उड़ान
सुबह जरा सी धूल आखों में क्या आ गई सब कुछ धुंधला सा दिखने लगा उसी क्षण उस जगह के लिए मन से बुरा निकलने लगा
भरी दोपहर में बाज़ार क्या चला गया गर्मी से सर चकराने लगा उसी क्षण उस जगह के लिए मन से बुरा निकलने लगा
शाम को सड़क पर क्या निकल गया धुएं से जी घबराने लगा उसी क्षण उस जगह के लिए मन से बुरा निकलने लगा
आपकी स्थिति कई परिस्थितियों से जुड़ी हुई है इसे आप जानते है पर परस्थितियाँ नहीं जानती अंतरिक्ष, समय, और स्थिति से अव्यक्त भी व्यक्त है और जो है ही नहीं वह भी व्यक्त है
अंतरिक्ष और समय ही आकाश है और आपका वर्तमान आपकी स्थिति आकाश के पार ध्वनि नहीं सिर्फ प्रकाश जाता है बाहरी शोर भूलकर अंतर्मन में देखो जहां से प्रकाश आता है
मत भूलो कमल कीचड़ में खिलता है रेगिस्तानों में पौधा पत्थर पर भी उगता है जहा हर पक्षी बरसात में कहीं आश्रय लेता है वहीं बाज़ बादलों के ऊपर उड़ान भरता है
~ राहुल सिंह













