आज का दिन कुछ अजीब-सा रहा…
अचानक उस शख़्स से सामना हो गया जो कभी सिर्फ़ मेरा दोस्त नहीं था बल्कि मेरी ज़िंदगी का एक अमूल्य हिस्सा था।
वो दौर भी याद आया जब उसकी खुशियाँ मेरी होती थीं और उसका परिवार मुझे अपना ही लगता था।
मन किया कि आज उससे बात न ही करूँ पर मेरे बड़े भैया और मेरी माँ ने मुझे ये संस्कार दिए हैं कि अगर कोई दुश्मन भी सामने आकर बात करे
तो उसे नज़रअंदाज़ नहीं करते— और ये तो फिर भी वो इंसान था जो कभी हमारे परिवार में शामिल था।
लेकिन एक अजब संयोग था…
आज उसने बात की शुरुआत ही "Sorry भाई" कहकर की।
कुछ देर बैठे, कुछ बातें कीं, उसने अपने घर के हालात साझा किए और जाते-जाते बोला—
“चौधरी, जल्द मिलेंगे… और जो भी हुआ,
अब सब भूल जाना मेरे भाई।”
और वो चला गया।
पर मैं साफ़ कह देना चाहता हूँ— मेरी ज़िंदगी में “Sorry” जैसे शब्दों की कोई जगह नहीं है।
मैं जिनको अपना मानता हूँ, उनसे लंबे समय तक नाराज़ रह ही नहीं सकता।
अगर कभी नाराज़ हो भी जाऊँ तो कुछ घंटे, कुछ दिन बाद मैं खुद ही बात कर लेता हूँ।
लेकिन, अगर किसी रिश्ते में मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुँची हो और मुझसे किसी ने दोस्ती और रिश्ते को खत्म करने की बात कही हो, और इन सबके बाद अगर उस शख्स को मैंने अपने जीवन से बाहर किया हो तो फिर वह रिश्ता मेरे लिए हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
फिर चाहे सामने खड़ा इंसान मेरा अपना ही खून क्यों न हो या मेरे समक्ष अपना गला ही क्यों न काटकर रख दे— मैं दोबारा कभी उस राह नहीं जाता।
मैं दोस्ती करता हूँ तो पूरी शिद्दत और पूरी ईमानदारी व निष्ठा से करता हूँ।
लेकिन जब मन से किसी को मिटा देता हूँ तो फिर स्वयं ब्रह्मा जी भी उतर आएँ, मैं उस दिशा में दोबारा कभी दोस्ती या रिश्ते का हाथ नहीं बढ़ाता।
मेरी दुनिया में रिश्ते खिलौने नहीं— वचन होते हैं।
और वचन, एक बार टूट जाए,
तो फिर कभी नहीं जुड़ते।










