Shree Ram Ayodhya | वशिष्ठ ऋषि ने किस गलत फहमी में रखा राम का नाम ? | Lo...
নস্ট্রেদমস ভবিষ্যদ্বাণী করে বলেছিলেন- অপেক্ষা করো স্বর্ণযুগ আসছে। একজন মহাপুরুষ আধ্যাত্মিক জ্ঞান দিয়ে সমগ্র বিশ্বে শান্তি আনবেন। যার নেতৃত্বে ভারত বিশ্বগুরু হয়ে উঠবে। সেই মহাপুরুষ হলেন সন্ত রামপাল জী মহারাজ, যার বোধ দিবস উপলক্ষে এবং কবীর পরমেশ্বর জীর নির্বাণ দিবস উপলক্ষে, আগামী 15-17-ই ফেব্রুয়ারি 11টি সতলোক আশ্রমে চার দিনের বিনামূল্যে বিশাল ভান্ডারার আয়োজন করা হচ্ছে। এই ভান্ডারাতে খাঁটি দেশি ঘি দিয়ে তৈরি খাবার, গরীবদাস জী মহারাজের অমর বাণীর খোলা পাঠ, যৌতুক মুক্ত বিবাহ ও রক্তদান শিবিরেরও আয়োজন করা হচ্ছে। যাতে আপনারা সবাই সাদরে আমন্ত্রিত।
नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणी की है कि ठहरो स्वर्ण युग आ रहा है। एक महापुरुष आध्यात्मिक ज्ञान से पूरे विश्व मे शांति लायेगा। जिसके नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनेगा। वह महापुरुष संत रामपाल जी महाराज जी हैं जिनके बोध दिवस के उपलक्ष्य में और कबीर परमेश्वर जी के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में 15- 17 फरवरी को 11 सतलोक आश्रमों में चार दिवसीय निःशुल्क विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इस भंडारे में शुद्ध देशी घी से निर्मित भोजन, गरीबदास जी महाराज की अमर वाणी का खुला पाठ, दहेज मुक्त शादियाँ व रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया जा रहा है। जिसमें आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
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कौन हैं संत रामपाल जी महाराज?
संत रामपाल जी महाराज कबीर परमेश्वर के अवतार हैं जिनके विषय में कबीर परमेश्वर ने 600 वर्ष पूर्व ही कबीर सागर के अध्याय स्वसमवेद बोध के पृष्ठ 171 पर बताया था कि
पांच सहंस अरू पाँच सौ पाँच, जब कलियुग बीत जाय।
महापुरूष फरमान तब, जग तारन को आय।।
घर घर बोध विचार हो, दुर्मति दूर बहाय।
कलियुग में इक होय सब, बरते सहज सुभाय।।
कहा उग्र कहा छुद्र हो, हरै सबकी भव पीर (पीड़)।
सो समान समदृष्टि है, समरथ सत्य कबीर।।
সন্ত রামপাল জী মহারাজ, তিনি কে?
সন্ত রামপাল জী মহারাজ কবীর পরমেশ্বরের অবতার, যাঁর সম্পর্কে কবীর পরমেশ্বর ৬০০ বছর পূর্বেই "কবীর সাগর" এর অধ্যায় "স্বসমবেদ বোধ" এর পৃষ্ঠা ১৭১-এ বলে দিয়েছেন:
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पूर्ण परमात्मा माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेते हैं, ना ही उनकी मृत्यु होती है। वे सशरीर आते हैं और सशरीर जाते हैं।
आज से लगभग 507 वर्ष पूर्व (माघ, शुक्ल एकादशी वि. स. 1575 सन् 1518 को) परमेश्वर कबीर जी ने उत्तरप्रदेश के मगहर कस्बे से लाखों लोगों के सामने सशरीर सतलोक (ऋतधाम) को प्रस्थान किया था। इसी उपलक्ष्य में संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में नेपाल सहित भारत के 11 सतलोक आश्रमों में 6 से 8 फरवरी 2025 को निर्वाण दिवस के अवसर पर 3 दिवसीय महासमागम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज की अमृतवाणी का अखंड पाठ, रक्तदान शिविर, दहेजमुक्त विवाह, आध्यात्मिक प्रदर्शनी, निःशुल्क नामदीक्षा, शुद्ध देशी घी से निर्मित विशाल भंडारा जैसे भव्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दिव्य भंडारे में संपूर्ण विश्व सह परिवार सादर आमंत्रित है।
