चिरमिरी से बिलासपुर को जोड़ने वाली इस सड़क की खास बात यह है कि इसका पहला स्वरूप 1930 के आसपास ही तैयार किया जा चुका था बिना मशीनों के पहाड़ों को काटकर स्थानीय मजदूरों ने इस रास्ते को बनाया था. मिली जानकारी के मुताबिक 1958 में चिरमिरी को बिलासपुर से जोड़ने इस सड़क का विस्तार हुआ. चिरमिरी के कोलंबस के नाम से पहचाने जाने वाले विभूति भूषण लाहिड़ी ने सड़क का सर्वे पूरा करवाया था. इसलिए सड़क की पहचान कोलंबस नाम से भी है. 1962 में कच्चे रास्ते पर सड़क का निर्माण शुरू हुआ. 1967-68 से सड़क का डब्ल्यूबीएम शुरू हुआ और 3 साल तक डब्ल्यूबीएम का काम चला. इसमें सरकार ने कोयला कम्पनी की सहायता ली थी. बता दें कि कोरिया जिले में बड़े पैमाने पर कोयला पाया जाता है. मनेन्द्रगढ़ और चिरमिरी में कोयले की बड़ी-बड़ी खदानें हैं. ऐसे में वहां से कोयले की ट्रांपोटिंग के लिए सड़क निर्माण सरकार के लिए जरूरी था. इसको ध्यान में रखते हुए ही पुरानी कच्ची व पथरिली सड़क को विकसित किया गया है. Exploring with: @prakash_debnath12 36 M O D #chirimirijannat #chirimiri #apnachirimiri #manendragarh #apnabaikunthpur #baikunthpur #ambikapur #coalindia #36garhtraveller #chhattisgarhtourism #chhattisgarhdiaries #chhattisgarhvibe #mountains #cfor36garh #bilaspurdiaries #bilaspurians #hamarchirimiri #hamarbilaspur😍 #raipur #hamarraipur #chirimirijannat💞💞🤟🤟 #raipurdiaries #indiaclicks #poi #djimini2 #photographers_of_india #viral #likesforlike (at Chirmiri, Chhattisgarh, India) https://www.instagram.com/p/CaAAwbXLPjD/?utm_medium=tumblr













