सारा खेल मुसलमानों के लिए है!
👉 आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है! 🚫
👉 वोटर कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है! 🚫
👉 पैन कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है! 🚫
ड्राइविंग लाइसेंस नागरिकता का प्रमाण नहीं है! 🚫
👉 राशन कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है! 🚫
👉 और अब पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है...!! 🚫
नागरिकता का प्रमाण क्या है? ❓
अगर आप हिंदू हैं तो भले ही पाकिस्तानी, बांग्लादेशी या अफ़ग़ानिस्तानी हों- अमित शाह ने आपके लिए रेड कार्पेट बिछा रखा है। 🙏
और अगर आप मुसलमान हैं तो आधार, पैन, राशन, मतदाता, ड्राइविंग, आयुष्मान, खसरा-खतौनी, रजिस्ट्री... यहाँ तक कि अब पासपोर्ट भी आपकी नागरिकता सिद्ध नहीं कर सकता!! 🚫
जैसे किसी जायदाद के मालिकाना हक़ का अंतिम फ़ैसला दीवानी न्यायालय ही कर सकता है, उसी तरह (मुसलमानों की) नागरिकता का आख़िरी फ़ैसला फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के पास है...!!
जन्म प्रमाणपत्र के लिए इसलिए भागदौड़ मत कीजिए कि यह आपकी नागरिकता सिद्ध करेगा। नहीं! पिछले साल-दो साल में ऐसे हज़ारों, लाखों प्रमाणपत्र रद्द किए जा चुके हैं, सिर्फ़ इसलिए कि उनमें ज़्यादातर मुसलमानों के थे...!!
संघ और संघीय सरकार का उद्देश्य और लक्ष्य साफ़ है- मुसलमान!
इसलिए इस मुस्लिम-विरोधी तेज़ प्रवाह के ख़िलाफ़ चलने की नाकाम कोशिश मत कीजिए। आराम से साइड में खड़े रहिए। रूहानी हल तलाशिए। आपके ईमान के हिसाब से सबसे बड़ा कौन है- मामला उसके हाथ में दीजिए...!
मानना है तो मानेंगे, नहीं तो नहीं!
वोटर लिस्ट से नाम कटता है तो कटने दो। तुम्हारी कौन-सी सरकार चल रही है जो नाम कटने से गिर जाएगी!
डिटेंशन सेंटर का डर है तो इक्का-दुक्का थोड़ी हो, लाखों-करोड़ों में हो। तुम्हें रखने के लिए डिटेंशन सेंटर नहीं, बल्कि 'डिटेंशन ज़िला', 'डिटेंशन राज्य' बनाने पड़ेंगे!
न पाकिस्तान तुम्हें क़बूल करेगा, न बांग्लादेश।
सबसे बड़ा डर मौत का है- वो तो हक़ है, आनी ही है।
"और न कमज़ोर पड़ो, न ग़म करो; यदि तुम सच्चे मोमिन हो तो तुम ही ग़ालिब रहोगे।"
याद रखो, इस वादे में एक शर्त भी है- "
बस, सारी मेहनत उसी शर्त को पूरा करने में लगाओ। दुनिया की कोई ताक़त उस क़ौम को हरा नहीं सकती, जिसका ईमान ज़िंदा हो।