फर्क पड़ता है
मुझे गरीबी या अमिरि से फर्क नहीं पड़ता मगर अपनें रूठ जाये तो फर्क पड़ता है
मेरा नाम हो या मैं हो जाऊं बदनाम, फर्क नहीं पड़ता मगर किसी के काम न आ पाऊं तो फर्क पड़ता है
कोई मुझे मारे पिटे, फर्क नहीं पड़ता मगर माँ के हाथों से थप्पड़ न पड़े तो फर्क पड़ता है
कोई मुझे भला बुरा कहे, फर्क नहीं पड़ता मगर पिता की डांट न पड़े तो फर्क पड़ता है
मैं अंधेरे में रहूं या उजाले में, फर्क नहीं पड़ता मगर किसी के लिए रौशनी न बन पाया तो फर्क पड़ता है
कोई मेरा कहा सुने या न सुने, फर्क नहीं पड़ता मगर मैं किसी के शब्द न सुन पाऊँ तो फर्क पड़ता है
भीड़ हो या सन्नाटा फर्क नहीं पड़ता मगर किसी के अकेलेपन को दूर न कर पाऊँ तो फर्क पड़ता है
तुम मुझे मिलो या न मिलो, फर्क नहीं पड़ता मगर मेरे अंदर प्यार न हो तो फर्क पड़ता है
~ राहुल सिंह




