পূর্ণ পরমাত্মা মাতৃগর্ভে জন্মগ্রহণ করেন না এবং তাঁর মৃত্যু ঘটে না। তিনি সশরীরে আগমন করেন এবং সশরীরেই গমন করেন।
আজ থেকে প্রায় ৫০৭ বছর পূর্বে (মাঘ, শুক্ল একাদশী, বিক্রমী সংবৎ ১৫৭৫, খ্রিস্টাব্দ ১৫১৮ সালে) পরমেশ্বর কবীর জি উত্তরপ্রদেশের মগহর শহর থেকে লক্ষ লক্ষ মানুষের সামনে সশারীরে সত্যলোক (ঋতধাম) গমন করেছিলেন। এই উপলক্ষে সন্ত রামপাল জি মহারাজের সান্নিধ্যে নেপালসহ ভারতের মোট ১১টি সতলোক আশ্রমে ৬ থেকে ৮ ফেব্রুয়ারি ২০২৫ পর্যন্ত নির্বাণ দিবস উপলক্ষে তিন দিনের মহাসমাগম অনুষ্ঠিত হতে চলেছে, যেখানে শ্রদ্ধেয় সন্ত গরীবদাস জি মহারাজের অমৃতবাণীর অখণ্ড পাঠ, রক্তদান শিবির, পণমুক্ত বিবাহ, আধ্যাত্মিক প্রদর্শনী, বিনামূল্যে নামদীক্ষা, বিশুদ্ধ দেশি ঘি দ্বারা প্রস্তুত বিশাল ভাণ্ডারার মতো মহৎ কর্মসূচি অনুষ্ঠিত হবে। এই দিব্য বিশাল ভাণ্ডারায় সমগ্র বিশ্বকে পরিবারসহ সাদর আমন্ত্রণ জানানো হচ্ছে।
परमेश्वर कबीर जी के निर्वाण दिवस को दिनांक 6 से 8 फरवरी 2025 को संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में 11 सतलोक आश्रमों में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। सभी आश्रमों में निःशुल्क भंडारे के साथ ही चप्पल-जूतों के सुव्यवस्थितकरण हेतु जूता घर एवं वाहानों की पार्किंग की व्यवस्था बहुत ही शानदार तथा निःशुल्क है।
आप सभी इस अवसर पर शुद्ध देसी घी से निर्मित भंडारे में सह परिवार सादर आमंत्रित हैं।
পরমেশ্বর কবীর জির নির্বাণ দিবস উপলক্ষে ৬ থেকে ৮ ফেব্রুয়ারি ২০২৫, সন্ত রামপাল জি মহারাজের সান্নিধ্যে ১১টি সতলোক আশ্রমে মহা উৎসাহের সাথে উদযাপন করা হচ্ছে। সমস্ত আশ্রমে বিনামূল্যে ভাণ্ডারার পাশাপাশি জুতো ঘর ও যানবাহনের পার্কিং এর সুব্যবস্থা করা হয়েছে, যা সম্পূর্ণ বিনামূল্যে ও অত্যন্ত সুন্দরভাবে পরিচালিত হবে।
আপনাদের সবাইকে পরিবারসহ বিশুদ্ধ দেশি ঘি দ্বারা প্রস্তুত ভাণ্ডারাতে সাদর আমন্ত্রণ জানানো হচ্ছে।
मगहर से सतलोक तक जाने की कहानी || Full Story Of Nirvan Diwas || What Is Nirvan Diwas? || Kabir Saheb
नकली गुरू जो भक्ति विधि बताते हैं, वह शास्त्र अनुसार नहीं होती है। इस वजह से भक्तों को उस भक्ति से कोई फायदा नहीं मिलता। इसी कारण से नकली गुरुओं ने एक षड्यंत्र रचा कि भगवान शिव का आदेश है कि जो काशी में मरेगा, वह स्वर्ग जाएगा। जो मगहर में मरेगा, वह नरक। भोले श्रद्धालु अपने मां बाप को अंतिम समय में काशी में किराए के घरों पर छोड़ने लगे।
वृद्धों की बढ़ती संख्या से चिंतित कुछ ब्राह्मणों ने काशी में करौंत नामक एक कुटिल योजना बनाई। उन्होंने इसे परमात्मा की इच्छा बताकर लोगों को गुमराह किया और अपने स्वार्थ की पूर्ति की। सच्चे गुरु का सत्संग और गहरा ज्ञान ही हमें सच्ची आध्यात्मिक साधना की ओर ले जा सकते हैं। बिना किसी ज्ञानी गुरु के मार्गदर्शन के, सत्य की खोज का रास्ता अक्सर भ्रामक और कठिन होता है।
हजरत बाबा आदम की कहानी सुनिए बाखबर की जुबानी। only Al Kabir Islamic chan...
