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Yugm Shabd Kise Kahate Hain - शब्द युग्म क्या है उदाहरण सहित
नमस्कार दोस्तों। इस पोस्ट में, हम शब्द युग्म (Yugm Shabd )क्या है उदाहरण सहित अध्ययन करेंगे। जो हमे स्पष्ट रूप से समझने में मदद करेगा। इसलिए इस पोस्ट को अंत तक पढ़ें ताकि अनेकों के बारे में कोई संदेह न रहे।
शब्द युग्म (Yugm Shabd) की परिभाषा:
हिंदी के अनेक शब्द ऐसे हैं, जिनका उच्चारण प्रायः समान होता हैं। किंतु, उनके अर्थ भिन्न होते है। इन्हे ‘युग्म शब्द’ कहते हैं।
अथवा
हिन्दी में कुछ शब्द ऐसे हैं, जिनका प्रयोग गद्य की अपेक्षा पद्य में अधिक होता है। इन्हें ‘युग्म शब्द’ या ‘समोच्चरितप्राय भित्रार्थक शब्द’ कहते हैं।
हिन्दी भाषा की एक खास विशेषता है- मात्रा, वर्ण और उच्चारण प्रधान-भाषा। इसमें शब्दों की मात्राओं अथवा वर्णों में परिवर्तन करने से अर्थ में काफी अन्तर आ जाता है।
अतएव, वैसे शब्द, जो उच्चारण की दृष्टि से असमान होते हुए भी समान होने का भ्रम पैदा करते हैं, युग्म शब्द अथवा ‘श्रुतिसमभिन्नार्थक’ शब्द कहलाते हैं। श्रुतिसमभिन्नार्थक का अर्थ ही है- सुनने में समान; परन्तु भिन्न अर्थवाले।
इस बात को हम कुछ उदाहरणों द्वारा समझने का प्रयास करेंगे। पार्वती को भोलेनाथ भी कहा जाता है। यह वाक्य अशुद्ध है; क्योंकि पार्वती का अर्थ है : शिव की पत्नी- शिवा। उक्त वाक्य होना चाहिए- ‘पार्वती’ शिव का ही दूसरा नाम है।
इसी तरह, यदि किसी मेहमान के आने पर ऐसा कहा जाय : आइए, पधारिए, आप तो हमारे श्वजन हैं। यदि अतिथि पढ़ा-लिखा है तो निश्चित रूप से वह अपमान महसूस करेगा; क्योंकि ‘श्वजन’ का अर्थ है, कुत्ता। इस वाक्य में ‘श्वजन’ के स्थान पर ‘स्वजन’ होना चाहिए।
हमने दोनों वाक्यों में देखा : प्रथम में मात्रा के कारण अर्थ में भिन्नता आ गई तो दूसरे में वर्ण के हेर-फेर और गलत उच्चारण करने से। हमें इस तरह के शब्दों के प्रयोग में सावधानी बरतनी चाहिए, अन्यथा अर्थ का अनर्थ हो सकता है।
युग्म शब्द (Yugm Shabd) के उदाहरण:
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Alankar Kise Kahate Hain - अलंकार की परिभाषा, प्रकार, उदाहरण
नमस्कार दोस्तों। इस पोस्ट में हम अलंकार (Alankar) का अध्ययन करेंगे। अलंकार किसे कहते हैं? अलंकार के प्रकार और कुछ उदाहरण भी हैं। जो आपको इसे और स्पष्ट रूप से समझने में मदद करेगा। इसलिए इस पोस्ट को अंत तक पढ़ें ताकि अलंकार के बारे में कोई संदेह न रहे।
अलंकार की परिभाषा – Alankar ki Paribhasha in Hindi:
अलंकार दो सब्दो से मिलकर बना है- ‘अलम’ और ‘कार’ | जहा ‘अलम’ का शाब्दिक अर्थ है, आभूषण और ‘कार’ का अर्थ है धारण करना | जिस प्रकार स्त्रिया अपने शरीर की शोभा बढ़ाने के लिए आभूषण को पहनती है उसी प्रकार किसी भाषा या कविता को सुन्दर बनाने के लिए अलंकार का प्रयोग किया जाता है | दूसरे सब्दो में कहे तो जो ” शब्द काव्य की शोभा को बढ़ाते हैं उसे अलंकार कहते हैं।”
उदाहरण: “चारु चंद्र की चंचल किरणें ”
अलंकार के भेद ( Alankar Ke Bhed ) – Types of Alankar:
शब्दालंकार
अर्थालंकार
उभयालंकार
1. शब्दालंकार की परिभाषा – Sabdalankar ki Paribhasha
