
❣ Chile in a Photography ❣
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जन्मदिवस :: केदारनाथ अग्रवाल
इसी जन्म में, इस जीवन में, हमको तुमको मान मिलेगा। गीतों की खेती करने को, पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा।
क्लेश जहाँ है, फूल खिलेगा, हमको तुमको ज्ञान मिलेगा। फूलों की खेती करने को, पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा।
दीप बुझे हैं जिन आँखों के, उन आँखों को ज्ञान मिलेगा। विद्या की खेती करने को, पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा।
मैं कहता हूँ, फिर कहता हूँ, हमको तुमको प्राण मिलेगा। मोरों-सा नर्तन करने को, पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा।
निद्रा भी कैसी प्यारी वस्तु है। घोर दु:ख के समय भी मनुष्य को यही सुख देती है।
~ जयशंकर प्रसाद
परिश्रम आदमी को भीड़ बनाने और प्रतिभा भीड़ में खो जाने की इजाजत नहीं देती।
~ राजकमल चौधरी
क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल
सबका लिया सहारा
पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे
कहो, कहाँ, कब हारा?
क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
तुम हुये विनत जितना ही
दुष्ट कौरवों ने तुमको
कायर समझा उतना ही।
अत्याचार सहन करने का
कुफल यही होता है
पौरुष का आतंक मनुज
कोमल होकर खोता है।
क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन
विषरहित, विनीत, सरल हो।
तीन दिवस तक पंथ मांगते
रघुपति सिन्धु किनारे,
बैठे पढ़ते रहे छन्द
अनुनय के प्यारे-प्यारे।
उत्तर में जब एक नाद भी
उठा नहीं सागर से
उठी अधीर धधक पौरुष की
आग राम के शर से।
सिन्धु देह धर त्राहि-त्राहि
करता आ गिरा शरण में
चरण पूज दासता ग्रहण की
बँधा मूढ़ बन्धन में।
सच पूछो, तो शर में ही
बसती है दीप्ति विनय की
सन्धि-वचन संपूज्य उसी का
जिसमें शक्ति विजय की।
सहनशीलता, क्षमा, दया को
तभी पूजता जग है
बल का दर्प चमकता उसके
पीछे जब जगमग है।
~ राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर
जयंती विशेष ~ भवानी प्रसाद मिश्र🌻🌼💐
कुछ लिख के सो,
कुछ पढ़ के सो,
तू जिस जगह जागा सवेरे,
उस जगह से कुछ बढ़ के सो
~ भवानी प्रसाद मिश्र
एक बेहतरीन किताब आपको कई प्रकार के अनुभव देती हैं, और अंत में थोड़ा उदास भी कर देती है। उसे पढ़ते हुए आप अनेक जीवन की यात्रा कर लेते हैं।
~ विलियम स्टायरन
जो शास्त्र में नहीं मिलता, वह ज्ञान आत्म-व्यथा में मिल जाता है।
~ जैनेंद्र कुमार
जब आप दूसरों के लिए अच्छा चाहते है तो वही अच्छी चीज़े आपके जीवन में वापस आती है।
किताबें
अगर आप वही किताबें पढ़ते है जो हर कोई पढ़ रहा है तो आप सिर्फ वही सोच सकते हो जो हर कोई सोच रहा है।
पिता के चेहरे से हर बात समझ लेतीं हैं
बेटियाँ घर के हालात समझ लेतीं है।
देवी का रूप इन्हें ऐसे ही नहीं कहते हैं
बेटियाँ माँ बाप के जज़्बात समझ लेती हैं।
बेटियोँ से घर आँगन आबाद रहता है
प्यार के बोल ही सौगात समझ लेती हैं।
वो बोलें तो लगे घर में जैसे कोयल कूकीं
पिता की नम नज़र बरसात समझ लेती हैं।
कहाँ क्या है रखा इन्हें याद सब रहता है
कहे बिना ही सबकी मुराद समझ लेती हैं।
पीहर की कोई ख़बर दे दे खुश हो जाती
दीदार इसको ही मुलाक़ात समझ लेती हैं।
किस्मतवालों के घर ही बेटी जन्म लेती हैं
पैदा होने से पहले औक़ात समझ लेती हैं।
छोटी छोटी सी बातों में ढूँढ लेतीं ख़ुशियाँ
थोड़े दीपक जले तो बारात समझ लेती हैं।
- कवि दीपक शर्मा
चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक!
~ माखनलाल चतुर्वेदी
वस्तुत...
मैं जो हूँ
मुझे वही रहना चाहिए
यानी
वन का वृक्ष
खेत की मेंड़
नदी की लहर
दूर का गीत
व्यतीत
वर्तमान में उपस्थित
भविष्य में
मैं जो हूँ
मुझे वही रहना चाहिए
तेज गर्मी
मूसलाधार बारिश
कड़ाके की सर्दी
खून की लाली
डूब का हरापन
फूल की ज़र्दी
मैं जो हूँ
मुझे वही रहना चाहिए
मुझे अपना
होना
ठीक ठाक सहना चाहिए
तपना चाहिए
अगर लोहा हूँ
तो हल बनने के लिए
बीज हूँ
गड़ना चाहिए
फल बनने के लिए
मैं जो हूँ
मुझे वही बनने चाहिए
धारा हूँ अन्तःसलिला
तो मुझे कुएं के रूप में
खनना चाहिए
ठीक ज़रूरतमंद हाथों में
गान फैलाना चाहिए मुझे
अगर मैं आसमान हूँ
मगर मैं
कब से ऐसा नहीं
कर रहा हूँ
जो हूँ
वही होने से दर रहा हूँ
कविता वह सुरंग है
जिसमें से गुजर कर
मानव एक संसार को छोड़कर
दूसरे संसार मे चला जाता है ।
~ रामधारी सिंह 'दिनकर'
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विश्व कविता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏🌻🌼