নকল মুসলিম ধর্মগুরু জাকির নায়েক বলেন যে আত্মাগুলি কেয়ামত পর্যন্ত কবরে থাকে।
সন্ত রামপালজি মহারাজ পবিত্র কোরআন সুরাহ মুলক ৬৭:২ এবং সুরাহ আম্বিয়া ২১:১০৪ থেকে প্রমাণ করেন যে আত্মাগুলি জন্ম ও মৃত্যুর চক্রে আবর্তিত হয়, যা কেয়ামত পর্যন্ত থামে না।
অধিক তথ্যের জন্য সন্ত রামপালজি মহারাজ YouTube চ্যানেল দেখুন।
नकली मुस्लिम धर्मगुरु जाकिर नाइक का कहना है कि आत्माएं क़यामत तक कब्रों में रहती हैं।
संत रामपाल जी महाराज पवित्र कुरान सूरह मुल्क 67:2 और सूरह अंबिया 21:104 से प्रमाणित करते हैं कि आत्माएं जन्म और मृत्यु के चक्र में रहती हैं, जो क़यामत तक नहीं रुकता।
अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज यूट्यूब चैनल पर जाएं।
Sanatan Dharma पर हुई बड़ी बहस! क्या Sant Rampal Ji सच में सनातन धर्म की पुनः स्थापना कर रहे हैं?
গরীবদাসজী বলেছেন:-
তমা + খু = তামাক।
খু মানে রক্ত, তমা মানে গরু।
শতবার শপথ এটি খেও না বা পান করো না।
অর্থ:- ফারসি ভাষায় "তমা" মানে গরু এবং "খু" মানে রক্ত। তামাক গরুর রক্ত থেকে উৎপন্ন হয়। এর উপর গরুর লোমের মতো আঁশ থাকে। হে মানব, শতবার শপথ যে তুমি এই তামাক কোনো অবস্থায় গ্রহণ করবে না। এটি গরুর রক্তপান করার মতো পাপ।
संत गरीबदास जी ने कहा है कि:-
तमा + खू = तमाखू।
खू नाम खून का तमा नाम गाय।
सौ बार सौगंध इसे न पीयें-खाय।।
भावार्थ:- फारसी भाषा में ‘‘तमा’’ गाय को कहते हैं। खू = खून यानि रक्त को कहते हैं। यह तमाखू गाय के रक्त से उपजा है। इसके ऊपर गाय के बाल जैसे रूंग (रोम) जैसे होते हैं। हे मानव! तेरे को सौ बार सौगंद है कि इस तमाखू का सेवन किसी रूप में भी मत कर। तमाखू का सेवन गाय का खून पीने के समान पाप लगता है।
পরমেশ্বর কবীর সাহেবের ভক্তির মাধ্যমে পাপ ধ্বংস হয়।
সন্ত রামপালজি মহারাজ যজুর্বেদ অধ্যায় 5 মন্ত্র 32 এবং অধ্যায় 8 মন্ত্র 13 থেকে প্রমাণ করে বলেছেন যে কবীরদেব অর্থাৎ কবীর পরমেশ্বর গুরুতর থেকে গুরুতর পাপ ধ্বংস করেন এবং কর্মবন্ধন থেকে মুক্তি দিয়ে মোক্ষ প্রদান করেন।
परमेश्वर कबीर साहेब की भक्ति से पाप नष्ट होते हैं।
संत रामपाल जी महाराज जी यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 और अध्याय 8 मंत्र 13 से प्रमाणित करके बताते हैं कि कविर्देव अर्थात कबीर परमेश्वर घोर से घोर पाप का भी नाश कर देता है तथा काल के कर्मबंधनों से मुक्त कराकर मोक्ष प्रदान करता है।
हे भोले इंसान, देख ले प्रमाण, ये है भगवान | सनातनी पूजा का पतन | PART 5 | Who is God | Sant Rampal Ji
सब तीर्थों में श्रेष्ठ तीर्थ चित्तशुद्धि तीर्थ!
श्रीमद्देवी भागवत के छठे स्कन्ध, अध्याय 10 पृष्ठ 417 के अनुसार ‘‘तीर्थों के जल में स्नान करने से शरीर का मैल तो धुल जाता है, परंतु मन का मैल नहीं धुलता। उसके लिए तत्त्वदर्शी संत का सत्संग सुनना चाहिए। सत्संग चित्तशुद्धि करता है। इसे चित्तशुद्धि तीर्थ कहा जाता है। इसी का समर्थन गीता अध्याय 4 श्लोक 32 व 34 भी करता है।
अधिक जानकारी के लिए Sant Rampal Ji Maharaj App पर पढ़िए पवित्र "ज्ञान गंगा" ई-बुक
तीर्थों से लाभ संभव नहीं है। क्योंकि गीता अध्याय 16 श्लोक 23 कहा गया है कि जो व्यक्ति शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करते हैं उन्हें न सुख मिलता है, न उनकी गति होती। अर्थात तीर्थ यात्रा शास्त्र में वर्णित न होने से व्यर्थ साधना है।
अधिक जानकारी के लिए Sant Rampal Ji Maharaj App पर पढ़िए "हिन्दू साहेबान नहीं समझे गीता, वेद, पुराण" ई-बुक