शब्दालंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – शब्द + अलंकार। शब्द के दो रूप होते हैं – ध्वनी और अर्थ। ध्वनि के आधार पर शब्दालंकार की सृष्टी होती है। जब अलंकार किसी विशेष शब्द की स्थिति में ही रहे और उस शब्द की जगह पर कोई और पर्यायवाची शब्द के रख देने से उस शब्द का अस्तित्व न रहे उसे शब्दालंकार कहते हैं।
शब्दालंकार के भेद – Sabdalankar Ke Bhed :-
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Paryayvachi Shabd – पर्यायवाची शब्द | उदाहरण
नमस्कार दोस्तों। इस पोस्ट में हम पर्यायवाची शब्द (Paryayvachi Shabd) अध्ययन करेंगे। पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं? पर्यायवाची शब्द के प्रकार और कुछ उदाहरण भी हैं। जो आपको इसे और स्पष्ट रूप से समझने में मदद करेगा। इसलिए इस पोस्ट को अंत तक पढ़ें ताकि कोई शंका न हो सके इसके बारे में।
पर्यायवाची शब्द (Paryayvachi Shabd) की परिभाषा:
Paryayvachi Shabd: ‘पर्याय’ का अर्थ है- ‘समान’ तथा ‘वाची’ का अर्थ है- ‘बोले जाने वाले’ अर्थात जिन शब्दों का अर्थ एक जैसा होता है, उन्हें ‘पर्यायवाची शब्द’ कहते हैं।
इसे हम ऐसे भी कह सकते है- जिन शब्दों के अर्थ में समानता हो, उन्हें ‘पर्यायवाची शब्द’ कहते है।
समान अर्थवाले शब्दों को ‘पर्यायवाची शब्द’ या समानार्थक भी कहते है।
जैसे- सूर्य, दिनकर, दिवाकर, रवि, भास्कर, भानु, दिनेश- इन सभी शब्दों का अर्थ है ‘सूरज’ । इस प्रकार ये सभी शब्द ‘सूरज’ के पर्यायवाची शब्द कहलायेंगे।
पर्यायवाची शब्द को ‘प्रतिशब्द’ भी कहते है। अर्थ की दृष्टि से शब्दों के अनेक रूप है; जैसे- पर्यायवाची शब्द, युग्म शब्द, एकार्थक शब्द, विपरीतार्थक शब्द, समोच्चरितप्राय शब्द इत्यादि।
किसी भी समृद्ध भाषा में पर्यायवाची शब्दों की अधिकता रहती है। जो भाषा जितनी ही सम्पत्र होगी, उसमें पर्यायवाची शब्दों की संख्या उतनी ही अधिक होगी। संस्कृत में इनकी अधिकता है। हिन्दी के पर्यायवाची शब्द संस्कृत के तत्सम शब्द है, जिन्हें हिन्दी भाषा ने ज्यों-का-त्यों ग्रहण कर लिया है।
यहाँ एक बात ध्यान रखने की यह है कि इन शब्दों में अर्थ की समानता होते हुए भी इनके प्रयोग एक तरह के नहीं हैं। ये शब्द अपने में इतने पूर्ण हैं कि एक ही शब्द का प्रयोग सभी स्थितियों में और सभी स्थलों पर अच्छा नहीं लगता- कहीं कोई शब्द ठीक बैठता है और कहीं कोई। प्रत्येक शब्द की महत्ता विषय और स्थान के अनुसार होती है।
कुछ विशिष्ठ पर्यायवाची शब्द नीचे दी जा रही है-
पर्यायवाची शब्दों (Paryayvachi Shabd) के उदाहरण:
( अ )
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Hindi Muhavare – हिंदी मुहावरे और अर्थ और वाक्य
हैलो मित्रों। इस पोस्ट में हम मुहावरे (Hindi Muhavare) और उनके अर्थ के बारे में अध्ययन करेंगे। इसके अलावा, हम मुहावरों का उपयोग करते हुए कुछ वाक्य देखेंगे। अंत में, विभिन्न प्रकार के मुहावरे। पोस्ट को अंत तक पढ़ें।
Hindi Muhavare:
जब कोई वाक्यांश अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ में रूढ़ हो जाता है. तो उसे मुहावरा कहते हैं |
