्म के 'सिचुएशन' के साथ भी। तो यह ज़रूरी है कि गाना जो है वह सबको पसंद आए, और सबको समझ में आए, उसी को गाना कहते हैं। गाना ख़ास तौर पर, गाने का मतलब यह होना चाहिए कि अगर वह फिल्म के 'सिचुएशन' के हिसाब से भी है ठीक, तो इंसान की जिन्दगी को भी लग जाता है। तो अब यह गाना आप जानते हैं कि देश भक्ति का गाना है, जो हमारे देश में हजारों लोग सुनते हैं, और कितनी भाषाएं हैं, और हर कोई अपनी-अपनी भाषा बोलता है, लेकिन इस गाने का मतलब यही है कि हम एक हैं, और हम हिन्दुस्तानी लोग कहीं भी रहें, किधर भी रहें, जहां भी रहें, लेकिन हमारा दिल एक है और एक होकर चलना चाहिए, और एक रहेंगे। हमारी एकता में हमारा संगीत भी हमारी मदद करता है। और जो संगीत सिर्फ यहीं नहीं, सारी दुनिया में मशहूर है, वह है शास्त्रीय संगीत। और शास्त्रीय संगीत को लोग समझते हैं बहुत मुश्किल है, या बहुत कठिन है लेकिन ऐसा नहीं है। वह तो शास्त्रीय संगीत तो ऐसा है कि जैसा बनाएंगे वैसा बनता है। कुछ लोगों ने बहुत मुश्किल बना दिया इसलिए शायद लोग समझते हैं कि मुश्किल है। मुश्किल एकदम नहीं है। एक गाना हमने शास्त्रीय संगीत पर बनाया है, वह हम आपको सुनाना चाहते हैं।
गीत: कोई मतवाला आया मेरे द्वारे.... (लव इन टोकियो)
फौजी भाइयों, आपको शायद नहीं मालूम होगा या किसी 'पेपर' में पढ़ा भी होगा, मुझे कसरत का बड़ा शौक था। और उस वक्त मैं कसरत भी करता था, कुश्ती भी लड़ता था। यह मेरे ख़याल से आपको खुशी होगी कि संगीतकार पहलवान भी था। लेकिन उस कुश्ती के साथ-साथ मैंने छोटेपन से संगीत में भी बड़ी मेहनत की है, उसमें भी कुश्ती की है मैंने। लेकिन संगीत की कुश्ती आम कुश्ती की तरह नहीं होती। यह तो प्यार-मोहब्बत से होती है। और संगीत जो है यह हाथ और ताक़त से नहीं चलता है। संगीत में आप जितने प्यार से बना सकते हैं, जितना प्यार आप दे सकते हैं, उतना ही संगीत में आनंद और मज़ा आता है। अब एक गाना हमने बड़े प्यार से और बड़े दिल से हमने बनाया है, आवाज़ है मोहम्मद रफी साहब की, और फिल्म है बसंत बहार।
गीत: बड़ी देर भई, कब लोगे खबर मोरे राम... (बसंत बहार)
फिल्मी दुनिया में हमेशा से बड़े-बड़े गायक रहे हैं, और कुछ चले गए हैं, और आज भी बड़े-बड़े गायक हैं। भगवान करे - हमेशा रहें, और नए भी आते हैं, नए-नए लोगों को भी मौका मिलता है। और हम तो चाहते हैं कि नए आने से उनसे नई बातें हमें भी मिलती हैं, नया काम कर भी सकते हैं। जैसे आपको याद होगा, कई साल पहले हम एक नई गायिका को लाए थे। और उसका नाम है शारदा। कई गाने उसके 'पॉपुलर' हुए हैं, और आपको याद है शारदा का सबसे पहला मशहूर गाना कौन सा था?
