ज़िन्दगानी का कोई मक़सद नहीं हैं , एक भी क़द आज आदमकद नहीं है।
राम जाने किस जगह होंगे कबूतर , इस इमारत में कोई गुम्बद नहीं है।
आपसे मिलकर हमें अक्सर लगा है, हुस्न में अब जज़्ब -ए -अमज़द नहीं हैं।
पेड़ -पौधे हैं बहुत बौने तुम्हारे , रास्तों में एक भी बरगद नहीं हैं।
मैकदे का रास्ता अब भी खुला हैं , सिर्फ आमदरफ्त भी ज़ायद नहीं हैं।
इस चमन को देखकर किसने कहा था , एक पंछी भी यहाँ शायद नहीं हैं।
--दुष्यन्त Img.3. Ref to Gabby Pahinui, the King of Slack Key. “In the beginning there was sound”
