इस लेख में आपको मुहावरे के अर्थ और उनके वाक्य प्रयोग को देखोगे | अगर आप class 12, class 11, class 10, class 9, class 8, class 7, class 6, class 5 & class 4है तो यह मुहावरे आपके लिए स्टडी में सहायता करेंगे |
आम बातों में भी लोग मुहावरों का इस्तेमाल करते है जैसे – नाच न आवे आगाँ टेढ़ा, अधजल गगरी छलकत जाय आदि |
Hindi Muhavare List – हिंदी मुहावरे और अर्थ और वाक्य प्रयोग
मुहावरा – अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना अर्थ – अपनी बड़ाई आप करना वाक्य प्रयोग – अपने मुँह मियाँ मिट्लू बननेवाले को समाज में इज्जत नहीं मिलती |
मुहावरा – आँख दिखाना अर्थ – क्रोध से देखना, रोकना, धमकाना वाक्य प्रयोग – गलती भी करते हो और ऊपर से आँखें भी दिखाते हो|
मुहावरा – आँख का तारा, आँख की पुतली अर्थ – बहुत प्यारा वाक्य प्रयोग – यह बच्चा मेरी आँखों का तारा है।
मुहावरा – आँख का काजल चुराना अर्थ – सफाई के साथ चोरी करना वाक्य प्रयोग – इतने लोगों के बीच से घड़ी गायब ! चोर ने तो जैसे आँखों का काजल ही चुरा लिया है
मुहावरा – आँखों में धूल झोंकना अर्थ – सरे आम धोखा देना वाक्य प्रयोग –परीक्षक की आँखों में धूल झोंककर कुछ विद्यार्थी अच्छे अंक तो पा जाते हैं, परंतु इससे उन्हें जीवन में सफलता नहीं मिलती
मुहावरा – आँखों पर चढ़ना अर्थ – पसंद आ जाना वाक्य प्रयोग – तुम्हारी घड़ी चोर की आँखों पर चढ़ गयी थी, इसलिए मौका पाते ही के लिए लोभ होना उसने चुरा ली
मुहावरा – आखें फेर लेना अर्थ – पहले जैसा व्यवहार न रखना वाक्य प्रयोग – जब से उसे अफसरी मिली है, उसने माँ बाप, यार दोस्त सबसे आँखें फेर ली है
मुहावरा – आँखें बिछाना अर्थ – प्रेम से स्वागत करना वाक्य प्रयोग – तुम्हारी राह में आँखें बिछाये कय से बैठा हूँ तुम जल्द आ जाओ
मुहावरा – आँख में पानी न होना अर्थ – जोहना, बेशर्म होना वाक्य प्रयोग – बेईमान लोगों की आँखों में पानी नहीं होता
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Precis Writing in Hindi - संक्षेपण से क्या आशय है
नमस्कार दोस्तों। इस पोस्ट में, हम संक्षेपण का अध्ययन करेंगे। जो आपको समझने में मदद करेगा। इसलिए इस पोस्ट को अंत तक पढ़ें |
संक्षेपण की परिभाषा:
किसी विस्तृत विवरण, सविस्तार व्याख्या, वक्तव्य, पत्रव्यवहार या लेख के तथ्यों और निर्देशों के ऐसे संयोजन को ‘संक्षेपण’ कहते है, जिसमें अप्रासंगिक, असम्बद्ध, पुनरावृत्त, अनावश्यक बातों का त्याग और सभी अनिवार्य, उपयोगी तथा मूल तथ्यों का प्रवाहपूर्ण संक्षिप्त संकलन हो।
अथवा
किसी अनुच्छेद, विवरण, वक्तव्य अथवा निबंधादि के मूल भावों को बचाते हुए उसे संक्षिप्त करना ही संक्षेपण कहलाता है।
इस परिभाषा के अनुसार, संक्षेपण एक स्वतःपूर्ण रचना है। उसे पढ़ लेने के बाद मूल सन्दर्भ को पढ़ने की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती। सामान्यतः संक्षेपण में लम्बे-चौड़े विवरण, पत्राचार आदि की सारी बातों को अत्यन्त संक्षिप्त और क्रमबद्ध रूप में रखा जाता है।
इसके द्वारा विद्यार्थियों की योग्यता का आकलन किया जाता है कि वह किसी बात को संक्षेप में प्रकट करने की कहाँ तक क्षमता रखता है। जिस अवतरण का संक्षेपण करने कहा जाय, उसे दो-तीन बार पढ़ लें।
