#धर्मविजय_का_प्रतीक_दशहरा
जिस तरह रावण रूपी राक्षस को मारकर श्रीराम ने त्रेतायुग में धर्म की पताका लहराई थी। ठीक इसी प्रकार आज चारों ओर अधर्म का बोलबाला हो चुका है जिसे संत रामपाल जी महाराज शास्त्र अनुकूल ज्ञान से समाप्त कर धर्म की पुनर्स्थापना कर रहे हैं।











