एक गलती जिसने कर दिया ऐसा हाल...
यह सन 2011 की बात है जब दिल्ली में सब कुछ ठीक होने के बावजूद भी लोग एक ऐसी बीमारी के चलते उसकी गिरफ्त में आ रहे थे जिसका कोई तोड़ नहीं मिल रहा था. लोग दवाइयों से ठीक तो हो रहे थे लेकिन उसका कोई पक्का इलाज नहीं मिल रहा था. मरीजो की तादाद बढ़ती जा रही थी और अस्पतालों में चिकित्सक सुविधाओं की कमी होती जा रही थी. इस बीमारी के चलते लोगों में एक डर बैठ गया था कि यह बीमारी जानलेवा है और शायद सही भी था क्यूंकि अगर इस बीमारी का समय रहते इलाज नहीं हो रहा था तो इससे लोग अपनी जान भी गवां रहे थे.
आइये जानते हैं क्या थी वह बीमारी! इस बीमारी को डेंगू कहा जाता है जो एक सामान्य बुखार है, लेकिन यह सामान्य बुखार से अलग होता है. डेंगू के बुखार की तीव्रता अधिक होती है, कमजोरी के साथ चक्कर भी आते हैं. संक्रमण बढ़ने के साथ शरीर कमजोर होता जाता है. सामान्य लक्षण जैसे उलटी आना, जोड़ों में दर्द, त्वचा पर रैशज होना दिखाई देने लगते हैं. सरकारों द्वारा समय-समय पर नालों और नगरों की सफाई तो की जाती है लेकिन फिर भी हर बार डेंगू व अन्य बीमारी पनप ही जाती है. हर साल कई करोड़ रुपयों की स्कीमों का अनावरण किया जाता है और अधिकारी उस पैसे अपने अनुसार और अनुकूल तरीके से उसका सदुपयोग अपने निजी व समाज की सेहत के लिए खर्च करते हैं.
इतने सब के बावजूद, इस बीमारी की रोकथाम के लिए इतने प्रयास ही नहीं किये गये कि आगे के वर्षों में कोई स्कीम की आवश्यकता ही न पड़े. हर बार नई योजनाएं, उनको वास्तिवकता में लाने के लिए करोडों पैसा और उस योजना को सही तरीके से चलाने हेतु कई सौ दफ्तरों के लाखों कर्मचारी भाग लेते हैं लेकिन फिर भी यह बीमारी समाज को छोड़ कर ही नहीं जाती. क्या कारण था इसका और कौन था इन सबका जिम्मेदार? जवाब अगर जनता से माँगा जाता तो ये सारा कसूर सरकार पर ही थोप दिया जाता. आखिरकार सही बात भी है, अपनी मेहनत की कमाई में से सरकार को टैक्स देते हैं और स्कीमों को जनता की सुविधा के लिए शुरू किया जाता है लेकिन अंत में आम जनता को ही भुगतना पड़ता है.
लेकिन सरकार भी अपना पूरा योगदन देती है तो आम जनता का भी फ़ार्ज़ है कि ऐसे नियमों और कानून का सम्मान करे और अपना पूरा सहयोग दें. इसी गंभीरता को समझते हुए एक ऐसी संस्था सामने आई जिसने दिल्ली की सफाई का जिम्मा उठाया और मात्र कुछ ही घंटों में दिल्ली की हर सड़क, गली, मोहोल्ले, कालोनियों की गंदगी को साफ़ कर डाला. 21 सितम्बर 2011 का वो दिन जिस दिन 4,00,000 स्वयंसेवकों के साथ दिल्ली की सफाई मात्र 2 दिन में कर मानवता सेवा के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया. गौरतलब है कि इस सफाई अभियान की वजह से कुछ ही दिनों में डेंगू में मरीजों की कमी आई. स्थानीय लोगों की माने तो वहां के लोगों ने ऐसा महा सफाई अभियान कभी देखा ही नही था. क्यूंकि देशहित के लिए निस्वार्थ भाव से लोगों का ऐसा हुजूम वो भी एक अनजान शहर में, एक अजूबे से कम नहीं था. आज के समय में जहाँ लोग अपने बाल का एक कतरा भी नहीं देते, वहां ये लोग अपने व्यय पर इतनी दूर पहुँचे.
वजह, आइये डालते हैं कुछ आंकड़ों पर:
मात्र 2 दिन में दिल्ली को चमचमा दिया.
क्या डॉक्टर. इंजिनियर, बिजनिस वाले लोग, सभी ने अपना योगदान दिया.
हरयाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश ही नही विदेशों से लोग पहुँचे थे.
क्या सडक, नाली, यहाँ तक की बड़े नालों और गटर में घुस कर सफाई की.
सलाम है इनके ऐसे जज्बे को और इनमे ये जज्बा भरने वाली ऐसी संस्था ‘डेरा सच्चा सौदा’ के महान संचालक ‘संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा’. जिनके दिशा-निर्देश में 134 मानवता भलाई के कार्य चल रहे है. ऐसे-ऐसे कार्य जिनके बारे करना तो दूर कोई सोच भी नहीं सकता.
एक नज़र, 134 मानवता भलाई के कार्यों में से कुछ कार्यों पर:
वेश्यावृत्ति में फंसी युवतियों को गुरू जी बेटी बनाते हैं ईलाज करवाकर, शादी करके मुख्य धारा में लाते हैं
किन्नरों को सुखदुआ समाज का नाम देकर उनको अपनाना व समाज की मुख्य धारा में लाना
समलैंगिक लोगों का इलाज करवाना व उन्हें जायज रिश्ते अपनाने की नसीहत देना
भ्रूण हत्या व लिंग भेद पर रोक लगाना. इसी उद्देश्य से पूज्य गुरूजी ने ऐसी लड़कियां जिनको गर्भ में मार देना था, अपनाया व माँ-बाप की जगह खुद का नाम दिया
धर्म, जाति आदि सभी भेदभाव मिटाकर भाईचारा कायम करना
मरणोंपरांत दिल दान के लिए लिखित में प्रण करवाना
इस तरह की ये मानवता भलाई के कार्य जो देश की हित के लिए हैं, आज लोग उन्हें ये गुंडे, और अनपढ़ लोगों की श्रेणी में डाल दिया. लेकिन देश हित के लिए हमेश तत्पर रहने वाले ये लोग सही मायनों में एक इंसानियत की मिसाल कायम किये हुए हैं. धन्य है ऐसी कुल जहाँ ऐसी रूहों ने जन्म लिया और परिवार ही नहीं देश का नाम भी रोशन कर रहे हैं.