इससे आपकी समझ में आ जाएगा कि इसका मूल भाव क्या है। इस भाव को समझ रखकर आप देखें कि कौन-सी ऐसी बात है जो उस भाव को पुष्ट करती है और कौन-सी ऐसी है, जिन्हें हटा देने पर भी मूल भाव का महत्त्व कम नहीं होगा।
इसमें हम कम-से-कम शब्दों में अधिक-से-अधिक विचारों भावों और तथ्यों को प्रस्तुत करते है। वस्तुतः, संक्षेपण किसी बड़े ग्रन्थ का संक्षिप्त संस्करण बड़ी मूर्ति का लघु अंकन और बड़े चित्र का छोटा चित्रण है।
इसमें मूल की कोई भी आवश्यक बात छूटने नहीं पाती। अनावश्यक बातें छाँटकर निकाल दी जाती है और मूल बातें रख ली जाती हैं। यह काम सरल नहीं। इसके लिए निरन्तर अभ्यास की आवश्यकता है।
संक्षेपण के गुण:
संक्षेपण एक प्रकार का मानसिक प्रशिक्षण है, मानसिक व्यायाम भी। उत्कृष्ट संक्षेपण के निम्नलिखित गुण है-
(1) पूर्णता- संक्षेपण स्वतः पूर्ण होना चाहिए।
संक्षेपण करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसमें कहीं कोई महत्त्वपूर्ण बात छूट तो नहीं गयी। आवश्यक और अनावश्यक अंशों का चुनाव खूब सोच-समझकर करना चाहिए। यह अभ्यास से ही सम्भव है। संक्षेपण में उतनी ही बातें लिखी जायँ, जो मूल अवतरण या सन्दर्भ में हों, न तो अपनी ओर से कहीं बढ़ाई जाय और न घटाई जाय तथा न मुख्य बात कम की जाय। मूल में जिस विषय या विचार पर जितना जोर दिया गया है, उसे उसी अनुपात में, संक्षिप्त रूप में लिखा जाना चाहिए। ऐसा न हो कि कुछ विस्तार से लिख दिया जाय और कुछ कम। संक्षेपण व्याख्या, आशय, भावार्थ, सारांश इत्यादि से बिलकुल भित्र है।
(2) संक्षिप्तता-
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Telegram in Hindi – तार लेखन क्या है?
नमस्कार दोस्तों। इस पोस्ट में हम तार लेखन (Telegram), तार लेखन सामान्य नियम के बारे में अध्ययन करेंगे और कुछ उदाहरणों का अध्ययन किया जाएगा। पोस्ट को अंत तक पढ़ें ताकि आपको सारे कॉन्सेप्ट्स क्लियर हो जाएं।
तार लेखन (Telegram) की परिभाषा:
कम-से-कम शब्दों में सन्देश भेजने की पद्धति को ‘तार’ (Telegram) कहते हैं।
आज संचार के कई विकसित संसाधन उपलब्ध हैं; जैसे- टेलीफोन, फैक्स, टेलीप्रिंटर, इंटरनेट, मोबाईल आदि। फिर भी ‘तार’ या टेलीग्राम की परंपरा विद्यमान है। तार की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह है कि संचार के अन्य साधन जहाँ महँगे होने के साथ-साथ शहरों और कस्बों तक सीमित हैं, वहाँ तार सुदूर देहातों तक अपनी सेवाओं से जनता को लाभन्वित कर रहा है।
तार लेखन की पहली शर्त है- कम-से-कम शब्दों में काम की बातों को प्रेषित करना। इसके लिए समास-ज्ञान जरूरी है। लोगों का ऐसा कहना है कि English में तार भेजना कम खर्चीला है; लेकिन यह बात पूर्णतः सत्य नहीं है। हिन्दी में भी तार-लेखन सस्ता हो सकता है बशर्ते कि आपको सामासिकता का ज्ञान हो।
हम जानते हैं कि उसमें शब्द-संख्या के आधार पर सेवा-शुल्क तय होता है, इसलिए कम-से-कम शब्दों का प्रयोग करना ही बुद्धिमानी है। हम एक उदाहरण लेते हैं-
नववर्ष के उपलक्ष्य में अपने मित्र को बधाई देने के लिए हम अंग्रेजी में लिखेंगे- ”Happy New Year’! और हिन्दी में लिखेंगे- ‘शुभ नववर्ष’। अंग्रेजी में तीन शब्दों का और हिन्दी में दो शब्दों का प्रयोग हुआ। कल्पना करें- कौन सस्ता है?
