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भ्रष्टाचार के खिलाफ में एंटी करप्शन हेल्पलाइन शुरू, CM बोले- एक हाथ से रिश्वत देना...
भ्रष्टाचार के खिलाफ में एंटी करप्शन हेल्पलाइन शुरू, CM बोले- एक हाथ से रिश्वत देना…
Punjab Government Started Anti Corruption Helpline: लोकमत मीडिया ग्रुप के स्वर्ण जयंती के अवसर पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लोगों को संबोधित किया. अपने संबोधन के दौरान भगवंत मान ने कहा, ‘पंजाब और देश की सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार है. इसलिए हमने एंटी करप्शन हेल्पलाइन शुरू की है. हमारा लोगों से कहना है कि सरकारी अधिकारी रिश्वत मांगे तो मना मत करना. एक हाथ से रिश्वत दे देना और दूसरे हाथ से…
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'भ्रष्टाचार को प्रणाम, ईमानदारी को 'जय श्रीराम! Divya Sandesh
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'भ्रष्टाचार को प्रणाम, ईमानदारी को 'जय श्रीराम!
चीनी मिल संघ में हुआ भ्रष्टाचार का खुलासा
चीनी की कम उठान व सब्सिडी से लगाया 35 करोड़ का चूना
चीनी मिलों को आवंटित हुई थी 1.94 लाख कुंतल चीनी
राकेश यादव
लखनऊ। भ्रष्टïाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस वाली सरकार और ईमानदार अफसर के हवाले चीनी महकमा होने के बावजूद उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ के अधिकारियों को न तो शासन का कोई डर है और न ही कार्रवाई की चिंता। तभी तो अफसरों ने कमीशन के चक्कर में फर्जी फर्म को चीनी एक्सपोर्ट का ठेका देकर संघ को करीब 35 करोड़ रुपए का चूना लगवाया है। सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि चीनी संघ के अफसरों ने ‘मिठासÓ के चक्कर में टेंडर देने वाली फर्म का सत्यापन तक नहीं कराया। मामला प्रकाश में आने पर न तो शासन के और न ही जिले के अफसर मुंह खोलने को तैयार हैं।
चीनी मिलों को मिले सब्सिडी चेक हुए बाउंस लखनऊ। भारत सरकार से मिली सब्सिडी के चेक जब चीनी मिलों को दिए गए तो चेक बाउंस हो गए। पड़ताल की गई तो पता चला कि चेन्नई की फर्म ने जो पता दिया था वह फर्जी निकला। इस पर चीनी मिल संघ के अधिकारियों ने मिल के जीएम को लीगल कार्यवाही का पत्र भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। उधर चीनी मिल के जीएमओ ने वसूली का कोई प्रयास न करके वकील से नोटिस बनवाकर फर्म को भेज दिया। फर्म के फर्जी होने से रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई नोटिस वापस आ गयी। इस संबंध में जब जीएम सेमिखेडा व गजरौला से बात करने का प्रयास किया तो उनका फोन है नहीं उठा। नानपारा जीएम प्रदीप त्रिपाठी ने सवालों पर पड़ताल करने के बाद सिर्फ इतना ही कहा कि इसकी जानकारी लखनऊ हेड आफिस से मिलेगी। एग्रीमेंट के सवाल पर उन्होंने फोन ही काट दिया। एमडी विमल दुबे ने चुप्पी साध रखी है।
बताते चलें कि चीनी मिल संघ को बीते वर्ष फरवरी 2020 में भारत सरकार ने एक्सपोर्ट के लिए चीनी का आवंटन किया। पांच चीनी मिल बेलरायां, सम्पूर्णनगर, नानपारा, सेमिखेड़ा तथा गजरौला के लिए 1.94 लाख कुंतल आवंटित चीनी के लिए संघ के अधिकारियों ने ई-टेंडर के माध्यम से निविदाएं मांगी गई। एक्सपोर्ट का टेंडर वेंकटेश्वर ग्लोबल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई (तमिलनाडु) को दिया गया। सूत्रों का कहना है कि रेट कॉन्ट्रेक्ट में सब्सिडी डर से 2440 से 2465 प्रति कुंतल की दर पर चीनी बेची गयी। जिस पर भारत सरकार से आठ सौ रुपये प्रति कुंतज की सब्सिडी जो करीब 16 करोड़ थी। चीनी मिलों को मिलनी थी। सूत्रों का कहना है कि संघ की ओर से रेट कॉन्ट्रेक्ट जारी होने पर सेमिखेडा चीनी मिल ने 18000 आवंटन के विरुद्ध 18000 कुंतल का उठान, नानपारा मिल ने 46000 के सापेक्ष 46000 कुंतल उठान, गजरौला मिल से 38000 के सापेक्ष 12,500 कुंतल उठान, संपूर्णानगर मिल से 46000 आवंटन के सापेक्ष 4777 कुंतल उठान और बेलरायां मिल से 46000 के विरुद्ध 18000 कुंतल उठान हुई। सूत्रों का कहना है कि संघ के आदेशों पर 1.94 लाख कुंतल सब्सिडी चीनी के सापेक्ष मिलों ने एक लाख कुंतल चीनी का उठान कर दिया गया। संघ के एक्सपोर्ट के लिए जारी रेट कॉन्ट्रेक्ट की शर्तों के अनुसार एक्सपोर्ट के लिए फर्म को जो आवश्यक प्रपत्र सी पोर्ट लाकर पार्टी को मिल में जमा करना था। वह फर्म के जमा नहीं कर पाने के कारण तीन चीनी मिलों संपूर्णानगर, बेलमायां व गजरौला ने चीनी उठान को रोक दिया। इसकी जानकारी होने पर चीनी मिल संघ व मिलों ने जब पता किया तो पता चला कि फर्म का चेन्नई वाला पता फर्जी निकला। सूत्र बताते है कि फर्जी फर्म ने एक लाख कुंतल उठान वाली चीनी को भारी मार्जिन लेकर लोकल मार्केट में बेच दिया। इसके एवज में संघ अधिकारियों को मोटा कमीशन देकर मिलों को करीब 40 करोड़ का चूना लगा दिया। मजे की बात यह है कि संघ के अधिकारियों ने फर्जी फर्म के खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं की। इस संबंध में चीनी मिल संघ के प्रबंध निदेशक विमल कुमार दुबे से कई बार बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया। यही हाल अपर मुख्य सचिव गन्ना संजय भुसरेड्डी का भी रहा।