गीत: तितली उड़ी, उड़ जो चली... (सूरज)
एक छोटा सा वाक़या आपके सामने रखता हूँ। वो है मेरे अज़ीज़ जो जयकिशन हैं, उनके बारे में कुछ बातें सुनाता हूँ। क्या हुआ कि जिस वक़्त ये गाना हम 'कम्पोज़' करते थे "मेरे दिल कहीं यूं चल", उसमें बड़ा मज़ा आया। तो जयकिशन साहब अपना बाजा लेकर बैठे हुए हैं, कह रहे हैं कि 'भाई, ये किसका दिल लेके तू चल?' मैंने बोल कि 'ऐसी कैसी बातें कर रहा है? दिल लेकर तो आप ही लेके जाते हो, हम तो यहीं बैठे रहते हैं, अब कहीं जल्दबाजी मत करो कहीं जाने-वाने की।' कहने लगा कि 'नहीं यार मुझे कहीं जाना है, मैं बहुत थक गया।' मैंने बोला के 'यह गाने को जो काम है अभी तुम पूरा 'कम्प्लीट' करो क्यूंकि हमारे 'प्रोड्यूसर' साहब, अमिय चक्रवर्ती साहब सुनने के लिए आ रहे हैं, आज तुम बैठो, उसे ख़तम करो, और उसके बाद तुम जाना।' तो कहने लगा कि 'नहीं यार मेरा कोई "अपोइन्ट्मेन्ट" है, मुझे जाना ज़रूरी है।' तो कहा कि 'कोई लड़की-वड़की है क्या?' तो बोलने लगा कि 'इसमें पूछने की क्या ज़रुरत है, यह तो समझने की बात है'। तो इस तरीके से हम लोगों का काम होता था। तो उसमें एक और क्या ख़ास बात थी जयकिशन में, वो रंगीला राजा था, खुशमिजाज़ था, हंसता रहता था, और हमेशा अच्छे कपडे पहनना, और गाड़ी में बड़े शान से जाना, और काम के वक़्त में वो इतना सही ढंग से काम करता था कि जिसका कोई जवाब नहीं था, लेकिन इस गाने में जो उसने जादू भरा और जो किया है, जैसे हम उसको लहरी और रंगीला कहते थे, इस गाने में भी 'अब मेरे दिल' में जो जादू भर दिया उसका कोई जवाब नहीं है.
गीत: ऐ मेरे दिल कहीं और चल... (दाग़)
फिल्मी गीतों में सिर्फ धुनों का अच्छा होना, बोलों का अच्छा होना, आवाज़ का अच्छा होना काफी नहीं। इसके अलावा 'ऑर्केस्ट्रा' की भी बहुत ज़रुरत होती है। उस 'ऑर्केस्ट्रा' में अच्छे साज़, नए ढंग के साज़, और उनको इस्तेमाल करना आना भी चाहिए। और मैं और जयकिशन, दोनों को बहुत शौक़ है 'ऑर्केस्ट्रा' का, और हम दोनों ही सब साज़ बजाते थे, जैसे जयकिशन अकोर्डियन, पियानो, हारमोनियम बहुत अच्छा बजाता था, वैसे मैं भी तबला बहुत खूबसूरत बजाता था, और उसके अलावा पियानो, हारमोनियम, अकोर्डियन, और 'डान्स' वगैरह भी हम जानते हैं। इन तमाम चीज़ों की ज़रुरत पड़ती है, तमाम ऐसे गानों में, उनकी मदद लेकर गानों को सजाते हैं और गानों में जो है खूबसूरती पैदा करते हैं। अब मैं ऐसा ही एक गाना सुनाना चाहता हूँ आपको जिसपर 'ऑर्केस्ट्रा' में हमने बहुत मेहनत की थी, और वो 'ऑर्केस्ट्रा' में हमने क्या-क्या बजाया है, कौन-कौन से 'इंस्ट्रुमेंट्स यूज़' की हैं, वो अब मैं आपको नाम बताता हूँ, जैसे एक सोलोबोक्स होता है, और एक अकोर्डियन होता है, और एक सिन्थेसाइज़र होता है, और भी बहुत से 'इंस्ट्रुमेंट्स' हैं जो इंग्लिश में और दूसरा सेक्सोफोन होता है, और उसके बाद ड्रम्स, साइड ड्रम्स, और पोंगा(?), बोंगा(?), ये तमाम चीज़ों को हमने उसमें 'यूज़' किया, और डबल बेस, और दो-दो डबल बेस को 'यूज़' किया है। और बहुत से छोटे-मोटे 'इंस्ट्रुमेंट्स यूज़' किए और इन तमाम चीज़ों से उस गाने में इतनी खूबसूरती आई है, वो गाना अब आपके सामने है।
गीत: आपकी राय मेरे बारे में.... (ऐलान)
अभी आपने बड़े 'ऑर्केस्ट्रा' का मज़ा लिया। ज़रूरी नहीं कि हर गाने में बड़ा 'ऑर्केस्ट्रा' हो। छोटे 'ऑर्केस्ट्रा' का गाना भी मज़ा आता है। अब मैं आपको एक गाना सुनाता हूँ, जिसमें मि.रॉबर्ट ने पियानो बजाया है, उसमें मैंने भी उनके साथ पियानो बजाया है, और वो गाने में एक ही साज़ है जो सुनने में आता है। और उस साज़ का मज़ा आपको ज़रूर आयेगा। तो सुनिए वो गाना और याद कीजिए वो दो दोस्त जो हमसे बिछड़ गए - जयकिशन और मुकेश।
गीत: दोस्त-दोस्त ना रहा... (संगम)
फौजी भाइयों, अब मैं रुख़सत चाहता हूँ| उम्मीद है, जिन्दगी के सफ़र में इसी तरह मिलते रहेंगे। जाते हैं, ख़ुदा-हाफिज़। बस इतनी गुजारिश है, हम याद जो आ जाएं, मिलने की दुआ करना।
गीत: जिंदगी एक सफ़र है सुहाना... (अंदाज़)