पहले केवल अँगरेजी में डाकघरों से तार भेजा जाता था, किन्तु अब हिन्दी में भी तार भेजा जाता है। आजादी के बाद इसका प्रचार दिन-दिन बढ़ता जा रहा है और जनता में यह लोकप्रिय होता जा रहा है।
फिर भी, इस दशा में अभी बहुत कुछ करना है। हिन्दी में तार- सभी मुख्य तारघरों में देवनागरी में तार-प्रणाली चालू की जा चुकी है। राष्ट्रभाषा हिन्दी की उत्तरोत्तर प्रगति की दृष्टि से तार-क्षेत्र में भी हिन्दी का समुचित प्रयोग हो रहा है। कुछ लोगों का यह भ्रम है कि हिन्दी में तार लिखना महँगा है।
सूरदास का जीवन परिचय
नमस्कार दोस्तों। इसमें हम सबसे महान कवि सूरदास और उनके जीवन और यात्रा के बारे में देखेंगे। उनकी बेहतरीन कविताएँ होंगी। उनके जीवन से जुड़ी सभी घटनाओं का अध्ययन किया जाएगा। पोस्ट को पूरा पढ़ें, उनके बारे में जानने का मौका न चूकें जिन्होंने अपने काम और दिमाग से हिंदी कविता में जगह बनाई।
इसे भी पढ़ें- मुंशी प्रेमचन्द का जीवन परिचय
जीवन परिचय :-
सूरदास (Surdas) का जन्म 1540 (वि. स.) में रुनकता नामक गाँव में हुआ। यह गाँव मथुरा-आगरा मार्ग के किनारे स्थित है। कुछ विद्वानों का मत है कि सूर का जन्म सीही नामक ग्राम में एक निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था. वे बहुत विद्वान थे, उनकी लोग आज भी चर्चा करते है.
सूरदास (Surdas) के पिता, रामदास गायक थे। सूरदास के जन्मांध होने के विषय में मतभेद है। प्रारंभ में सूरदास आगरा के समीप गऊघाट पर रहते थे और वहीं उनकी भेंट श्री वल्लभाचार्य से हुई. वे उनके शिष्य बन गए। वल्लभाचार्य ने उनको पुष्टिमार्ग में दीक्षित कर के कृष्णलीला के पद गाने का आदेश दिया। सूरदास की मृत्यु गोवर्धन के निकट पारसौली ग्राम में 1620 (वि. स.) में हुई।
‘चौरासी वैष्णव की वार्ता’ के वर्णन के अनुसार उनका जन्म रुनकता अथवा रेणु का क्षेत्र (वर्तमान जिला आगरा के अंतर्गत) में हुआ था। मथुरा और आगरा के बीच गऊघाट पर ये निवास करते थे। बल्लभाचार्य से इनकी भेंट वहीं पर हुई थी। “भावप्रकाश’ में सूर का जन्म स्थान सीही नामक ग्राम बताया गया है। वे सारस्वत ब्राह्मण थे और जन्म के अंधे थे।
“आइने अकबरी’ में (संवत् 1653 वि०) तथा “मुतखबुत-तवारीख’ के अनुसार सूरदास को अकबर के दरबारी संगीतज्ञों में माना है।
अधिकतर विद्वानों का मत है कि सूर का जन्म सीही नामक ग्राम में एक निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बाद में ये आगरा और मथुरा के बीच गऊघाट पर आकर रहने लगे थे।
मदन मोहन सूरदास कैसे बने?
कुछ जनश्रुतियों के अनुसार सूरदासके बचपन का नाम मदन मोहन था. मदन मोहन एक बहुत ही सुन्दर और तेज बुद्धि का नवयुवक था जो हर दिन नदी के किनारे जा कर बैठ जाता और गीत लिखता था. एक दिन एक ऐसा वाकया हुआ जिसने उसके मन को मोह लिया. हुआ ये कि एक सुन्दर नवयुवती नदी किनारे कपड़े धो रही थी, मदन मोहन का ध्यान उसकी तरफ चला गया. उस युवती ने मदन मोहन को ऐसा आकर्षित किया कि वह कविता लिखना भूल गया और पूरा ध्यान लगा कर उस युवती को देखने लगा. उनको ऐसा लगा मानो यमुना किनारे राधिका स्नान कर के बैठी हो. उस नवयुवती ने भी मदन मोहन की तरफ देखा और उसके पास आकर बोली आप मदन मोहन जी हो ना?
जी हां मैं मदन मोहन हूँ, कविताये लिखता हूँ तथा गाता हूँ आपको देखा तो रुक गया. नवयुवती ने पूछा क्यों ? तो वह बोला आप हो ही इतनी सुन्दर. यह सिलसिला कई दिनों तक चला। जब यह बात मदन मोहन के पिता को पता चली तो उनको बहुत क्रोध आया और उन्होंने मदन मोहन को घर से निकाल दिया पर उस सुन्दर युवती का चेहरा उनके मन मस्तिष्क से नहीं जा रहा था एक दिन वह मंदिर मे बैठा था
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