आतंकी हमलों के लिए बीजेपी जिम्मेदार|

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आतंकी हमलों के लिए बीजेपी जिम्मेदार|
( शिकारे) शिकार हो गये जन्नत ऐ कश्मीर ! क्यूं किया हमें जहुन्नम के हवाले ?सियासियों को कहो," इक रात संग (तंबू ) मे तो निकाले।"
देखिये पूरी वीडियो Youtube channel CUT MEDIA पर.सारि जानकारी इस एक वीडियो में https://youtu.be/tCS89NMA_9c #धारा370 #dhara370 #artical370 https://www.instagram.com/p/B0zoPPsFGjr/?igshid=b3j4uk962tqk
ध्वज फहराया। #article370 #removearticle370 #dhara370 #article370scrapped #article370ends #370 https://www.instagram.com/p/B0yi7zcBSFD/?igshid=1ip7lkzzyypc2
क्या है धारा 370 जिसे लेकर जम्मू-कश्मीर में मचा है बवाल, जानिए राज्य को इससे मिलती हैं कौन-सी विशेष सुविधाएं?
चैतन्य भारत न्यूज श्रीनगर. जब भी कभी कश्मीर का जिक्र हो और धारा 370 की बात न हो ऐसा तो हो नहीं सकता। भारतीय संविधान के धारा 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष स्वायत्तता दी गई है। अक्सर ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाए जाने की मांग की जाती है लेकिन कश्मीर के नेता और स्थानीय निवासी इसे हटाने की संभावना का पुरजोर विरोध करते आ रहे हैं। आइए जानते हैं आखिर धारा 370 है क्या? क्या है धारा 370 जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा ने 27 मई, 1949 को धारा 370 स्वीकार कर लिया। फिर 17 अक्टूबर, 1949 को यह धारा भारतीय संविधान का हिस्सा बन गया। धारा 370 में यह उल्लेख किया गया है कि देश की संसद को जम्मू-कश्मीर के लिए रक्षा, विदेश मामले और संचार के अलावा अन्य किसी विषय में कानून बनाने का अधिकार नहीं होगा। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर को अपना अलग संविधान बनाने की अनुमति दे दी गई। राष्ट्रपति के पास भी राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है। इन्हीं प्रावधानों के कारण ही भारत सरकार द्वारा बनाए गए कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते हैं। जम्मू-कश्मीर राज्य का अपना अलग झंडा भी है। राज्य में सरकारी दफ्तरों में भारत के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर का भी झंडा लगा रहता है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को दोहरी नागरिकता भी मिलती है। यानी वह भारत के नागरिक होने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के भी नागरिक हैं। धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को मिले हुए हैं- भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती। कश्मीर में पंचायत को अधिकार प्राप्त नहीं है। जम्मू-कश्मीर में संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती। इस वजह से राष्ट्रपति के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है। यानी कि वहां राष्ट्रपति शासन नहीं, बल्कि राज्यपाल शासन लगता है। जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है, जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। कश्मीर में अल्पसंख्यकों को 16% आरक्षण नहीं मिलता। धारा 370 के अंतर्गत कश्मीर में बाहरी राज्यों के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं। इस धारा के अंतर्गत कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है। धारा 370 की वजह से कश्मीर में आरटीआई (RTI) और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते है। जम्मू-कश्मीर में भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं माना जाता है। भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं। जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा यदि वह किसी पाकिस्तान के व्यक्ति से शादी कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाएगी। Read the full article
महबूबा मुफ्ती ने कहा धारा 370 ख़त्म की भारत से रिश्ते तोड लेगा J&K
धारा 370 को लेकर महबूबा मुफ्ती ने विवादित बयान दिया है. उनका कहना है कि अगर इसे खत्म किया गया, धमकी भरे लहजे में उन्होंने कहा की इसके परिणाम ठीक नहीं होंगे. वह जम्मू-कश्मीर की विलय संधि खत्म करने की डेडलाइन दे रही हैं. इससे पहले भी वह भारत से संबंध खत्म करने की धमकी दे चुकी हैं.महबूबा ने बुधवार को जम्मू कश्मीर के अनंतनाग से अपना नामांकन दाखिल किया. उसके बाद उन्होंने ये बयान जारी किया. महबूबा मुफ्ती ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को चुनौती देते हुए कहा था कि धारा 370 और 35ए को हटाने का सपना ना देखें. और ऐसा हुआ, तो जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रहेगा.पीडीपी प्रमुख से पहले नेशनल कॉफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला भी राज्य को लेकर विवादास्पद बयान दे चुके हैं. उन्होंने कहा था कि एक देश में दो प्रधानमंत्री की व्यवस्था को लागू करेंगे. जम्मू कश्मीर के लिए अलग पीएम होगा.
उन्होंने कहा कि अगर संवैधानिक प्रावधान को हटाया गया, तो उनके साथ-साथ मुख्य धारा के नेताओं को आगे के कदम पर फिर से विचार करना होगा. मुफ्ती ने कहा, “अगर आप इस पुल को तोड़ते हैं, तो महबूबा मुफ्ती जैसे मुख्यधारा के नेताओं, जो भारत के संविधान और जम्मू कश्मीर के संविधान की शपथ लेते हैं, उन्हें हमारे आगे के कदमों पर फिर से विचार करना होगा, क्योंकि हमने भारत के झंडे का समर्थन किया है और अगर (अनुच्छेद) 370 को छुएंगे, तो यह झंडा हमारे हाथों या हमारे कंधों पर नहीं रहेगा.”महबूबा ने एक ट्वीट में कहा कि अगर लोगों के लिए खड़ा होना उन्हें अलगाववादी और देश विरोधी बनाता है तो वह गर्व के साथ स्वीकार करती हैं.उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नया भारत अस्वीकार्य है जहां धर्म के नाम पर पीट-पीटकर लोगों की हत्या करनेवालों को माला पहनाया जाता है और उनका सम्मान किया जाता है. अगर अपने लोगों के लिए खड़ा होना मुझे अलगाववादी और देश विरोधी बनाता है तो इसे मैं गर्व के साथ स्वीकार करूंगी.’’दरअसल नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला द्वारा जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद की फिर से मांग किए जाने के बाद जेटली ने सोमवार को कहा था कि उनका यह बयान ‘अलगाववादी मानसिकता’ पैदा करता है और नए भारत में किसी भी सरकार को इस तरह की गलती करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. #MEHBUBA MUFTI #DHARA370 #jammu & kashmir #amitshah
धारा 370 को लेकर महबूबा मुफ्ती ने विवादित बयान दिया है. उनका कहना है कि अगर इसे खत्म किया गया, धमकी भरे लहजे में उन्होंने कहा की इसके परिणाम ठीक नहीं होंगे. वह जम्मू-कश्मीर की विलय संधि खत्म करने की डेडलाइन दे रही हैं. इससे पहले भी वह भारत से संबंध खत्म करने की धमकी … Continue reading "महबूबा मुफ्ती ने कहा धारा 370 ख़त्म की भारत से रिश्ते तोड लेगा J&K"